अब भावों में नहीं बहना है....


leaf flowing with air indicating emotions


जाने कैसा अभिशाप है ये
मन मेरा समझ नहीं पाता है
मेरी झोली में आकर तो
सोना भी लोहा बन जाता है

जिनको मन से अपना माना
उन्हीं ने ऐसे दगा दिया
यकींं भी गया अपनेपन से
तन्हा सा जीवन बिता दिया

एक सियासत देश में चलती
एक घरों में चलती है
भाषण में दम जिसका होता
सरकार उसी की बनती है

सच ही कहा है यहाँ किसी ने
"जिसकी लाठी उसकी भैंस"
बड़बोले ही करते देखे
हमने इस दुनिया में ऐश

नदी में बहने वाले को
साहिल शायद मिल भी जाये
भावों में बहने वाले को
 अब तक "प्रभु" भी ना बचा पाये

गन्ने सा मीठा क्या बनना
कोल्हू में निचोड़े जाओगे
इस रंग बदलती दुनिया में
गिरगिट पहचान न पाओगे

दुनियादारी सीखनी होगी
गर दुनिया में रहना है
'जैसे को तैसा' सीख सखी!
अब भावों में नहीं बहना है
                   
                   चित्र;साभार गूगल से....

टिप्पणियाँ

अनीता सैनी ने कहा…
नदी में बहने वाले को
साहिल शायद मिल भी जाये
भावों में बहने वाले को
अब तक "प्रभु" भी ना बचा पाये....वाह लाज़बाब
सादर
Anuradha chauhan ने कहा…
दुनियादारी सीखनी होगी
गर दुनिया में रहना है
"जैसे को तैसा" सीख सखी !
अब भावों में नहीं बहना है
कटु सत्य कहा आपने 👌 बेहतरीन रचना सखी
बहुत सुंदर रचना। भावों में बहने वाले को
अब तक "प्रभु" भी ना बचा पाये। जीवन का यथार्थ बयां करती पंक्तियाँ।
Meena Bhardwaj ने कहा…
बेहद सुन्दर सृजन सुधा जी ! यथार्थ को अभिव्यक्त करता हर पदबन्द अत्यन्त सुन्दर ।
मन की वीणा ने कहा…
वाह वाह सुधा जी नीति पर सुंदर अभिव्यक्ति।
सार्थक अप्रतिम।
सोचने पर विवश करती रचना
बेहतरीन अभिव्यक्ति ।
जाने कैसा अभिशाप है ये
मन मेरा समझ नहीं पाता है....
पश्चाताप होता है कभी कभी ऐसी परिस्थिति पर। सोच को झकझोर गई आपकी यह रचना ।
Sudha Devrani ने कहा…
हार्दिक धन्यवाद अनीता जी !
सस्नेह आभार...
Sudha Devrani ने कहा…
बहुत बहुत धन्यवाद, अनुराधा जी !
सादर आभार...
Sudha Devrani ने कहा…
सस्नेह आभार, भाई !
Sudha Devrani ने कहा…
हार्दिक धन्यवाद, मीना जी !
सस्नेह आभार....
Sudha Devrani ने कहा…
हृदयतल से धन्यवाद एवं आभार,कुसुम जी
Sudha Devrani ने कहा…
बहुत बहुत धन्यवाद रश्मि प्रभा जी !
ब्लॉग पर आपका स्वागत है...
Sudha Devrani ने कहा…
हार्दिक धन्यवाद, पुरुषोत्तम जी !
सादर आभार....
व्यग्यात्म्क रचना ....यथार्थ
बेहतरीन सृजन आदरणीया
Sudha Devrani ने कहा…
हृदयतल से धन्यवाद एवं आभार, हिमकर श्याम जी !
Sudha Devrani ने कहा…
बहुत बहुत धन्यवाद रविन्द्र जी!

Jyoti Dehliwal ने कहा…
दुनियादारी सीखनी होगी
गर दुनिया में रहना है
"जैसे को तैसा" सीख सखी !
अब भावों में नहीं बहना है
बहुत सुंदर सुधा दी।
Kamini Sinha ने कहा…
बहुत खूब ....... सुंदर प्रस्तुति यथार्थ ,सादर स्नेह सुधा जी
NITU THAKUR ने कहा…
बहुत खूब 👌👌👌
Sudha Devrani ने कहा…
सस्नेह आभार, कामिनी जी !
Sudha Devrani ने कहा…
हार्दिक धन्यवाद, नीतू जी !
इस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.
Sudha Devrani ने कहा…
हार्दिक आभार डॉ.जेन्नी शबनम जी !
ब्लॉग पर आपका स्वागत है...
Nitish Tiwary ने कहा…
बहुत सुंदर प्रस्तुति।
Sudha Devrani ने कहा…
आपका हृदयतल से आभार नितीश जी !
सच लिखा है ... और ये बात जितना जल्दी इंसान समझ सके उतना ही अच्छा होता है ... कई भार इंसान भाव में बह जाता है और अंत में पछतावा ही हाथ आता है ... रिश्तों, समाज और देश काल ... सभी तक ये बात सच होती है ... शुरुआत खुद से न हो पर जैसे को तैसा देने में गुरेज़ भी नहीं होना चाहिए ...
मन के भावों को बाखूबी और स्पष्ट लिखा है आपने ...
Sudha Devrani ने कहा…
आपका हृदयतल से धन्यवाद एवं आभार नासवा जी ! सारगर्भित प्रतिक्रिया के लिए....
बहुत सुंदर और उत्तम भाव लिए हुए.... खूबसूरत रचना......
Atoot bandhan ने कहा…
दुनियादारी सीखनी होगी
गर दुनिया में रहना है
"जैसे को तैसा" सीख सखी !
अब भावों में नहीं बहना है..... बहुत सुंदर रचना सुधा जी
Kailash Sharma ने कहा…
आज का कटु सत्य...बहुत सुंदर और सारगर्भित प्रस्तुति..
Vocal Baba ने कहा…
यही सच्चाई है। बहुत सुंदर। बधाई और शुभकामनाएं। सादर।
Sudha Devrani ने कहा…
हृदयतल से आभार, संजय जी !
Sudha Devrani ने कहा…
हार्दिक धन्यवाद,आपका atoot bandhan...
Sudha Devrani ने कहा…
हार्दिक धन्यवाद, शर्मा जी !
सादर आभार...
Sudha Devrani ने कहा…
हृदयतल से आभार एवं धन्यवाद विरेन्द्र जी !
उत्तम रचना, बधाई.
बहुत सुंदर रचना....आप को होली की शुभकामनाएं...
Sudha Devrani ने कहा…
हार्दिक आभार, शबनम जी !
Sudha Devrani ने कहा…
हृदयतल से आभार आपका चतुर्वेदी जी !
ब्लॉग पर आपका स्वागत है.....।
M VERMA ने कहा…
गन्ने सा मीठा क्या बनना
कोल्हू में निचोड़े जाओगे
सत्य और सार्थक बात
बेहतरीन लेखन। आपकी रचनाओं को पढ़कर कोई भाव में कैसे न बहे। शुभकामनाएं ।
Sudha Devrani ने कहा…
हृदयतल से आभार,M Verma ji...
ब्लॉग पर आपका स्वागत है।
Sudha Devrani ने कहा…
बहुत बहुत धन्यवाद, पुरुषोत्तम जी उत्साहवर्धन के लिए...
सादर आभार ।
रेणु ने कहा…
एक सियासत देश में चलती
एक घरों में चलती है
भाषण में दम जिसका होता
सरकार उसी की बनती है
बहुत खूब प्रिय सुधा जी | यही बात सच है पर जो जैसा है वो वैसा ही रहता है | नेक को नेकी तो बद को बदी का आचरण शोभा देता है |
बुरों को बुराई से प्यार
हमें तो मानवता दरकार
कर्म शुभ हों ना जी दुखे किसी का
सबका अपने कर्मो पे अधिकार
छोड़ों व्यर्थ के जवाब सवाल
नेकी कर दो दरिया में डाल !!!! सस्नेह शुभकामनायें विकल मन की व्याकुलता जताती रचना के लिए
Sudha Devrani ने कहा…
वाह रेणु जी इतनी सुन्दर काव्य पंक्तियों से विकल मन को सारगर्भित बात समझायी है आपने....
हृदयतल से धन्यवाद आपका।
सस्नेह आभार...
Sweta sinha ने कहा…
वाहह्हह... अति उत्तम सराहनीय सृजन...सुधा जी..क्या खूब लिखा है आपने अक्षरशः. सत्य वचन👌
Sudha Devrani ने कहा…
बहुत बहुत धन्यवाद, श्वेता जी !
सस्नेह आभार...
Ritu asooja rishikesh ने कहा…
दुनियादारी सीखनी होगी अगर दुनियां में रहना है तो
भाषण में दम होता है जिसके सरकार उसी की चलती है
बहुत सुंदर सारगरभित रचना
Sudha Devrani ने कहा…
बहुत बहुत धन्यवाद, रितु जी !
सस्नेह आभार...
विश्वमोहन ने कहा…

एक सियासत देश में चलती
एक घरों में चलती है
भाषण में दम जिसका होता
सरकार उसी की बनती है ... वाह! बहुत बड़ा सच लिखा आपने।
Sudha Devrani ने कहा…
बहुत बहुत धन्यवाद, विश्वमोहन जी !
सादर आभार....
~Sudha Singh vyaghr~ ने कहा…
वाह वाह वाह वाह वाह 👏 👏 👏 बहुत बढ़िया. यथार्थ परोसा है आपने
Sudha Devrani ने कहा…
बहुत बहुत धन्यवाद, सुधा जी !
सस्नेह आभार...
बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति :)

वक़्त मिले तो हमारे ब्लॉग पर भी आयें|
http://sanjaybhaskar.blogspot.com
विश्वमोहन ने कहा…
वाह! बहुत खूब!!!
Sudha Devrani ने कहा…
हार्दिक धन्यवाद एवं आभार संजय जी!
Sudha Devrani ने कहा…
हार्दिक धन्यवाद एवं आभार आ. विश्वमोहन जी!
दुनियादारी सीखनी ही पड़ती है । जो भावोंमें बहा उसे सब दरकिनार कर देते हैं । आज तो जैसे को तैसा करने का ज़माना है ।।सटीक और सार्थक रचना ।
Sudha Devrani ने कहा…
जी .संगीता जी! जैसा को तैसा तो आना ही चाहिए ...
तहेदिल से धन्यवाद एवं आभार आपका ।

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