मन में भरे उमंग, मनोहर पावन सावन - सावन पर कुण्डलिया छंद
परिचय
सावन का मौसम आते ही प्रकृति हरियाली, वर्षा और उमंग से भर उठती है। रिमझिम फुहारों और मनोहारी पवन के बीच मन भी आनंद से सराबोर हो जाता है। सावन की इसी सुंदर अनुभूति और शिवभक्ति को कुण्डलिया छंद के माध्यम से शब्द देने का एक छोटा-सा प्रयास है।
सावन बरसा जोर से, नाच उठा मनमोर ।
कागज की कश्ती बही , बाल मचाये शोर ।।
बाल मचाये शोर, पींग झूले की भरते ।
रिमझिम बरसे मेघ, भीग अठखेली करते ।।
कहे सुधा सुन मीत, कि पावस है मनभावन ।
मन में भरें उमंग, मनोहर पावन सावन ।।
आया सावन मास अब, मन शिव में अनुरक्त ।
पूजन अर्चन जग करे, शिव शिव जपते भक्त ।।
शिव शिव जपते भक्त, चल रहे काँवर टाँगे ।
करते शिव अभिषेक, मन्नतें प्रभु से माँगे ।।
चकित सुधा करजोरि, देखती शिव की माया ।
भक्ति भाव उल्लास , लिये अब सावन आया ।।
निष्कर्ष
सावन केवल ऋतु परिवर्तन का संकेत नहीं, बल्कि प्रकृति और मन दोनों में उमंग जगाने वाला मौसम है। वर्षा की फुहारों और शिवभक्ति से जुड़ी यही सुंदर अनुभूति इस कुण्डलिया छंद में शब्दों के रूप में उतर आई है।
✨धन्यवाद🙏
सावन की इस मनोहारी अनुभूति के साथ शिवभक्ति का भाव भी मन को सहज ही अपनी ओर खींचता है। सावन और वर्षा ऋतु पर लिखी मेरी एक और रचना यहाँ पढ़ी जा सकती है—
●रिमझिम रिमझिम बरखा आई | सावन और वर्षा ऋतु पर चौपाई छंद

अरे वाह्ह दी बरसा ऋतु का मनमोहक चित्र खींचती बहुत सुंदर कुंडलिनी।
जवाब देंहटाएंप्रणाम दी
सादर।
जी नमस्ते ,
जवाब देंहटाएंआपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (०६-०८-२०२३) को 'क्यूँ परेशां है ये नज़र '(चर्चा अंक-४६७५ ) पर भी होगी।
आप भी सादर आमंत्रित है।
सादर
बहुत सुंदर, सावन मे शिवभक्ति में लीन काँवर यात्रा का अनुभव अनमोल है🙏
जवाब देंहटाएंभोले की भक्ति में सरोबर सुंदर …
जवाब देंहटाएंसावन की मनमोहक छटा बिखेरती सुंदर रचना
जवाब देंहटाएंमृदुल काव्य कृति
जवाब देंहटाएंजय भोले शंकर !
जवाब देंहटाएंसुधा जी, आपकी वन्दना सुन कर भोले बाबा अति प्रसन्न होंगे.
हमारे घर के पास विशाल गौरी शंकर मन्दिर है.
सावन के हर सोमवार को तो वहां भक्तों का मेला सा लग जाता है.
वाह! सुधा जी ,भक्ति भाव से भीगी हुई सुन्दर प्रस्तुति
जवाब देंहटाएंवाह बहुत मनमोहक सृजन
जवाब देंहटाएंसावन मास पर बहुत सुंदर मनहर कुंडलियां।
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