आओ बच्चों ! अबकी बारी होली अलग मनाते हैं

आओ बच्चों ! अबकी बारी होली अलग मनाते हैं जिनके पास नहीं है कुछ भी मीठा उन्हें खिलाते हैं । ऊँच नीच का भेद भुला हम टोली संग उन्हें भी लें मित्र बनाकर उनसे खेलें रंग गुलाल उन्हें भी दें छुप-छुप कातर झाँक रहे जो साथ उन्हें भी मिलाते हैं जिनके पास नहीं है कुछ भी मीठा उन्हें खिलाते हैं । पिचकारी की बौछारों संग सब ओर उमंगें छायी हैं खुशियों के रंगों से रंगी यें प्रेम तरंगे भायी हैं। ढ़ोल मंजीरे की तानों संग सबको साथ नचाते हैं जिनके पास नहीं है कुछ भी मीठा उन्हें खिलाते हैं । आज रंगों में रंगकर बच्चों हो जायें सब एक समान भेदभाव को सहज मिटाता रंगो का यह मंगलगान मन की कड़वाहट को भूलें मिलकर खुशी मनाते हैं जिनके पास नहीं है कुछ भी मीठा उन्हें खिलाते हैं । गुझिया मठरी चिप्स पकौड़े पीयें साथ मे ठंडाई होली पर्व सिखाता हमको सदा जीतती अच्छाई राग-द्वेष, मद-मत्सर छोड़े नेकी अब अपनाते हैं जिनके पास नहीं है कुछ भी मीठा उन्हें खिलाते हैं । पढ़िए एक और रचना इसी ब्लॉग पर ● बच्चों के मन से
जी नमस्ते,
जवाब देंहटाएंआपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (११ -०१ -२०२०) को "शब्द-सृजन"- ३ (चर्चा अंक - ३५७७) पर भी होगी।
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
आप भी सादर आमंत्रित है
….
-अनीता सैनी
सहृदय धन्यवाद अनीता जी मेरी रचना साझा करने के लिए...
जवाब देंहटाएंसस्नेह आभार...।
है राहें औऱ भी नजरे तो उठा !
जवाब देंहटाएंउम्मीदें बढा फिर चलें तो जरा !
वजह मुस्कुराने की हैं और भी
बहुत खूब...., सादर नमन
सहृदय धन्यवाद, कामिनी जी !
हटाएंसस्नेह आभार।
एक हवा प्रेम की सरसराते हुए........
जवाब देंहटाएंबिखरी जुल्फों को यूँ सहलाने लगी
*देख ऐसी कला उस कलाकार की,
भावना गीत बन गुनगनाने लगी.........
बेहतरीन रचना सखी
हृदयतल से धन्यवाद एवं आभार सखी।
जवाब देंहटाएंआपकी लिखी रचना सोमवार 17 अक्टूबर 2022 को
जवाब देंहटाएंपांच लिंकों का आनंद पर... साझा की गई है
आप भी सादर आमंत्रित हैं।
सादर
धन्यवाद।
संगीता स्वरूप
है राहें औऱ भी नजरे तो उठा !
जवाब देंहटाएंउम्मीदें बढा फिर चलें तो जरा !
वजह मुस्कुराने की हैं और भी,
सकारात्मक भावों का संचार करती अत्यंत सुन्दर भावाभिव्यक्ति ।
जिंदगी कोई न कोई मार्ग चुन मुस्कराती रहे ।
जवाब देंहटाएंसकारात्मक भाव से सजी सुंदर रचना।
वजह मुस्कुराने की हैं और भी,
जवाब देंहटाएंजो नहीं उस पर रोना तो छोड़े जरा...
बहुत खूब…👌👌
देख ऐसी कला उस कलाकार की,
जवाब देंहटाएंभावना गीत बन गुनगनाने लगी ।
मन में आस और विश्वास भरती बेहद प्रेरक और सुंदर लेखन सुधा जी।
सस्नेह।
वजह मुस्कुराने की हैं और भी,
जवाब देंहटाएंजो नहीं उस पर रोना तो छोड़े जरा...
सकारात्मक सोच दर्शाती बहुत सुंदर रचना,सुधा दी।
बेहतरीन रचना ,पॉजिटिव सोच को बताती
जवाब देंहटाएंआशा का एक दीप जीवन को आलोकित कर देता है, बस वो दीप जलाए रखना ही जीवन का सुधा तत्व है।
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर सृजन सुधा जी।
सकारात्मक सोच का दर्पण।
कविता के द्वितीय छन्द ने तो खूबसूरती की इन्तहा ही कर दी है। सच में बहुत सुन्दर लिख गई हैं आप! जुगनू के सन्दर्भ ने कविता की सुंदरता को पराकाष्ठा तक पहुँचा दिया है। इस सुन्दर रचना के लिए बधाई सुधा जी!
जवाब देंहटाएं