आओ बच्चों ! अबकी बारी होली अलग मनाते हैं

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  आओ बच्चों ! अबकी बारी  होली अलग मनाते हैं  जिनके पास नहीं है कुछ भी मीठा उन्हें खिलाते हैं । ऊँच नीच का भेद भुला हम टोली संग उन्हें भी लें मित्र बनाकर उनसे खेलें रंग गुलाल उन्हें भी दें  छुप-छुप कातर झाँक रहे जो साथ उन्हें भी मिलाते हैं जिनके पास नहीं है कुछ भी मीठा उन्हें खिलाते हैं । पिचकारी की बौछारों संग सब ओर उमंगें छायी हैं खुशियों के रंगों से रंगी यें प्रेम तरंगे भायी हैं। ढ़ोल मंजीरे की तानों संग  सबको साथ नचाते हैं जिनके पास नहीं है कुछ भी मीठा उन्हें खिलाते हैं । आज रंगों में रंगकर बच्चों हो जायें सब एक समान भेदभाव को सहज मिटाता रंगो का यह मंगलगान मन की कड़वाहट को भूलें मिलकर खुशी मनाते हैं जिनके पास नहीं है कुछ भी मीठा उन्हें खिलाते हैं । गुझिया मठरी चिप्स पकौड़े पीयें साथ मे ठंडाई होली पर्व सिखाता हमको सदा जीतती अच्छाई राग-द्वेष, मद-मत्सर छोड़े नेकी अब अपनाते हैं  जिनके पास नहीं है कुछ भी मीठा उन्हें खिलाते हैं । पढ़िए  एक और रचना इसी ब्लॉग पर ●  बच्चों के मन से

हरते सबके कष्ट सदाशिव भोले शंकर

 

God Shiva



                      【1】

शंकर भोलेनाथ शिव , नंदीश्वर, भगवान ।

बाघम्बर भैरव शिवा, शम्भू कृपा निधान ।

शम्भू कृपा निधान, उमापति बम बम भोले ।

अवढर दानी नाथ, सभी की किस्मत खोले ।

जपते नमः शिवाय, भक्त सावन में घर घर  ।

हरते सबके कष्ट, सदाशिव भोले शंकर  ।।



                          【2】

शिवशंकर कैलाशपति , महिमा अपरम्पार ।

शशिशेखर विरुपाक्ष शिव,जग के पालनहार ।

जग के पालनहार,  दीन के हैं रखवारे ।

बम बम भोले घोष, भक्त करते जयकारे ।

भजे सुधा कर जोरि, नमामि जै गिरिजेश्वर ।

करो सृष्टि उद्धार, कृपानिधि जै शिवशंकर ।।



पढ़िए सावन और शिव भक्ति पर आधारित अन्य कुण्डलिया छंद निम्न लिंक पर ।

● मन में भरे उमंग, मनोहर पावन सावन



टिप्पणियाँ

  1. बहुत सुंदर भक्ति और भावों से पूर्ण कुंडलियाँ सुधा जी ।
    हार्दिक बधाई।

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  2. बहुत सुंदर भक्ति और भावों से पूर्ण कुंडलियाँ सुधा जी ।
    हार्दिक बधाई।
    कुसुम कोठारी 'प्रज्ञा'

    जवाब देंहटाएं
  3. बहुत सुंदर एवम धन्यवाद इस पवित्र श्रावण मास में भोले बाबा की भक्तिमय स्तुति की रचना के लिए पुनः धन्यवाद।

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  4. बहुत ही सुन्दर भक्ति मय रचना मन आह्लादित हो गया सखी

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  5. भक्ति भाव से पूरित भगवान शिव को समर्पित कुण्डलियाँ मनभावन लगी ।अति सुन्दर सृजन सुधा जी !

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