मोल्यारी मास म्यर पहाड़ मा | गढ़वाली गीत

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  ✨ परिचय (Intro) गढ़वाल की वादियों में हर मौसम अपनी अलग कहानी लेकर आता है, लेकिन मोल्यारी मास (बसंत ऋतु) का सौंदर्य कुछ खास होता है। यह गीत उसी बसंती एहसास, पहाड़ की खुशबू, बचपन की यादों और लोकजीवन की सरलता को शब्दों में पिरोता है। कलीं कलीं वनफसा फूलीं, उँण्या कुण्याँ सँतराज खिल्याँ  मोल्यारी मास म्यर पहाड़ मा, डाँडी-काँठी फुल्यारी सज्याँ  बाट किनार बसींगा फूलीं छन रौली-खौली काली जीरी फूलीं  चल दगड़्यों म्याल खैयोला बण की डाली फलूण झूलीं उड़दि तितली रंग-बिरंगी भोंरा बि छन गुंजण लग्याँ मोल्यारी मास म्यर पहाड़ मा,डाँडी-काँठी फुल्यारी सज्याँ  ऊँची डाड्यूँ मा सुनेरी उल्यार रोली खोली हर्याली छयीं छुम बजांदि दाथुणि छुमका घास घस्याण घसेरी जयीं खुदेड़ गीतुंक गुणगुणाट आँख्यूँ मा टुपि दे आँसू बह्याँ। मोल्यारी मास म्यर पहाड़ मा, डाँडी-काँठी फुल्यारी सज्याँ पुराण दिन याद आदिन मैति मैत्युंक लोभ लग्याँ खुद लगदि ज्यु खुदेंदी फूलूँ दगड़ी भाव बग्याँ धरती म्यरि, म्यरु पहाड़्यों स्वरग जणि च भलि लग्याँ मोल्यारी मास म्यर पहाड़ मा, डाँडी-काँठी फुल्यारी सज्याँ फसल कटि, बिखौंति मनीगे जगा जगा ...

इकतरफा प्रेम यूँ करना क्या ?.

bird on a tree branch staring moon with love
चित्र :  साभार, गूगल से-


जब जान लिया पहचान लिया,
नहीं वो तेरा यह मान लिया ।
बेरुखी उसकी स्वीकार तुझे,
फिर घुट-घुट जीवन जीना क्या ?
हर पल उसकी ही यादों में,
गमगीन तेरा यूँ रहना क्या ?
तेरा छुप-छुप आँँसू पीना क्या ?


उसके आते ही तेरी नजर,
बस उसमें थम जाती है ।
धड़कन भी बढ़ जाती है,
आँखों में चमक आ जाती है।
तू साथ चाहता क्यों उसका,
वो तुझसे कोसों दूर खड़ा ?
जब उसको ये मंजूर नहीं,
इकतरफा प्रेम यूँ करना क्या ?


उसकी राहें भी तुझसे जुदा,
मंजिल उसकी कहीं और ही है,
नहीं हो सकता तेरा उसका मिलन,
दिल में उसके कुछ और ही है।
वो चाँद आसमां का ठहरा,
चकोर सा तेरा तड़पना क्या ?
फिर मन ही मन यूँ जलना क्या,
इकतरफा प्रेम यूँ करना क्या ?

जीवन तेरा भी अनमोल यहाँ,
तेरे चाहने वाले और भी हैं।
इकतरफा सोच से निकल जरा,
तेरे दुख से दुखी तेरे और भी हैं।
वीरान पड़ी राहों में तेरा.
यूँ फिर-फिर आगे बढ़ना क्या ?
इकतरफा प्रेम यूँ करना क्या ?
फिर मन ही मन यूँ जलना क्या ?


टिप्पणियाँ

  1. आपकी लिखी रचना  ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" बुधवार 14 दिसम्बर 2022 को साझा की गयी है...
    पाँच लिंकों का आनन्द पर
    आप भी आइएगा....धन्यवाद!

    जवाब देंहटाएं
  2. सीख तो सटीक है । लेकिन अपने हिस्से का प्रेम किसी और कि चाहत बन जाये तब शायद बहुत मुश्किल होता होगा स्वयं को संभालना ।
    सार्थक सृजन ।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. सही कहा आपने मुश्किल तो होता होगा परंतु सम्भालना तो तब भी होता ही होगा न खुद को अपनों की खातिर ।
      हृदयतल से धन्यवाद एवं आभार ।

      हटाएं
  3. वो चाँद आसमां का ठहरा,
    चकोर सा तेरा तड़पना क्या ?
    फिर मन ही मन यूँ जलना क्या,
    इकतरफा प्रेम यूँ करना क्या ?

    इकतरफा प्यार का भी अपना ही आनंद है सुधा जी ☺️ इसमें किसी और के होने की जरूरत जो नहीं है। ये तो मज़ाक था, इस लाजबाव सृजन तक लाने के लिए यशोदा दी को हृदयतल से धन्यवाद 🙏

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. मजाक नहीं कामिनी जी ये तो एक जबरदस्त नजरिया है कि इसमें किसी और की जरूरत नहीं...
      दिल से धन्यवाद एवं आभार आपका ।

      हटाएं
  4. एक तरफे प्रेम से दुखित लोगों के मोह से निवारणीय सुंदर आह्वान।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. तहेदिल से धन्यवाद एवं आभार कुसुम जी आपकी अनमोल प्रतिक्रिया से सृजन सार्थक हुआ ।

      हटाएं
  5. प्रिय सुधा जी,किसी प्रेम पीर की मारी नायिका के लिए बहुत प्रेरक सीख देंती अत्यंत भाव-पूर्ण अभियक्ति है।
    एकतरफा प्रेम सदैव ही किसी के लिए बहुत दुखद रहता है। पर यदि इन्सान बस यही सोचकर प्रेम करना छोड़ दे तो उसका प्रेम बहुत हल्का है। एक संवेदनशील मन के लिए प्रेम प्राप्य हो या प्राप्य, बहुत अनमोल होता है।। अपनी तरह की इस मार्मिक अभिव्यक्ति के लिए हार्दिक बधाई आपको।❤

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. तहेदिल से धन्यवाद एवं आभार रेणु जी आपकी अनमोल प्रतिक्रिया से सृजन सार्थक हुआ ।

      हटाएं
  6. कभी प्रिय श्वेता ने भी इसी तरह की एक रचना लिखी थी और उस पर एक काव्यात्मक प्रतिक्रिया के रूप में आपकी रचना से मिलतीं- जुलती कुछ पंक्तियाँ लिखी थी जो यहाँ लिख रही हूँ।---

    काश ! कोई उस पगली को समझाए तो,
    पोंछ दे आँसू उसके
    कस सीने से उसे लगाये तो !

    कैसे लौट वो अब आयेगा,
    जो था बस एक रात का सपना!
    लाख बाँधती उसको आँचल से
    वो था नहीं कभी भी अपना!

    होगा कहीं किसी राजकुमार -सा
    जो चढ़ घोड़े पर आयेगा!
    सूनी तितलियों में पलकों की
    रंग सुनहरी भर जाएगा!

    बैठ किसी कोने में तनिक सा,
    सपनों के साज सजाये तो !
    अभी शेष बड़े रंग जीवन के
    सोच ज़रा मुस्काए तो!!
    🙏❤

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. प्रिय रेणु जी निःशब्द हूँ इन भावप्रवण पंक्तियों से ...पंक्तियां कहाँ ये तो पूर्ण सृजन है जो रचना से भी ज्यादा हृदयस्पर्शी एवं लाजवाब है।
      मेरी रचना पर आपकी भावाभिव्यक्ति की ये अनमोल पंक्तियां पाकर अभिभूत हूँ मैं ।जिसके लिए आभार शब्द बहुत कम है ।
      बस ढ़ेर सारा स्नेह ❤️❤️

      हटाएं

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