मुस्कराया जब वो पाटल खिलखिलाकर

Rose flower


शर्द ठिठुरन, ओस, कोहरा सब भुलाकर

मुस्कराया जब वो पाटल खिलखिलाकर ।


शर्म से रवि लाल, छोड़ी शुभ्र चादर,

रश्मियां दौड़ी धरा , आलस भगाकर ।


छोड़ ओढ़न फिर धरावासी जो जागे,

शीतवाहक भागते तब दुम-दबाके ।

 

क्रुद्ध हारे शिशिर ने पाटल को देखा,

पूस पतझड़ी प्रवात, जम के फेंका ।


सिंहर कर भी संत सा वो मुस्कुराया,

अंक ले मारुत को वासित भी बनाया।


बिखरी पड़ी हर पंखुड़ी थी मुस्कराती,

ओस कण में घुल मधुर आसव बनाती ।


सत्व इसका सृष्टि को था बहुत भाया, 

हो प्रफुल्लित 'पुष्प का राजा' बनाया ।




टिप्पणियाँ

  1. सत्व इसका सृष्टि को था बहुत भाया,

    हो प्रफुल्लित 'पुष्प का राजा' बनाया ।

    बहुत खूब, फुलों के राजा का इतना प्यारा वर्णन,मन मोह लिया आपने सुधा जी 🙏

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. तहेदिल से धन्यवाद एवं आभार कामिनी जी !
      आपकी अनमोल प्रतिक्रिया से सृजन सार्थक हुआ ।

      हटाएं
  2. सर्द ठिठुरन, ओस, कोहरा सब भुलाकर
    मुस्कराया जब वो पाटल खिलखिलाकर ।
    सुंदर
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  3. फूलों के राजा का बहुत ही सुंदर वर्णन किया है सुधा दी आपने।

    जवाब देंहटाएं
  4. गोपेश मोहन जैसवाल22 दिसंबर 2022 को 2:36 pm बजे

    वाह !
    हमारी ठण्ड में कंपकंपी छूट रही है लेकिन फूलों का राजा कांपने के बजाय मुस्कुरा रहा है, खिलखिला रहा है.

    जवाब देंहटाएं
  5. सुंदर सृजन ,
    प्रकृति हर मौसम में स्वयं को ढाल लेती है ।
    हम मनुष्य ही हर तरह के मौसम को अपने अनुरूप बनाना चाहते हैं ।
    वैसे बहुत सर्दी है भई ।

    जवाब देंहटाएं
  6. सर्द मौसम. पुष्पों, मकरंदों के दिन ।
    सवार इतनी सुंदर मोहक कविता मन मोह गई ।
    लाजवाब शब्द विन्यास । बधाई सखी ।

    जवाब देंहटाएं
  7. दिगम्बर नासवा24 दिसंबर 2022 को 7:36 am बजे

    शरद के आगमन को बखूबी शब्दों में उढ़ेला है आपने .. हर छंद लाजवाब है .. ऋतु विशेष की और इशारा करता हुआ …

    जवाब देंहटाएं

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