बुधवार, 31 मार्च 2021

बदलती सोच




पहले से ही खचाखच भरी बस जब स्टॉप पर रुकी तो बहुत से लोगों के साथ एक शराबी भी बस में चढ़ा जो खड़े रह पाने की हालत में नहीं था...।
सभी सीट पहले से ही फुल थी, उसे लड़खड़ाते देख बस में खड़ी महिलाएं इधर उधर खिसकने की कोशिश करने लगी।

तभी एक उन्नीस - बीस साल की लड़की अपनी सीट से उठी और शराबी को सीट पर बैठने का आग्रह किया। शराबी बड़े रौब से लड़खडा़ती आवाज में बोला, "इट्स ओके…आइ विल मैनेज"...।

लड़की ने बस कंडक्टर से इशारा कर शराबी को अपनी सीट पर बिठा दिया।
बस में खड़ी सभी महिलाओं के चेहरे पर सहजता के भाव साफ नजर आ रहे थे .....

अब वह लड़की भी उन्ही के साथ खड़ी थी।
तभी एक बुजुर्ग महिला बस के झटके से गिरने को हुई तो लड़की ने उन्हें सम्भाला और पास में बैठे लड़के से बोली "भाई क्या आप अपनी सीट इन ऑण्टी को दे सकते हैं"...?
लड़का तपाक से बोला "मैं आपकी तरह बेवकूफ नहीं हूँ, कि अपनी सीट दूसरों को देकर धक्के खाता फिरूँ...। आपने उस शराबी को सीट क्यों दी ? देनी ही थी तो इन ऑण्टी जैसे लोंगो को देती जो खड़े रहने में अक्षम हैं..... और वैसे भी तुम्हारी सीट तो महिला आरक्षित सीट थी न"....?
 
लड़की बड़े शान्त स्वर मे बोली ,"ठीक है भाई! मैंने तो आपसे सिर्फ पूछा है...देना, न देना, ये आपकी इच्छा है....और रही बात मेरी सीट की , तो वह आदमी नशे में होश खोया है और इतनी सारी महिलाओं के साथ खड़े होकर वह होश में आना भी नहीं चाहता....।
ऐसे ही लोगों की वजह से न जाने कितनी महिलाओं को छेड़छाड़ जैसी बेहूदा हरकतों से गुजरना पड़ता है, इसीलिए मैंने उसे अपनी आरक्षित सीट दे दी। क्योंकि ऐसे लोग हम महिलाओं के आस-पास न हों तो हमें आरक्षण की कोई खास आवश्यकता भी नहीं"।

लड़की की बात सुनकर अन्य कई युवा उठकर बस में खड़े बुजुर्गों और असमर्थों को अपनी सीट पर बिठाकर स्वयं खड़े होकर सफर करने लगे।


चित्र साभार गूगल से.....

38 टिप्‍पणियां:

आलोक सिन्हा ने कहा…

बहुत बहुत सराहनीय सुन्दर संदेश वाहक रचना |

Digvijay Agrawal ने कहा…

सटीक सोच के साथ
सटीक शिक्षा भी..
आभार जागरूकता संदेश के लिए
सादर..

Sudha Devrani ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक ने हटा दिया है.
Sudha Devrani ने कहा…

हार्दिक धन्यवाद आ. सर!
सादर आभार।

Sudha Devrani ने कहा…

तहेदिल से धन्यवाद आ.आलोक जी!
सादर आभार।

दिगम्बर नासवा ने कहा…

समझदारी दिखाना और उस पर अमल भी करना जरूरी है ...
कहानी के माध्यम से बहुत खुच कहा है आपने ...

Jigyasa Singh ने कहा…

आपकी कहानी आज के दौर में महिलाओं के हालात से रूबरू करा गई,काश कि लोगों को कुछ तो समझ आए,यथार्थ का बखूबी चित्रण किया है, आपने ।p

Meena Bhardwaj ने कहा…

सादर नमस्कार,
आपकी प्रविष्टि् की चर्चा शुक्रवार ( 02-04-2021) को
"जूही की कली, मिश्री की डली" (चर्चा अंक- 4024)
पर होगी। आप भी सादर आमंत्रित हैं।
धन्यवाद.


"मीना भारद्वाज"

Virendra Singh ने कहा…

लड़की समझदार निकली। सार्थक लघुकथा।

Sudha Devrani ने कहा…

जी, अत्यंत आभार एवं धन्यवाद आपका।

Sudha Devrani ने कहा…

तहेदिल से धन्यवाद एवं आभार जिज्ञासा जी!

Sudha Devrani ने कहा…

हार्दिक धन्यवाद मीना जी मेरी रचना को
चर्चा मंच में स्थान देने हेतु...।
सस्नेह आभार।

Sudha Devrani ने कहा…

तहेदिल से धन्यवाद वीरेन्द्र जी!

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

सार्थक लघु कथा ।

विकास नैनवाल 'अंजान' ने कहा…

सुन्दर संदेश देती लघुकथा....

Sudha Devrani ने कहा…

अत्यंत आभार एवं धन्यवाद, आ. संगीता जी!

Sudha Devrani ने कहा…

हार्दिक धन्यवाद एवं आभार नैनवाल जी!

Ritu asooja rishikesh ने कहा…

बेहतरीन संदेश सुधा जी ,ऐसे लोग हम महिलाओं के आस पास ना हो तो हमे आरक्षण की आवश्यकता ही नहीं ।
वाह बेहतरीन

अनीता सैनी ने कहा…

बहुत सुंदर लघुकथा।
सादर

Jyoti Dehliwal ने कहा…

सुधा दी, सुंदर सन्देश देती लघुकथा।

Dr (Miss) Sharad Singh ने कहा…

बहुत सुंदर, सटीक रचना...🌹🙏🌹

Sudha Devrani ने कहा…

अत्यंत आभार एवं धन्यवाद रितु जी!

Sudha Devrani ने कहा…

हार्दिक धन्यवाद एवं आभार प्रिय अनीता जी!

Sudha Devrani ने कहा…

तहेदिल से धन्यवाद ज्योति जी!
सस्नेह आभार।

Sudha Devrani ने कहा…

हार्दिक धन्यवाद एवं आभार शरद जी!

Anuradha chauhan ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक ने हटा दिया है.
Anuradha chauhan ने कहा…

बहुत सुंदर और सार्थक लघुकथा।

Amrita Tanmay ने कहा…

सच में नयी सोच । सशक्त सृजन ।

मन की वीणा ने कहा…

बहुत सुंदर और प्रेरक लघु कथा सुधा जी।
आईना दिखाती सी।
सस्नेह।

Sudha Devrani ने कहा…

सस्नेह आभार एवं धन्यवाद सखी!

Sudha Devrani ने कहा…

हार्दिक धन्यवाद एवं आभार अमृता जी!

Sudha Devrani ने कहा…

अत्यंत आभार एवं धन्यवाद कुसुम जी!

रेणु ने कहा…

बहुत सुंदर कहानी प्रिय सुधा जी। बेटियाँ बहुत मेधावान और तत्काल निर्णय लेने में सक्षम हैं। अब वे दया या कृपा की पात्र नहीं होती। बसों और दैनिक जीवन में उनके हौंसले बुलंद है। प्रेरक कथानक के लिए हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई ❤🌹🌹🙏🌹

Sudha Devrani ने कहा…

तहेदिल से धन्यवाद प्रिय रेणुजी !
सस्नेह आभार।

Rashmi B ने कहा…

आपने अच्छा लिखा है , सुंदर रचना.

Sudha Devrani ने कहा…

हार्दिक धन्यवाद आपका रश्मि जी!
ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

ऋता शेखर 'मधु' ने कहा…

वाह! सन्देश देती सुन्दर लघुकथा।

ज्योति सिंह ने कहा…

बगैर कुछ जाने बोलना लोगों की आदत है,इस तरह के जवाब से ही इनकी बन्द अक्ल खुलती है, बहुत खूब लाजवाब, बेहतरीन पोस्ट सुधा जी, हार्दिक बधाई हो

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