सैनिक, संत, किसान (दोहा मुक्तक)

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सैनिक रक्षा करते देश की, सैनिक वीर जवान । लड़ते लड़ते देश हित, करते निज बलिदान । ओढ़ तिरंगा ले विदा,  जाते अमर शहीद, नमन शहीदों को करे, सारा हिंदुस्तान ।। संत संत समागम कीजिए, मिटे तमस अज्ञान । राह सुगम होंगी सभी, मिले सत्य का ज्ञान । अमल करे उपदेश जो, होगा जीवन धन्य, मिले परम आनंद तब, खिले मनस उद्यान । किसान खून पसीना एक कर , खेती करे किसान । अन्न प्रदाता है वही, देना उसको मान । सहता मौसम मार वह, झेले कष्ट तमाम, उसके श्रम से पल रहा सारा हिंदुस्तान ।         सैनिक, संत, किसान 1) सीमा पर सैनिक खड़े, खेती करे किसान ।    संत शिरोमणि से सदा,  मिलता सबको ज्ञान।    गर्वित इन पर देश है , परहित जिनका ध्येय,    वंदनीय हैं सर्वदा, सैनिक संत किसान ।। 2) सैनिक संत किसान से,  गर्वित हिंदुस्तान ।     फर्ज निभाते है सदा,  लिये हाथ में जान ।     रक्षण पोषण धर्म की,  सेवा पर तैनात,      करते उन्नति देश की,  सदा बढ़ाते मान ।। हार्दिक अभिनंदन आपका 🙏 पढ़िए एक और रचना निम्न लिंक पर ●  मुक्...

कर्तव्य परायणता



diya (candle)

उषा की लालिमा पूरब में
नजर आई.......
जब  दिवाकर रथ पर सवार,
गगन पथ पर बढने लगे.....
निशा की विदाई का समय
निकट था......
चाँद भी तारों की बारात संग
जाने लगे ..........

एक दीपक अंधकार से लडता,
एकाकी खडा धरा पर.....
टिमटिमाती लौ लिए फैला रहा 
प्रकाश तब......
अनवरत करता रहा कोशिश वह
अन्धकार मिटाने की......
भास्कर की अनुपस्थिति में उनके दिये
उत्तदायित्व निभाने की....
उदित हुए दिनकर, दीपक ने मस्तक
अपना झुका लिया......
दण्डवत किया प्रणाम ! पुनः कर्तव्य
अपना निभा लिया......
हुए प्रसन्न भास्कर ! देख दीपक की
कर्तव्य परायणता को......
बोले "पुरस्कृत हो तुम कहो क्या
पुरस्कार दें तुमको".......?
सहज भाव बोला दीपक, देव !
"विश्वास भर रखना"........
कर्तव्य सदा निभाऊंगा, मुझ पर
आश बस रखना.......
उत्तरदायित्व मिला आपसे,कर्तव्य मैं
निभा पाया.......
"कर्तव्य" ही सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार है ,
 जो मैने आपसे पाया......

टिप्पणियाँ

  1. उत्तर
    1. तहेदिल से धन्यवाद एवं आभार।
      ब्लॉग पर आपका स्वागत है काश आपका परिचय प्राप्त होता।

      हटाएं
  2. कर्तव्य का बोध कराती सुन्दर रचना

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. हृदयतल से धन्यवाद एवं आभार आ.संगीता जी!

      हटाएं
  3. सहज भाव बोला दीपक, देव !
    "विश्वास भर रखना"........
    कर्तव्य सदा निभाऊंगा, मुझ पर
    आश बस रखना.......
    हाँ सहज भाव से स्वीकार कर्त्तव्य ही सर्वोच्च पुरुस्कार है।

    जवाब देंहटाएं
  4. वाह!सुंदर सृजन सुधा जी ।

    जवाब देंहटाएं
  5. लाजवाब सुधा जी, सच कहूं तो शब्द नहीं है मेरे पास इस अद्वितीय भावों पर क्या लिखूं बस मन गद गंद हो गया सार्थक भाव सृजन ।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. तहेदिल से धन्यवाद कुसुम जी स्नेहिल प्रतिक्रिया से उत्साहवर्धन हेतु...।
      सादर आभार।

      हटाएं

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