रविवार, 13 फ़रवरी 2022

आओ ! खुद से प्यार करें



Love myself
चित्र साभार pixabay.com से



चलो स्वयं से इश्क लड़ाएं 
कुछ मुस्काएं कुछ शरमाए !
एक गुलाब स्वयं को देकर
वेलेंटाइन अपना मनाएं !

आओ खुद से प्यार करें!
लव-शब कह इजहार करें!
बने-ठने कुछ अपने लिए,
दर्पण में आभार करें !!

इक छोटी सी डेट पे जाएं ,
कॉफी संग कोई मेज सजाएं ।
कुछ कह लें कुछ सुन लें यारा!
खुद से खुद की चैट कराएं !!

खुदगर्जी नहीं खुद से प्यार
यह तो तन मन का अधिकार
तन-मन  से ही है ये जीवन
कर लें जीवन का सत्कार !!

अरमानों के बीच खड़े,
दौलत के मायाजाल बड़े।
कभी तो निकलें इन सब से,
खुद से खुद के लिए लड़ें !

अपनों की परवाह हमें
अपनी भी कुछ आज करें
छोटी-छोटी फतह सराहें
अपने पर कुछ नाज करें

मरूथल से बीहड़ जीवन का 
मन -आँगन गुल्जार करें !
वेलेंटाइन के अवसर पर
आओ ! खुद से प्यार करें।।

         







36 टिप्‍पणियां:

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

वाह , खुद ही खुद के वैलेंटाइन बनें ।
स्वयं के महत्त्व को जब तक खुद नहीं समझेंगे टैब तक दूसरा हमें क्या समझेगा ।
बेहतरीन सृजन

Jyoti Dehliwal ने कहा…

मरूथल से बीहड़ जीवन का
मन -आँगन गुल्जार करें !
वेलेंटाइन के अवसर पर
आओ ! खुद से प्यार करें।।
बहुत ही सुंदर सृजन, सुधा दी।

Sudha Devrani ने कहा…

जी, आ. संगीता जी तहेदिल से धन्यवाद एवं आभार आपका ।

Sudha Devrani ने कहा…

हार्दिक धन्यवाद एवं आभार ज्योति जी!

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

आपकी लिखी कोई रचना सोमवार. 14 फरवरी 2022 को
पांच लिंकों का आनंद पर... साझा की गई है
आप भी सादर आमंत्रित हैं।
सादर
धन्यवाद।

संगीता स्वरूप

Sudha Devrani ने कहा…

अत्यंत आभार एवं धन्यवाद आ.संगीता जी!

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

सुन्दर

Ravindra Singh Yadav ने कहा…

नमस्ते,
आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा सोमवार (14-02-2022 ) को 'ओढ़ लबादा हंस का, घूम रहे हैं बाज' (चर्चा अंक 4341) पर भी होगी। आप भी सादर आमंत्रित है। 12:30 AM के बाद प्रस्तुति ब्लॉग 'चर्चामंच' पर उपलब्ध होगी।

चर्चामंच पर आपकी रचना का लिंक विस्तारिक पाठक वर्ग तक पहुँचाने के उद्देश्य से सम्मिलित किया गया है ताकि साहित्य रसिक पाठकों को अनेक विकल्प मिल सकें तथा साहित्य-सृजन के विभिन्न आयामों से वे सूचित हो सकें।

यदि हमारे द्वारा किए गए इस प्रयास से आपको कोई आपत्ति है तो कृपया संबंधित प्रस्तुति के अंक में अपनी टिप्पणी के ज़रिये या हमारे ब्लॉग पर प्रदर्शित संपर्क फ़ॉर्म के माध्यम से हमें सूचित कीजिएगा ताकि आपकी रचना का लिंक प्रस्तुति से विलोपित किया जा सके।

हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।

#रवीन्द्र_सिंह_यादव

अनीता सैनी ने कहा…

वाह!वाह!सुधा दी जी।
गज़ब 👌

Sudha Devrani ने कहा…

अत्यंत आभार एवं धन्यवाद आ.रविन्द्र जी मेरी रचना चर्चा मंच पर साझा करने हेतु।

Sudha Devrani ने कहा…

हार्दिक धन्यवाद एवं आभार आ.जोशी जी!

ज्योति-कलश ने कहा…



चलो स्वयं से इश्क लड़ाएं
कुछ मुस्काएं कुछ शरमाए !
एक गुलाब स्वयं को देकर
वेलेंटाइन अपना मनाएं ......बहुत सुन्दर, मोहक सृजन!

anita _sudhir ने कहा…

बहुत खूब

Sweta sinha ने कहा…

वाह्ह सुधा जी क्या खूब लिखा।
सार्थक सृजन।
अक्षरशः सकारात्मकता से लबालब मन में स्फूर्ति जगाती रचना।
बधाई बहुत अच्छी लगी कविता ।
सस्नेह।

Sudha Devrani ने कहा…

सहृदय धन्यवाद एवं आभार प्रिय अनीता जी!

Sudha Devrani ने कहा…

हृदयतल से धन्यवाद एवं आभार ज्योत्सना जी!

Sudha Devrani ने कहा…

हार्दिक धन्यवाद एवं आभार आ.अनीता जी!

Sudha Devrani ने कहा…

तहेदिल से धन्यवाद एवं आभार श्वेता जी!

Meena sharma ने कहा…

वास्तविकता यही है सुधाजी। जो स्वयं से प्रेम नहीं करता, खुद को महत्व नहीं देता, धीरे धीरे लोग भी उसे प्यार करना बंद कर देते हैं। वह दूसरों के प्रेम का नहीं, दया का पात्र बनकर रह जाता है । एकदम सटीक कविता रची आपने....
खुदगर्जी नहीं खुद से प्यार
यह तो तन मन का अधिकार
तन-मन से ही है ये जीवन
कर लें जीवन का सत्कार !!

Amrita Tanmay ने कहा…

विशुद्ध स्वप्रेम। अति सुन्दर कहा।

Sudha Devrani ने कहा…

जी, मीना जी यही देखा है जीवन में...
मेरे विचारों से सहमत होने एवं सराहनीय प्रतिक्रिया से उत्साहवर्धन करने हेतु तहेदिल से धन्यवाद एवं आभार आपका।

Sudha Devrani ने कहा…

तहेदिल से धन्यवाद एवं आभार अमृता जी!

Meena Bhardwaj ने कहा…

चलो स्वयं से इश्क लड़ाएं
कुछ मुस्काएं कुछ शरमाए !
एक गुलाब स्वयं को देकर
वेलेंटाइन अपना मनाएं .....
वाह !! लाजवाब सृजन !

Sudha Devrani ने कहा…

सहृदय धन्यवाद एवं आभार मीना जी!

आलोक सिन्हा ने कहा…

बहुत बहुत सुन्दर मधुर रचना

Jigyasa Singh ने कहा…

खुद से प्रेम । इससे अच्छा इश्क ए वेलेंटाइन कुछ हो ही नहीं सकता । स्वयं से प्रेम ही किसी से प्रेम का पात्र बना सकता है । बिल्कुल सटीक अभिव्यक्ति ।

दिगम्बर नासवा ने कहा…

खुद से प्रेम सभी के प्रेम में सरोबर होना है ... जीवन में उमंग रहती है तो सभी कुछ अच्छा लगता है, प्रेम का माहोल रहता अहि ... पर खुद के साथ साथ सबसे प्रेम करना भी जरूरी है ... वेलेंटाइन तो यही कहता है प्रेम करो ...

INDIAN the friend of nation ने कहा…

achhi kavita

MANOJ KAYAL ने कहा…

उम्दा कृति

Madhulika Patel ने कहा…


चलो स्वयं से इश्क लड़ाएं
कुछ मुस्काएं कुछ शरमाए !
एक गुलाब स्वयं को देकर
वेलेंटाइन अपना मनाएं !,,,, बहुत सुंदर रचना,अपने आप से अपनी मुलाक़ात बहुत ज़रूरी है

Sudha Devrani ने कहा…

अत्यंत आभार एवं धन्यवाद मनोज जी!

Sudha Devrani ने कहा…

जी, दिल से आभार एवं धन्यवाद आपका।

Jyoti khare ने कहा…

आओ खुद से प्यार करें
बहुत सुंदर

Sudha Devrani ने कहा…

हार्दिक धन्यवाद एवं आभार आ. सर!

book rivers ने कहा…

Jude hmare sath apni kavita ko online profile bnake logo ke beech share kre
Pub Dials aur agr aap book publish krana chahte hai aaj hi hmare publishing consultant se baat krein Online Book Publishers



Bharti Das ने कहा…

सचमुच,बहुत सुंदर अभिव्यक्ति

गई शरद आया हेमंत

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