आओ बच्चों ! अबकी बारी होली अलग मनाते हैं

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  आओ बच्चों ! अबकी बारी  होली अलग मनाते हैं  जिनके पास नहीं है कुछ भी मीठा उन्हें खिलाते हैं । ऊँच नीच का भेद भुला हम टोली संग उन्हें भी लें मित्र बनाकर उनसे खेलें रंग गुलाल उन्हें भी दें  छुप-छुप कातर झाँक रहे जो साथ उन्हें भी मिलाते हैं जिनके पास नहीं है कुछ भी मीठा उन्हें खिलाते हैं । पिचकारी की बौछारों संग सब ओर उमंगें छायी हैं खुशियों के रंगों से रंगी यें प्रेम तरंगे भायी हैं। ढ़ोल मंजीरे की तानों संग  सबको साथ नचाते हैं जिनके पास नहीं है कुछ भी मीठा उन्हें खिलाते हैं । आज रंगों में रंगकर बच्चों हो जायें सब एक समान भेदभाव को सहज मिटाता रंगो का यह मंगलगान मन की कड़वाहट को भूलें मिलकर खुशी मनाते हैं जिनके पास नहीं है कुछ भी मीठा उन्हें खिलाते हैं । गुझिया मठरी चिप्स पकौड़े पीयें साथ मे ठंडाई होली पर्व सिखाता हमको सदा जीतती अच्छाई राग-द्वेष, मद-मत्सर छोड़े नेकी अब अपनाते हैं  जिनके पास नहीं है कुछ भी मीठा उन्हें खिलाते हैं । पढ़िए  एक और रचना इसी ब्लॉग पर ●  बच्चों के मन से

जानी ऐसी कला उस कलाकार की....


 women praying

कुछ उलझने ऐसे उलझा गयी
असमंजस के भाव जगाकर
बुरी तरह मन भटका गयी,
जब सहा न गया, मन व्यथित हो उठा
आस भी आखिरी सांस लेने लगी
जिन्दगी जंग है हार ही हार है
नाउम्मीदी ही मन में गहराने लगी
पल दो पल भी युगों सा तब लगने लगा
कैसे ये पल गुजारें ! दिल तड़पने लगा
थक गये हारकर , याद प्रभु को किया
हार या जीत सब श्रेय उनको दिया
मन के अन्दर से "मै" ज्यों ही जाने लगा
एक दिया जैसे तम को हराने लगा
बन्द आँखों से बहती जो अश्रुधार थी
सूखती सी वो महसूस होने लगी
नम से चेहरे पे कुछ गुनगुना सा लगा
कुछ खुली आँख उजला सा दिखने लगा
उम्मीदों की वो पहली किरण खुशनुमा
नाउम्मीदी के बादल छटाने लगी
आस में साँस लौटी और विश्वास भी
जीने की आस तब मन में आने लगी
जब ये जानी कला उस कलाकार की
इक नयी सोच मन में समाने लगी
भावना गीत बन गुनगुनाने लगी....

गहरा सा तिमिर जब दिखे जिन्दगी में
तब ये माने कि अब भोर भी पास है
दुख के साये बरसते है सुख बन यहाँ
जब ये जाने कि रौशन हुई आस है
रात कितनी भी घनी बीत ही जायेगी
नयी उजली सुबह सारे सुख लायेगी
जब ये उम्मीद मन में जगाने लगी
हुई आसान जीवन की हर इक डगर
जब से भय छोड़ गुण उसके गाने लगी
इक नयी सोच मन में समाने लगी
जानी ऐसी कला उस कलाकार की
भावना गीत बन गुनगुनाने लगी......


                         चित्र ;साभार गूगल से-

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