बच्चों को समझाने का सही तरीका – सासू माँ की सीख देने वाली कहानी
क्या आपका बच्चा भी जिद करता है? जानिए एक छोटी सी कहानी से बड़ा parenting मंत्र… बच्चों को डांटने के बजाय प्यार और धैर्य से समझाना क्यों जरूरी है? पढ़िए सासू माँ की सीख देती यह प्रेरणादायक हिंदी कहानी। आरव की जिद और निधि की परेशानी माँजी, आरव बहुत जिद्दी है...। मैंने उसे कितना समझाया, पर वो माना ही नहीं… और आपने तो पल भर में मना लिया। कैसे माँजी? आप कैसे मना लेती हैं उसे? उसे क्या, आप तो सभी बच्चों को मना लेती हैं… आश्चर्य भरी मुस्कान के साथ निधि अपनी सासू माँ से पूछ ही रही थी कि तभी प्रीति (देवरानी) ने किचन से आवाज लगाई— किचन में छोटी सी सीख “दीदी, ज़रा ये दूध पतीली में डाल दीजिए न… मुझसे गिर जाता है। पैकेट से डालते वक्त दूध उछल कर बाहर गिर जाता है।” सिखाने का तरीका निधि किचन में गई और दूध पतीली में डालते हुए बोली— “अरे ! ऐसे कैसे गिर जाता है तुमसे दूध? देखो, धीरे-धीरे डालो… पतली धार में। अगर एकदम से ज्यादा दूध डालोगी, वो भी खाली पतीले में, तो उछलेगा ही न।” सासू माँ दूर से सब सुनकर मुस्कुरा रही थीं। थोड़ी देर बाद निधि चाय लेकर आई और सासू माँ को देते हुए फिर बोली— “अब ...

सुंदर सकारात्मक सृजन
जवाब देंहटाएंआपकी लिखी रचना मंगलवार 16 मई 2022 को
जवाब देंहटाएंपांच लिंकों का आनंद पर... साझा की गई है
आप भी सादर आमंत्रित हैं।
सादर
धन्यवाद।
अत्यंत आभार एवं धन्यवाद आ.संगीता जी !
हटाएंमेरी रचना को मंच प्रदान करने हेतु ।
दिनांक ---- 17 मई
जवाब देंहटाएंजी, 🙏🙏🙏🙏
हटाएंबहुत ही सुंदर सराहनीय सृजन। नष्ट होते जंगल, पेड़ों का दोहन, मूक बैठा मानव... गहन चिंतन लिए बढ़िया रचना।
जवाब देंहटाएंसादर
बहुत सुन्दर सकारात्मक संदेश देती रचना !
जवाब देंहटाएंपर्यावरण संरक्षण के प्रति मनुष्यों की उदासीनता चिंतनीय है।आवश्यकता है आज प्रकृति के प्रति स्वंय के कर्तव्यों का बोध करने की अन्य लोगों को.भी प्रेरित करने की।
जवाब देंहटाएंसार्थक सृजन.सुधा जी।
सस्नेह।
इतनी विभिषिका झेलने के बाद भी हम असुरी नींद से नहीं जागे तो क्या कहा जाए। न जाने हम कब सुधरेंगे। प्रभावी सृजन।
जवाब देंहटाएंसुधा जी,
जवाब देंहटाएंहम जो प्रतिक्रिया लिखे क्यों नहीं दीख रहा प्लीज आप स्पेम में चेक करिये न क्योंकि मेरे ब्लॉग पर.भी बहुत सारी प्रतिक्रिया स्पेम में जा रही जिसे not spam करके हम पब्लिश किए।
शायद कुछ प्रतिक्रिया स्पेम में हों।
जी, श्वेता जी ! स्पेम में थी आपकी प्रतिक्रिया ..अन्य पोस्ट पर भी यही था । बहुत बहुत धन्यवाद बताने के लिए अब सभी को पब्लिश कर दिया...
हटाएंदिल से आभार आपका।
इन निरीह पेड़ों की व्यथा कौन जान सका है सिवाय कवि मन के।भावपूर्ण अभिव्यक्ति प्रिय सुधा जी।
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