मंगलमय नववर्ष हो
नववर्ष की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं बीत गया पच्चीस अब, बिसरें बीती बात । मंगलमय नववर्ष हो, सुखमय हो दिन रात। शुभता का संदेश ले, आएगा छब्बीस । दुर्दिन होंगे दूर अब , सुख की हो बरसात ।। स्वागत आगत का करें , अभिनंदन कर जोर । सबको दे शुभकामना , आये स्वर्णिम भोर । घर आँगन खुशियाँ भरे, विपदा भागे दूर, सुख समृद्धि घर में बसे, खुशहाली चहुँओर ।। हार्दिक शुभकामनाओं के साथ एक और रचना निम्न लिंक पर ● और एक साल बीत गया

पंछी उड़ ही जाते हैं नीड़ सूना करके
जवाब देंहटाएंमुट्ठीभर देकर खुशियाँ यादें दूना करके
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क्या कहें महसूस कर सकते हैं आपकी विह्वलता, भावपूर्ण अभिव्यक्ति दी।
सस्नेह प्रणाम।
वाह
जवाब देंहटाएंबहुत बहुत सुन्दर
जवाब देंहटाएंइस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
जवाब देंहटाएंS शानदार
जवाब देंहटाएंशब्दों के बहुत सुंदर मोती पिरोए हैं,मन की विह्वलता को दर्शाती बहुत सुन्दर रचना।
जवाब देंहटाएंसफलता से उनकी खुश तो बहुत हैं
जवाब देंहटाएंमगर दूरियों से मचलने लगे हैं ।
सुंदर... प्रासंगिक विषय पर लिखी गयी ग़ज़ल...
माँ बाप के महत्त्व को भूल जाते हैं हम लोग अक्सर ...
जवाब देंहटाएंआपने बाखूबी हर पंक्ति में इस को बताने का प्रयास किया है ...
कटता नहीं वक्त,अब नीड़ भी रिक्त
जवाब देंहटाएंपरिंदे जो 'पर' खोल उड़ने लगे हैं ।//
हर घर से पलायन कर रहे घर के चिरागों पर मर्मांतक रचना प्रिय सुधा! मैं इस वेदना को तीन चार सालों से झेल रही सखी! ये खाली नीड़ डराने लगे है! आँखे नम कर गई ये रचना 😞