खामोशी जो सब कह गई | अनकही भावनाओं की भावुक हिंदी कहानी
प्रस्तावना (Introduction) "शब्दों की एक सीमा होती है, पर संवेदनाएँ असीम हैं।" अक्सर हमें लगता है कि मन की उलझनों को शब्दों के धागे में पिरोकर बाहर निकाल देने से हृदय का बोझ कम हो जाएगा। हम सोचते हैं कि कह देने से मन खाली हो जाएगा। लेकिन क्या वाक़ई ऐसा होता है ? कभी-कभी शब्द उस गुबार को केवल हवा देते हैं, और पीछे छूट जाती है एक भारी खामोशी । यह कहानी है एक ऐसी ही संध्या की, जहाँ डूबते सूरज की लाली और बादलों की विरल परतों के बीच एक स्त्री अपने अंतर्मन की गठरी खोलती है। वह बोलती तो है, पर पाती है कि आँसू फिर भी थम नहीं रहे। यह रचना 'कह देने' और 'महसूस करने' के बीच के उस सूक्ष्म अंतर को उकेरती है, जहाँ अंततः उसे समझ आता है कि पूर्णता शब्दों में नहीं, बल्कि स्वयं की खामोशी और वर्तमान स्थिति को स्वीकार करने में है । संध्या की धुंधलाती बेला वह छत के कोने में खामोश खड़ी थी। उसकी निगाहें दूर क्षितिज में कहीं खोई हुई थीं, मानो अपनी उमड़ती भावनाओं का कोई सिरा खोज रही हो। आकाश पर बादलों की विरल परतें, दिनभर के अनकहे भावों को समेटे धीरे-धीरे तैर रही थीं। डूबते सूरज...

तहेदिल से धन्यवाद आ.यशोदा जी मेरी रचना को मुखरित मौन के मंच पर स्थान देने हेतु।
जवाब देंहटाएंसादर आभार
आहा क्या ओजस्वी आह्वान है।
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर सकारात्मक संदेश देती
ऊर्जा से परिपूर्ण सृजन प्रिय सुधा जी।
सस्नेह।
बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार प्रिय श्वेता जी!
हटाएंनारी सशक्तिकरण की महत्वपूर्ण रचना प्रिय सुधा जी। नारी जब तक सशक्त नहीं होगी उसका कोई भला नहीं कर सकता। अत्यन्त ओजपूर्ण अभिव्यक्ति के लिए ढेरों शुभकामनाएं आपको 🙏🌷🌷❤️❤️
जवाब देंहटाएंहार्दिक धन्यवाद एवं आभार रेणु जी!
हटाएंआपकी अनमोल प्रतिक्रिया हमेशा उत्साहद्विगुणित कर देती है।
ओज, तेज़ और सार्थक संदेश की त्रिवेणी भ रही है यहाँ। बधाई!
जवाब देंहटाएंअत्यंत आभार एवं धन्यवाद आ.विश्वमोहन जी!
हटाएंनारी को अपने प्रति होने वाले शोषण को खत्म करने के लिए जाग्रत होने का संदेश देती सुंदर और ओजपूर्ण रचना ।
जवाब देंहटाएंबहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार आपका।
हटाएंसादर नमस्कार ,
जवाब देंहटाएंआपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (5-4-22) को "शुक्रिया प्रभु का....."(चर्चा अंक 4391) पर भी होगी।
आप भी सादर आमंत्रित है,आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ायेगी।
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कामिनी सिन्हा
सहृदय धन्यवाद एवं आभार कामिनी जी मेरी रचना को मंच प्रदान करने हेतु ।
जवाब देंहटाएंनारी की क्षमताओं को दिखाती सुंदर सुदृढ़ रचना।
जवाब देंहटाएंओज का आह्वान।
अत्यंत आभार एवं धन्यवाद आपका।
हटाएंनारी सशक्तीकरण पर भावपूर्ण और प्रेरक प्रस्तुति प्रिय सुधा जी।अच्छा लगा एक बार फिर पढकर।सस्नेह शुभकामनायें
जवाब देंहटाएंसहृदय धन्यवाद एवं आभार प्रिय रेणु जी!
हटाएंसार्थक अभिव्यक्ति नारी शक्ति का आह्वान करती रचना
जवाब देंहटाएंअत्यंत आभार एवं धन्यवाद आ.कैलाश जी !
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