बने पकौड़े गरम-गरम | बारिश में पकौड़े पर भावपूर्ण हिंदी कविता

परिचय

बारिश की रिमझिम फुहारें, भीगी मिट्टी की सौंधी खुशबू और गरमागरम पकौड़ों के साथ अदरक वाली चाय—बरसात का मौसम अपने साथ ऐसी ही मनभावन यादें लेकर आता है। ‘बने पकौड़े गरम-गरम’ बरसात पर लिखा एक भावपूर्ण और मनोरंजक हिंदी गीत है, जिसमें बारिश के सुहाने मौसम और परिवार के साथ पकौड़े-चाय का आनंद सहज शब्दों में चित्रित किया गया है।

ख्यातिलब्ध पत्रिका 'अनुभूति' के 'गरम पकौड़े' विशेषाँक में मेरे गीत 'बने पकौड़े गरम-गरम' को सम्मिलित करने हेतु 'आदरणीया पूर्णिमा वर्मन जी' का हार्दिक आभार ।

बने पकोड़े गरम गररम | हिंदी गीत


घुमड़-घुमड़ कर घिरी घटाएं

बिजली चमकी चम चम चम  

झम झम झम झम बरसी बूँदें

बने पकौड़े गरम-गरम


सनन सनन कर चली हवाएं,

 सर सर सर सर डोले पात 

भीगी माटी सौंधी महकी

पुलकित हुआ अवनि का गात 


राहत मिली निदाघ से अब तो

हुआ सुहाना ये मौसम 

झम झम झम झम बरसी बूँदें

बने पकौड़े गरम-गरम


अदरक वाली कड़क चाय की, 

फरमाइश करते दादा ।

दादी बोली मेरी चाय में

मीठा हो थोड़ा ज्यादा !


बच्चों को मीठे-मीठे 

गुलगुले चाहिए नरम नरम

झम झम झम झम बरसी बूँदें,

 बने पकौड़े गरम-गरम


खट्टी मीठी और चटपटी

चटनी डाली थाली में 

बच्चों को शरबत बाँटा

और चाय बँटी फिर प्याली में 


बारिश की बौछारों के संग

 ओले बरसे ठम ठम ठम

झम झम झम झम बरसी बूँदें

 बने पकौड़े गरम-गरम ।।


निष्कर्ष

बारिश की फुहारों के साथ गरमागरम पकौड़े, अदरक वाली चाय और अपनों का साथ बरसात के साधारण पलों को भी यादगार बना देता है। ‘बने पकौड़े गरम-गरम’ गीत में बरसात के इसी घरेलू, आत्मीय और आनंदमय रूप को शब्दों में पिरोने का प्रयास किया गया है। आशा है, यह गीत आपको भी बारिश के सुहाने मौसम और पकौड़ों की गरमाहट का एहसास कराएगी।



✨धन्यवाद🙏

बारिश पर एक और कविता

अगर आपको बरसात की फुहारें, भीगी मिट्टी की सौंधी खुशबू और वर्षा ऋतु का प्राकृतिक सौंदर्य पसंद है, तो मेरी एक और कविता बरसी अब ऋतुओं की रानी भी पढ़िएगा ।



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