कहमुकरी



rose flower


बल विद्या बुद्धि को बढ़ाता
बस धनवानों से है नाता
है छोटा पर बड़े हैं काम
क्या सखि साजन ?...
...........न सखि बादाम ।


बिन उसके मैं जी न पाऊँ
हर पल मैं उसको ही चाहूँ
अब तक उसका न कोई सानी
क्यों सखि साजन ?.........
.................... ना सखी पानी।

है छोटा पर काम बड़े हैं
कण कोशों में भरे पड़े हैं
कीट-पतंगों से अनुराग
क्या सखि साजन ?....
.................. नहिं री पराग ।

प्रेम प्रतीक है माना जाता
मन को मेरे अति हर्षाता
काँटों में भी रहे शादाब
हैं सखी साजन ?......
..................नहिं री गुलाब ।

  चित्र साभार गूगल से.....



टिप्पणियाँ

मन की वीणा ने कहा…
वाह सुधा जी बहुत सुंदर कह मुकरीयाँ।
लिखते रहिए ।

बहुत सुंदर और ज्ञानवर्धक सृजन।
सादर नमन।
Sudha Devrani ने कहा…
बहुत बहुत धन्यवाद अनीता जी !मेरी रचना को चर्चा मंच पर साझा कने के लिए....
सस्नेह आभार।
Sudha Devrani ने कहा…
सहृदय धन्यवाद कुसुम जी !
सस्नेह आभार।
Sudha Devrani ने कहा…
हृदयतल से धन्यवाद शशि जी !
सादर आभार।
Rohitas Ghorela ने कहा…
बहुत सुंदर.
कुछ पहेली बुझाने जैसी रचना को कह्मुकरी कहते हैं शायद.

आइयेगा- प्रार्थना
बहुत सुन्दर सुधा जी !
Jyoti Dehliwal ने कहा…
बहुत सुंदर मुकरियां, सुधा दी।
Ritu asooja rishikesh ने कहा…
बहुत सुंदर सुधा जी
Kamini Sinha ने कहा…
बहुत ही सुंदर सृजन सुधा जी ,सादर नमस्कार
Sudha Devrani ने कहा…
जी , तहेदिल से धन्यवाद एवं आभार आपका...।
Sudha Devrani ने कहा…
हार्दिक धन्यवाद सर!
सादर आभार....।
Sudha Devrani ने कहा…
सहृदय धन्यवाद ज्योति जी !
सस्नेह आभार....।
Sudha Devrani ने कहा…
सहृदय धन्यवाद रितु जी !
सस्नेह आभार...।
Sudha Devrani ने कहा…
आभारी हूँ यशोदा जी मुखरित मौन के मंच पर मेरी रचना साझा करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद आपका।
Sudha Devrani ने कहा…
सहृदय धन्यवाद कामिनी जी !
सस्नेह आभार....।
Meena Bhardwaj ने कहा…
बहुत सुन्दर कहमुकरियां सुधा जी !
सभी की सभी लाजवाब👌👌
Ravindra Singh Yadav ने कहा…
बहुत सुंदर रोचक हास्य पैदा करतीं कहमुकारियाँ।
बधाई एवं शुभकामनाएँ।
Anuradha chauhan ने कहा…
बहुत सुंदर कहमुकरियाँ सखी
Sudha Devrani ने कहा…
सस्नेह आभार सखी !
उत्साहवर्धन हेतु बहुत बहुत धन्यवाद।
Sudha Devrani ने कहा…
आभारी हूँ रविन्द्र जी ! बहुत बहुत धन्यवाद आपका।
Sudha Devrani ने कहा…
हृदयतल से धन्यवाद सखी !
सस्नेह आभार।
बहुत ही सुंदर कहमुकरी लिखी है आपने...
बिन उसके मैं जी न पाऊँ
हर पल मैं उसको ही चाहूँ
अब तक उसका न कोई सानी
क्यों सखि साजन ?.........
.................... ना सखी पानी।
ऐसे ही लिखते रहें ।बहुत-बहुत शुभकामनाएँ आदरणीया ।
Sudha Devrani ने कहा…
धन्यवाद पुरुषोत्तम जी हृदयतल से आभारी हूँ उत्साहवर्धन हेतु...।

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