मोबाइल फोन: सुविधा या लत? | मोबाइल के फायदे और नुकसान | हिंदी लेख
परिचय आधुनिक युग में विज्ञान का एक अद्भुत और महत्त्वपूर्ण उपहार मोबाइल फोन है। सुबह आँख खुलने से लेकर रात को विश्राम करने तक यह हमारे जीवन का लगभग अभिन्न साथी बन चुका है। जहाँ एक ओर इसने हमारे अनेक कार्यों को सरल बनाया है, वहीं दूसरी ओर इसका अत्यधिक उपयोग कई नई समस्याओं का कारण भी बन रहा है। प्रस्तुत लेख में मोबाइल फोन की उपयोगिता के साथ-साथ इसकी लत से होने वाले दुष्प्रभावों पर चर्चा की गई है। आज मोबाइल फोन ने पूरी दुनिया को मानो हमारी मुट्ठी में समेट दिया है। कुछ दशक पहले जिन कार्यों के लिए घंटों या कई दिनों का समय लगता था, वे आज कुछ ही क्षणों में पूरे हो जाते हैं। यह एक ऐसी तकनीकी सुविधा है जिसने मनुष्य के जीवन को पहले की अपेक्षा कहीं अधिक सरल और सुविधाजनक बना दिया है। किसी से तुरंत संपर्क करना हो, पढ़ाई करनी हो, बैंकिंग का कार्य हो या मनोरंजन—अनेक कार्य अब एक ही मोबाइल फोन से सहजता से पूरे हो जाते हैं। यही कारण है कि आज यह बच्चों से लेकर बुज़ुर्गों तक, हर आयु वर...

आपकी लिखी रचना सोमवार 27 जून 2022 को
जवाब देंहटाएंपांच लिंकों का आनंद पर... साझा की गई है
आप भी सादर आमंत्रित हैं।
सादर
धन्यवाद।
संगीता स्वरूप
हृदयतल से धन्यवाद एवं आभार आ. संगीता जी मेरी इतनी पुरानी भूली बिसरी रचना चयन कर पाँच लिंको के आनंद मंच पर साझा करने हेतु।
हटाएंलौट आओ वहींं से जहाँँ हो,
जवाब देंहटाएंव्वाहहहहह..
आभार..
सादर..
तहेदिल से धन्यवाद एवं आभार आ.यशोदा जी !
हटाएंलौट आये कहीं तुम्हारे लिए
जवाब देंहटाएंजीवन की दोपहर में
धूप की आपाधापी में
जो खो गया
साँझ होने के पहले
गर मिल जाए
रात का मायना बदल जाए।
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सुंदर अभिव्यक्ति सुधा जी।
सस्नेह।
जी, श्वेता जी, क्या खूब कहा आपने ! साँझ होने के पहले
हटाएंगर मिल जाए
रात का मायना बदल जाए।
बहुत सही...तहेदिल से धन्यवाद एवं आभार आपका ।
खाई भी गहरी सी है,
जवाब देंहटाएंचलो पाट डालो उसे ।
सांझ ढलने से पहले,
बगिया बना लो उसे ।
नन्हींं नयी पौध से फिर,
महक जायेगा घर-बार ।
लौट आयें बचपन की यादें,
लौट आये फिर कहीं प्यार ?
एक समृद्ध परिवार संस्था जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। नव चेतना भरती सुंदर सराहनीय रचना । बधाई सुधा जी ।
तहेदिल से धन्यवाद एवं आभार जिज्ञासा जी !
हटाएंढले साँझ समझे अगर
जवाब देंहटाएंबस सिर्फ पछताओगे
बस में न होगा समय
फिर क्या तुम कर पाओगे
एक पल ठहर कर यही तो नहीं सोचते और अपने ही हाथों तोड़ देते खुशियों का घरौंदा, बेहद मार्मिक सृजन सुधा जी 🙏
जी, कामिनी जी सही कहा आपने...
हटाएंसारगर्भित प्रतिक्रिया हेतु तहेदिल से धन्यवाद एवं आभार आपका।