बच्चों को समझाने का सही तरीका – सासू माँ की सीख देने वाली कहानी

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क्या आपका बच्चा भी जिद करता है? जानिए एक छोटी सी कहानी से बड़ा parenting मंत्र…   बच्चों को डांटने के बजाय प्यार और धैर्य से समझाना क्यों जरूरी है? पढ़िए सासू माँ की सीख देती यह प्रेरणादायक हिंदी कहानी। आरव की जिद और निधि की परेशानी माँजी, आरव बहुत जिद्दी है...।  मैंने उसे कितना समझाया, पर वो माना ही नहीं… और आपने तो पल भर में मना लिया। कैसे माँजी? आप कैसे मना लेती हैं उसे? उसे क्या, आप तो सभी बच्चों को मना लेती हैं… आश्चर्य भरी मुस्कान के साथ निधि अपनी सासू माँ से पूछ ही रही थी कि तभी प्रीति (देवरानी) ने किचन से आवाज लगाई— किचन में छोटी सी सीख “दीदी, ज़रा ये दूध पतीली में डाल दीजिए न…  मुझसे गिर जाता है। पैकेट से डालते वक्त दूध उछल कर बाहर गिर जाता है।” सिखाने का तरीका निधि किचन में गई और दूध पतीली में डालते हुए बोली— “अरे ! ऐसे कैसे गिर जाता है तुमसे दूध? देखो, धीरे-धीरे डालो… पतली धार में। अगर एकदम से ज्यादा दूध डालोगी, वो भी खाली पतीले में, तो उछलेगा ही न।” सासू माँ दूर से सब सुनकर मुस्कुरा रही थीं। थोड़ी देर बाद निधि चाय लेकर आई और सासू माँ को देते हुए फिर बोली— “अब ...

"मन और लेखनी"



writing on empty notebook

लिखने का मन है,
लिखती नहीं लेखनी,
लिखना मन चाहता,
कोई जीवनी कहानी ।
शब्द आते नहीं, मन
बोझिल है दुःखी लेखनी ।
लिखने का मन है,
लिखती नहीं लेखनी ।
मन मझधार में है ,
लेखनी पार जाना चाहती,
मन में अपार गम हैं,
लेखनी सब भुलाना चाहती ।
सारे दुखों  को भूल
अन्त सुखी बनाना चाहती,
मन मझधार में है,
लेखनी पार जाना चाहती ।

चन्द लेख बन्द रह गये,
यूँ  ही  किताबों  में ।
जैसे कुछ राज छुपे हों ,
जीवन की यादों में,
वक्त बेवक्त उफनती ,
लहरेंं 'मन-सागर' में,
देखूँ ! कब तक सम्भलती
हैं, ये यादें जीवन में।?

लेखनी समझे उलझन,
सम्भल के लिख भी पाये।
वो लेख ही क्या लिखना
जो 'सुलझी-सीख' न दे पाये।

टिप्पणियाँ

  1. आपकी लिखी रचना  ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" बुधवार 14 दिसम्बर 2022 को साझा की गयी है...
    पाँच लिंकों का आनन्द पर
    आप भी आइएगा....धन्यवाद!

    जवाब देंहटाएं
  2. हृदयतल से धन्यवाद एवं आभार आ.यशोदा जी !

    जवाब देंहटाएं
  3. शब्द आते नहीं, मन
    बोझिल है दुःखी लेखनी ।
    लिखने का मन है,
    लिखती नहीं लेखनी ।
    मन मझधार में है ,
    लेखनी पार जाना चाहती,

    इन दिनों मेरी लेखनी की भी यही दशा है।
    कभी कभी शब्द को से जाते हैं, बहुत ही सुन्दर सृजन सुधा जी 🙏

    जवाब देंहटाएं

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