मोबाइल फोन: सुविधा या लत? | मोबाइल के फायदे और नुकसान | हिंदी लेख
परिचय आधुनिक युग में विज्ञान का एक अद्भुत और महत्त्वपूर्ण उपहार मोबाइल फोन है। सुबह आँख खुलने से लेकर रात को विश्राम करने तक यह हमारे जीवन का लगभग अभिन्न साथी बन चुका है। जहाँ एक ओर इसने हमारे अनेक कार्यों को सरल बनाया है, वहीं दूसरी ओर इसका अत्यधिक उपयोग कई नई समस्याओं का कारण भी बन रहा है। प्रस्तुत लेख में मोबाइल फोन की उपयोगिता के साथ-साथ इसकी लत से होने वाले दुष्प्रभावों पर चर्चा की गई है। आज मोबाइल फोन ने पूरी दुनिया को मानो हमारी मुट्ठी में समेट दिया है। कुछ दशक पहले जिन कार्यों के लिए घंटों या कई दिनों का समय लगता था, वे आज कुछ ही क्षणों में पूरे हो जाते हैं। यह एक ऐसी तकनीकी सुविधा है जिसने मनुष्य के जीवन को पहले की अपेक्षा कहीं अधिक सरल और सुविधाजनक बना दिया है। किसी से तुरंत संपर्क करना हो, पढ़ाई करनी हो, बैंकिंग का कार्य हो या मनोरंजन—अनेक कार्य अब एक ही मोबाइल फोन से सहजता से पूरे हो जाते हैं। यही कारण है कि आज यह बच्चों से लेकर बुज़ुर्गों तक, हर आयु वर...

वाह सुधा जी बहुत सुंदर कह मुकरीयाँ।
जवाब देंहटाएंलिखते रहिए ।
सहृदय धन्यवाद कुसुम जी !
हटाएंसस्नेह आभार।
बहुत सुंदर और ज्ञानवर्धक सृजन।
जवाब देंहटाएंसादर नमन।
बहुत बहुत धन्यवाद अनीता जी !मेरी रचना को चर्चा मंच पर साझा कने के लिए....
जवाब देंहटाएंसस्नेह आभार।
हृदयतल से धन्यवाद शशि जी !
जवाब देंहटाएंसादर आभार।
बहुत सुंदर.
जवाब देंहटाएंकुछ पहेली बुझाने जैसी रचना को कह्मुकरी कहते हैं शायद.
आइयेगा- प्रार्थना
जी , तहेदिल से धन्यवाद एवं आभार आपका...।
हटाएंबहुत सुन्दर सुधा जी !
जवाब देंहटाएंहार्दिक धन्यवाद सर!
हटाएंसादर आभार....।
बहुत सुंदर मुकरियां, सुधा दी।
जवाब देंहटाएंसहृदय धन्यवाद ज्योति जी !
हटाएंसस्नेह आभार....।
बहुत सुंदर सुधा जी
जवाब देंहटाएंसहृदय धन्यवाद रितु जी !
हटाएंसस्नेह आभार...।
बहुत ही सुंदर सृजन सुधा जी ,सादर नमस्कार
जवाब देंहटाएंसहृदय धन्यवाद कामिनी जी !
हटाएंसस्नेह आभार....।
आभारी हूँ यशोदा जी मुखरित मौन के मंच पर मेरी रचना साझा करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद आपका।
जवाब देंहटाएंबहुत सुन्दर कहमुकरियां सुधा जी !
जवाब देंहटाएंसभी की सभी लाजवाब👌👌
सस्नेह आभार सखी !
हटाएंउत्साहवर्धन हेतु बहुत बहुत धन्यवाद।
बहुत सुंदर रोचक हास्य पैदा करतीं कहमुकारियाँ।
जवाब देंहटाएंबधाई एवं शुभकामनाएँ।
आभारी हूँ रविन्द्र जी ! बहुत बहुत धन्यवाद आपका।
हटाएंबहुत सुंदर कहमुकरियाँ सखी
जवाब देंहटाएंहृदयतल से धन्यवाद सखी !
हटाएंसस्नेह आभार।
बहुत ही सुंदर कहमुकरी लिखी है आपने...
जवाब देंहटाएंबिन उसके मैं जी न पाऊँ
हर पल मैं उसको ही चाहूँ
अब तक उसका न कोई सानी
क्यों सखि साजन ?.........
.................... ना सखी पानी।
ऐसे ही लिखते रहें ।बहुत-बहुत शुभकामनाएँ आदरणीया ।
धन्यवाद पुरुषोत्तम जी हृदयतल से आभारी हूँ उत्साहवर्धन हेतु...।
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