भीषण गर्मी पर दोहा मुक्तक
परिचय आज बढ़ती गर्मी केवल एक मौसमी समस्या नहीं रह गई है, बल्कि यह प्रकृति की ओर से दिया गया गंभीर संकेत है। तपती धरती, झुलसते उपवन, व्याकुल जनजीवन और घटते वन हमें सोचने पर विवश करते हैं कि कहीं हम स्वयं ही इस संकट के लिए उत्तरदायी तो नहीं हैं। प्रस्तुत हैं इसी विषय पर चार मुक्तक— व्याकुल सकल जहान है, नभ से बरसे आग। लगता अब रवि को नहीं, धरती से अनुराग । लू की लपटों से हुआ , जन जीवन बेहाल, खग मृग सब बेचैन हैं, झुलसे उपवन बाग । आतप से तपती धरा, तपे कृषक - मजदूर । तानाशाही रवि करे, लू की लपटें क्रूर । गर्म धूल आँखों भरी, पर रुकते नहीं पाँव, दया करो श्रमजीव पर , तज दो भानु गुरूर । क्रोध सूर्य का देखकर, काँप रही है छाँव, गर्म नदी में तैरती, औंधे मुँह की नाव । गुमसुम से बाजार हैं, गली-गली सुनसान, राग-द्वेष की आग में , जलते देखो गाँव । उमस बढ़ गई और भी , बूँद गिरी दो चार , बिजली भी गुल हो गई, जनजीवन लाच...

वाह अति सुकोमल ऋतु के स्वागत में लिखी आपकी सुंदर रचना ने एक मोहक चित्र खींच दिया प्रिय सुधा जी।
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शरद के
स्वागत में वादियों के
दामन
सजने लगे,
बहकी हवाओं ने
हर शय में
नया राग
जगाया है।
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सस्नेह
आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" पर गुरुवार 30 सितंबर 2021 को लिंक की जाएगी ....
जवाब देंहटाएंhttp://halchalwith5links.blogspot.in पर आप सादर आमंत्रित हैं, ज़रूर आइएगा... धन्यवाद!
!
हार्दिक धन्यवाद एवं आभार आ.रविन्द्र जी मेरी रचना को पाँच लिंको के आनन्द मंच पर स्थान देने हेतु।
हटाएंबहुत बहुत सुन्दर
जवाब देंहटाएंबहुत सुन्दर,बदलते मौसम का चित्रण करती लाज़बाब रचना सुधा जी।
जवाब देंहटाएंतहेदिल से धन्यवाद एवं आभार, उर्मिला जी!
हटाएंबहुत सुंदर सृजन, बेहतरीन अभिव्यक्ति
जवाब देंहटाएंतहेदिल से धन्यवाद एवं आभार, भारती जी !
हटाएंवर्षा ऋतु को विदाई तथा आती हुई शरद ऋतु को शुभकामना संदेश देती सुंदर मनोहारी कविता, बहुत शुभकामनाएँ सुधा जी।
जवाब देंहटाएंतहेदिल से धन्यवाद एवं आभार जिज्ञासा जी!
हटाएंचार दिन चौमास में , बादल घुमड़ के चल दिये
जवाब देंहटाएंदमक उठा अम्बर बदन, समझो शरद आने को है।
बहुत लाजबाब रचना, सुधा दी।
अत्यंत आभार एवं धन्यवाद ज्योति जी!
हटाएंबहुत बहुत सुंदर सुधाजी,आती शरद की आहट इतनी मनभावन होती है कि लेखनी स्वयं मधुरस छलकाती हैं,और भाव सृजन यूँ मुखरित होते हैं ।
जवाब देंहटाएंमनभावन मनमोहक।
अप्रतिम।
तहेदिल से धन्यवाद एवं आभारआ.कुसुम जी !
हटाएंअत्यंत आभार एवं धन्यवाद ज्योति जी!
जवाब देंहटाएंवाह। ऋतु की विदाई का सुंदर शब्दांकन।
जवाब देंहटाएंहार्दिक धन्यवाद अंकुर जी!
हटाएंब्लॉग पर आपका स्वागत है।
सुंदर, सार्थक रचना !........
जवाब देंहटाएंब्लॉग पर आपका स्वागत है।
हार्दिक धन्यवाद एवं आभार सन्जू जी!
हटाएंआपका भी बहुत बहुत स्वागत है ब्लॉग पर।
बदलते मौसम का चित्रण करती रचना
जवाब देंहटाएंहार्दिक धन्यवाद एवं आभार संजय जी!
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