बच्चों को समझाने का सही तरीका – सासू माँ की सीख देने वाली कहानी
क्या आपका बच्चा भी जिद करता है? जानिए एक छोटी सी कहानी से बड़ा parenting मंत्र… बच्चों को डांटने के बजाय प्यार और धैर्य से समझाना क्यों जरूरी है? पढ़िए सासू माँ की सीख देती यह प्रेरणादायक हिंदी कहानी। आरव की जिद और निधि की परेशानी माँजी, आरव बहुत जिद्दी है...। मैंने उसे कितना समझाया, पर वो माना ही नहीं… और आपने तो पल भर में मना लिया। कैसे माँजी? आप कैसे मना लेती हैं उसे? उसे क्या, आप तो सभी बच्चों को मना लेती हैं… आश्चर्य भरी मुस्कान के साथ निधि अपनी सासू माँ से पूछ ही रही थी कि तभी प्रीति (देवरानी) ने किचन से आवाज लगाई— किचन में छोटी सी सीख “दीदी, ज़रा ये दूध पतीली में डाल दीजिए न… मुझसे गिर जाता है। पैकेट से डालते वक्त दूध उछल कर बाहर गिर जाता है।” सिखाने का तरीका निधि किचन में गई और दूध पतीली में डालते हुए बोली— “अरे ! ऐसे कैसे गिर जाता है तुमसे दूध? देखो, धीरे-धीरे डालो… पतली धार में। अगर एकदम से ज्यादा दूध डालोगी, वो भी खाली पतीले में, तो उछलेगा ही न।” सासू माँ दूर से सब सुनकर मुस्कुरा रही थीं। थोड़ी देर बाद निधि चाय लेकर आई और सासू माँ को देते हुए फिर बोली— “अब ...

बहुत सुंदर रचना।
जवाब देंहटाएंहार्दिक आभार ज्योति जी !
हटाएंबहुत सुंदर👏
जवाब देंहटाएंअत्यंत आभार आपका ।
हटाएंबहुत ही गहरी और भावपूर्ण …
जवाब देंहटाएंतहेदिल से धन्यवाद एवं आभार नासवा जी !
हटाएंभाव पूर्ण रचना
जवाब देंहटाएंसादर
हार्दिक धन्यवाद यशोदा जी !
हटाएंप्रेरणादायक पंक्तियाँ
जवाब देंहटाएंदिल चीर रही हैं आपकी लिखी ये पंक्तियां कि-
जवाब देंहटाएं''पर तू अपनी कोशिश से, अपना लोहा मनवायेगी ।अब जागी है तो भोर तेरी, दिन बाकी है अब रात नहीं।''
और एक जिजिविषा में समेट हौसलों को नई उड़ान दे रही हैं सुधा जी....वाह क्या खूब लिखा
तहेदिल से धन्यवाद जवं आभार आपका अलकनंदा जी !
हटाएंबहुत सुन्दर
जवाब देंहटाएंसादर आभार एवं धन्यवाद आ.आलोक जी !
हटाएंजन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं, सुधा दी।
जवाब देंहटाएंबहुत बहुत धन्यवाद ज्योति जी !
हटाएंपोषी जो संतति तूने, उसमें भी क्यों जज्बात नहीं ।
जवाब देंहटाएंअंतरिक्ष तक परचम तेरा, पर घर में औकात नहीं।
हर पंक्ति बहुत सार्थक और विचार करने को प्रेरित करती हुई।
अत्यंत आभार एवं धन्यवाद मीनाजी !
हटाएंहृदयतल से धन्यवाद आपका प्रिय श्वेता !
जवाब देंहटाएंनारी के जीवन की दायित्वों और बंधनों को समर्पण में बाँध कर बहुत अच्छी रचना रची। हार्दिक बधाई !
जवाब देंहटाएंतहेदिल से धन्यवाद एवं आभार आ.रेखा जी !
हटाएंप्रिय सुधा, सबका संबल बनने की धुन में अपने व्यक्तित्व को ही गँवा देती हैं नारी! बाहर जाती है तो उसकी नैतिकता और मूल्य दाव पर लग जाते हैं! सच में अपना मूल्यांकन और स्वाभिमान पर अधिकार के साथ नैतिकता के साथ कोई समझौता ना हों ये बेहद जरूरी है! एक मर्मांतक रचना जो गहरे तक उतर गई
जवाब देंहटाएंहृदयतल से आभार एवं धन्यवाद सखी !
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