शनिवार, 9 अक्तूबर 2021

व्रती रह पूजन करते





Godprayer
चित्र : साभार pixabay से......



{1}

 बदली में छुपते फिरे, सावन मास मयंक।

दर्शन को मचले धरा, गगन समेटे अंक ।

गगन समेटे अंक , बहुत  ही लाड-लड़ाये।

भादो बरसे मेघ, कौन अब तुम्हें छुपाये।

कहे धरा मुस्काय, शरद में मत छुप जाना।

व्रती निहारे चाँद, प्रेमरस तुम बरसाना ।।


                         {2}

नवराते में गूँजते, माँ के भजन संगीत ।

जयकारे करते सभी,  माँ से जिनको प्रीत।

माँ से जिनको प्रीत, व्रती रह पूजन करते।

पा माँ का आशीष, कष्ट जीवन के हरते।

कहे सुधा करजोरि, करो माँ के जगराते।

हो जीवन भयमुक्त, सफल जिनके नवराते।


व्रती -- उपवासी

22 टिप्‍पणियां:

Jigyasa Singh ने कहा…

वाह ! नवरात्रि व्रत को सार्थक करती सुंदर भावभरी कुंडलियाँ, नवरात्रि के पवन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई सुधा जी 💐💐

Sudha Devrani ने कहा…

तहेदिल से धन्यवाद जिज्ञासा जी!
आपको भी नवरात्रि पर्व की बहुत बहुत शुभकामनाएं।

Jyoti Dehliwal ने कहा…

नवरात्रि की बहुत ही सुंदर प्रस्तुति, सुधा दी।

कैलाश मण्डलोई ने कहा…

उत्तमभाव

yashoda Agrawal ने कहा…

आपकी लिखी रचना  ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" सोमवार 11 अक्टूबर 2021 को साझा की गयी है....
पाँच लिंकों का आनन्द पर
आप भी आइएगा....धन्यवाद!

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

जय हो, सबको शुभकामनायें।

आलोक सिन्हा ने कहा…

बहुत बहुत सुन्दर रचना

Sudha Devrani ने कहा…

हार्दिक धन्यवाद ज्योति जी!
नवरात्रि की अनंत शुभकामनाएं आपको।

Sudha Devrani ने कहा…

तहेदिल से धन्यवाद आदरणीय कैलाश जी!
ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

Sudha Devrani ने कहा…

तहेदिल से धन्यवाद आ.यशोदा जी मेरी रचना को मंच प्रदान करने हेतु।
सादर आभार।

Sudha Devrani ने कहा…

आपको भी नवरात्रि पर्व की अनंत शुभकामनाएं आ. प्रवीण जी!
सादर आभार।

Sudha Devrani ने कहा…

तहेदिल से धन्यवाद आ.आलोक जी !
नवरात्रि पर्व की अनंत शुभकामनाएं आपको।

Manisha Goswami ने कहा…

बदली में छुपते फिरे, सावन मास मयंक।
दर्शन को मचले धरा, गगन समेटे अंक ।
गगन समेटे अंक , बहुत ही लाड-लड़ाये।
भादो बरसे मेघ, कौन अब तुम्हें छुपाये।
कहे धरा मुस्काय, शरद में मत छुप जाना।
व्रती निहारे चाँद, प्रेमरस तुम बरसा

बहुत ही सुंदर प्रस्तुति ✨✨😍

Pammi singh'tripti' ने कहा…

नवरात्रि पर बहुत ही सुंदर शब्द भाव।

Kamini Sinha ने कहा…

सादर नमस्कार ,

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (12-10-21) को "पाप कहाँ तक गंगा धोये"(चर्चा अंक 4215) पर भी होगी।
आप भी सादर आमंत्रित है,आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ायेगी।
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कामिनी सिन्हा

Sudha Devrani ने कहा…

तहेदिल से धन्यवाद एवं आभार प्रिय मनीषा जी!

Sudha Devrani ने कहा…

हृदयतल से धन्यवाद एवं आभार आ.पम्मी जी!

Sudha Devrani ने कहा…

हार्दिक धन्यवाद एवं आभार कामिनी जी!मेरी रचना को चर्चा मंच में साझा करने हेतु।

anita _sudhir ने कहा…

अति उत्तम सृजन आ0

Marmagya - know the inner self ने कहा…

नवराते में गूँजते, माँ के भजन संगीत ।
जयकारे करते सभी, माँ से जिनको प्रीत।
नवरात्रि का संदेश देती सुंदर पंक्तियां!--ब्रजेंद्रनाथ

Sudha Devrani ने कहा…

हार्दिक धन्यवाद एवं आभार अनीता जी!

Sudha Devrani ने कहा…

हार्दिक धन्यवाद एवं आभार आदरणीय!
ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

कबूतर की दादागिरी

                    चित्र साभार pixabay से एक कबूतर जमा रहा है,  बिखरे दानों पर अधिकार । शेष कबूतर दूर हो रहे, उसकी दादागिरी से हार । गोल घू...