चुप सो जा ! मेरे मन ! चुप सो जा !!
रात छाई है घनी, पर कल सुबह होनी नयी, कर बन्द आँखें , सब्र रख तू , मत रो ,मुझे न यूँ सता ! चुप सो जा ! मेरे मन ! चुप सो जा !! तब तक तू चुप सोया ही रह ! जब तक न हो जाये सुबह नींद में सपनों की दुनिया तू सजा ! चुप सो जा ! मेरे मन ! चुप सो जा !! सोना जरुरी है नयी शुरुआत करनी है भूलकर सारी मुसीबत, आस भरनी है जिन्दगी के खेल फिर-फिर खेलने तू जा ! चुप सो जा ! मेरे मन ! चुप सो जा !! सोकर जगेगा तब नया सा प्राण पायेगा जो खो दिया अब तक, उसे भी भूल जायेगा पाकर नया कुछ, फिर पुराना तू यहाँ खो जा चुप सो जा ! मेरे मन ! चुप सो जा !! दस्तूर हैं दुनिया के कुछ वो तू भी सीख ले है सुरमई सुबह यहाँ, तो साँझ भी ढ़...