Wednesday, May 10, 2017

वीरांगना बन जाओ बिटिया....

नाजुकता अब छोडो बिटिया,
वीरांगना बन जाओ ना........
सीखो जूडो और करांटे,
बल अपना फिर बढाओ ना ।

भैया दण्ड-पेल हैं करते,
तुम भी वही अपनाओ ना ।
गुडिया से खेलना छोड़ो
मर्दानी बन जाओ ना........

मात-पिता की चिन्ता हो तुम,
रूप नया अपनाओ ना......
खेलो दंगल बवीता सा तुम,
देश का मान बढाओ ना ।

छोड़ो कोमलता भी अपनी ,
समय को मात दे जाओ ना ।
रणचण्डी,दुर्गा तुम बनकर,
दुष्टों को धूल चटाओ ना........

निर्भया ज्योति थी माँ-पापा की ,
तम उनका भी मिटाओ ना........
ऐसे दरिन्दो का काल बनो तुम ,
इतिहास नया ही रचाओ ना ।

अब कोई भी कली धरा पर ,
ऐसे रौंदी जाये ना ।
बीज पनपने से पहले ये ,
भ्रूण में कुचली जाये ना.........

दहेज के भिखमंगों को भी,
बीच सडक पर लाओ ना........
बहू जलाने वालों के घर-
आँगन आग लगाओ ना ।

बेटी वीरांगना बने जो ,
प्रबल बनेगा देश अपना ।
उत्कृष्ट समाज के नव-निर्माण से,
पूरा होगा हर सपना.....


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