शनिवार, 5 मई 2018

सुख का कोई इंतजार....


                       चित्र :साभार गूगल से"

मेरे घर के ठीक सामने
बन रहा है एक नया घर
वहीं आती वह मजदूरन
हर रोज काम पर.....
देख उसे मन प्रश्न करता
मुझ से बार-बार......
होगा इसे भी जीवन में कहीं
सुख का कोई इंतजार...?

गोद में नन्हा बच्चा
फिर से है वह जच्चा
सिर पर ईंटों का भार
न सुख न सुविधा ऐसे में
दिखती बड़ी लाचार....
होगा इसे भी जीवन में कहीं
खुशियों का इन्तजार...?


बोझ तन से ढो रही वह
मन से बच्चे का ध्यान
पल-पल में होता उसको
उसकी भूख-प्यास का भान...
छाँव बिठाकर सिर सहलाकर
देती माँ का प्यार...
होगा इसे भी जीवन में कहीं
खुशियों का इन्तजार....?

जब सब सुस्ताते,थकान मिटाते
वह बच्चे पर प्यार लुटाती
बड़ी मुश्किल से बैठ जतन से
गोदी मेंं अपना बच्चा सुलाती
ना कोई शिकवा इसे अपने रब से
ना ही कोई गिला इस किस्मत से
जो है उसी में जीती जाती...
अचरज होता देख के उसको
मुझको तो बार-बार......
होगा इसे भी जीवन में कहीं
सुख का कोई इंतजार...?

लगता है खुद की न परवाह उसको
वो माँ है सुख की नहीं चाह उसको
संतान सुख ही चरम सुख है उसका
उसे पालना ही अब कर्तव्य उसका
न मानेगी किस्मत से हार.....
होगा इसे भी जीवन में कहीं
सुख का कोई इंतजार.......।






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