जल संरक्षण कविता | पानी का करो संचय | मनहरण घनाक्षरी

चित्र
परिचय जल ही जीवन का आधार है, फिर भी बढ़ती जनसंख्या, जल का अपव्यय, प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के कारण जल संकट लगातार गहराता जा रहा है। ऐसे समय में जल संरक्षण केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि हम सभी की जिम्मेदारी है। प्रस्तुत मनहरण घनाक्षरी "पानी का करो संचय" जल बचाने, वर्षा जल संचयन, नदियों की स्वच्छता, वृक्षारोपण और प्रकृति के संतुलन का प्रेरक संदेश देती है। आइए, इस कविता के माध्यम से जल की प्रत्येक बूंद का महत्व समझें और उसे सहेजने का संकल्प लें ।        पानी का करो संचय मत करो अपव्यय जल से ही जीवन है जल को बचाइये । खेती - बाड़ी घर बार जल ही जीवन सार प्रभु का है वरदान सबको बताइये। बहता है अविरल नदियों में कल-कल नदियों को स्वच्छ कर मधुता बढ़ाइये जल है सभी की जान प्रकृति हितैषी मान  बूँद बूँद संचय की मुहिम चलाइये जल तो है अनमोल नल नहीं व्यर्थ खोल इसका महत्व जान व्यर्थ ना बहाइये सुनो जल की जुबानी  चुक रहा सब पानी कर लो जतन शीघ्र समय ना गंवाइये अतिवृष्टि अनावृष्टि बिगड़ी समस्त सृष्टि वन से है संतुलन वृक्ष भी लगाइये ग्रीष्म में बढ़ा है ताप जल कुंड बने भाप सूखती धरा है आ...

चींटी के पर निकलना | माँ की तपस्या पर प्रेरक लघुकथा

 परिचय

क्या सफलता केवल व्यक्ति की मेहनत का परिणाम होती है, या उसके पीछे माता-पिता के त्याग, संघर्ष और वर्षों की तपस्या भी छिपी होती है? यह लघुकथा उसी सच को उजागर करती है, जिसे सफलता मिलने के बाद अक्सर लोग भूल जाते हैं। आइए पढ़ते हैं "चींटी के पर निकलना", एक ऐसी मार्मिक प्रेरक लघुकथा जो सफलता के साथ विनम्रता और माँ के त्याग का वास्तविक महत्व समझाती है।




         
माँ अपने सफल बेटे को आशीर्वाद देती हुई – 'चींटी के पर निकलना' प्रेरक हिंदी लघुकथा





सफलता किसकी? बेटे की या माँ की तपस्या की

"ये क्या बात हुई, आंटी! सफलता मुझे मिली और बधाइयाँ मम्मी को?" रोहन ने मुस्कराते हुए कहा।

शीला ने स्नेह से उसकी ओर देखा और बोली, "हाँ बेटा! तेरी मम्मी की वर्षों की तपस्या रंग लाई है। बधाई तो उन्हें भी बनती है। और तुझे भी ढेरों शुभकामनाएँ। भगवान करे तू खूब तरक्की करे और हमेशा खुश रहे।"

यह कहते हुए उसने रोहन के सिर पर प्यार से हाथ फेर दिया।

रोहन थोड़ा असहज होकर बोला, "तपस्या कैसी, आंटी? मम्मी ने बस कुछ मन्नतें ही तो माँगी थीं। मेहनत तो मैंने दिन-रात पढ़कर की है। अगर मैं मेहनत न करता, तो क्या सिर्फ मन्नतों से मेरा चयन हो जाता?"

शीला हल्का-सा मुस्कराई।

"सही कहा बेटा। लेकिन मेहनत करने का अवसर भी तभी मिला, जब तेरी माँ ने अपनी हर इच्छा दबाकर, हर मुश्किल सहकर, तुझे यहाँ तक पढ़ाया।"

रोहन तुरंत बोला, "आंटी! कौन-सी बड़ी बात है? हर माँ-बाप अपने बच्चों को पढ़ाते ही हैं। आप भी तो पढ़ा रही हैं अपने बच्चों को।"

शीला की मुस्कान अब गंभीरता में बदल चुकी थी।

"माफ करना बेटा, मुझसे गलती हो गई। सच कहता है तू। बधाई तेरी माँ को नहीं, सिर्फ तुझे ही मिलनी चाहिए। तेरी माँ ने किया ही क्या है? बस अपनी हड्डियाँ तोड़कर मेहनत-मजदूरी करती रही, अपनी ज़रूरतें कुर्बान करती रही, अपनी खुशियाँ गिरवी रखती रही... यह सब तो कोई मायने ही नहीं रखता, है न?"

रोहन का सिर झुकने लगा।

शीला ने अंदर की ओर आवाज़ लगाई—

"अरी सरला! सुन...

मैं तो तुझसे कहने आई थी कि अब परमात्मा की कृपा से बेटा कमाने वाला हो गया है। अब तू खुद को इतना मत खपा। लेकिन अभी रोहन की बातें सुनकर लगता है, तू कमर कस ले। अभी छोटे बेटे मोहन के लिए भी वही सब करना होगा, जो रोहन के लिए किया था।"

फिर उसने रोहन की आँखों में देखते हुए कहा—

"और बेटा...

याद रखना, सफलता कभी अकेले किसी एक की नहीं होती। उसके पीछे किसी माँ का त्याग, किसी पिता का संघर्ष और पूरे परिवार की अनगिनत कुर्बानियाँ छिपी होती हैं।

चींटी के पर निकलना... उसके अपने ही विनाश का कारण बन जाता है।"

रोहन के पास अब कोई उत्तर नहीं था। उसकी झुकी हुई निगाहें पहली बार अपनी सफलता के पीछे खड़ी अपनी माँ की तपस्या को पहचान रही थीं।

निष्कर्ष

सफलता कभी अकेले किसी एक व्यक्ति की नहीं होती। उसके पीछे किसी माँ की अनगिनत कुर्बानियाँ, किसी पिता का संघर्ष और पूरे परिवार का निस्वार्थ सहयोग होता है। इसलिए मंज़िल मिल जाने पर उन हाथों को कभी मत भूलिए जिन्होंने गिरकर भी आपको संभाला। सफलता तभी सार्थक है, जब उसके साथ विनम्रता, कृतज्ञता और अपनों के त्याग का सम्मान भी जुड़ा हो।



✨धन्यवाद🙏

पढ़िए मेरी अन्य लघुकथाएं निम्न लिंक पर

● लघुकथा -  नानी-दादी के नुस्खे

● सब क्या सोचेंगे , ये भी मैं ही सोचूँ ? | लघुकथा

● लघुकथा - विडम्बना

● अपने ही पैर कुल्हाड़ी मारना





टिप्पणियाँ

  1. प्रिय सुधा जी, बहुत अरसे के बाद ब्लॉग पर आकर धीरे -धीरे सबसे जुड़ रही हूँ! आपकी कथा पढ़कर ना जाने कितने नाशुक्रे चेहरे आँखों में सजीव हो उठे! आज कृतघ्न संततियों का युग है! उच्च हो या निम्न हर वर्ग कथित ज्ञानी ( अज्ञानी) और मुंहजोर बच्चों से पीड़ित है! इनसे सुखद भविष्य की आशा रखना व्यर्थ है! एक सार्थक रचना के लिए हार्दिक बधाई 🌺🌺💐💐

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. तहेदिल से धन्यवाद आपका सखी ! आप आ रही हैं ये ही सबसे बड़ी खुशी की बात है । इतने समय बाद आपको ब्लॉग पर देखकर मन आल्हादित है । हार्दिक अभिनंदन सखी !

      हटाएं
  2. हद दर्जे कल एहसास फरामोश और बदतमीज होती नयी पीढ़ी समाज के लिए गंभीर सरदर्द से कम नहीं है।
    बहुत कुछ सोचने को मजबूर करती विचारणीय कहानी दी।
    सस्नेह प्रणाम दी
    सादर
    ------
    जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना शुक्रवार १९ जुलाई २०२४ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    सादर
    धन्यवाद।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. सस्नेह आभार एवं धन्यवाद प्रिय श्वेता ! अनमोल प्रतिक्रिया के साथ रचना को मंच प्रदान करने हेतु ।

      हटाएं
  3. बहुत खूब सुधा जी ,पता नहीं इस नई पीढी की सोच कहाँ जाकर रुकेगी ।

    जवाब देंहटाएं
  4. बहुत बहुत सुन्दर मार्मिक रचना

    जवाब देंहटाएं
  5. सुधार जी बहुत गहन और हृदय स्पर्शी लघु कथा आज का युवा माता पिता के त्याग को समझ ही कहां पाता है, समझेगा जरूर पर जब स्वयं माँ पिता की जगह खड़ा होगा।
    यथार्थ परक सार्थक सृजन।

    जवाब देंहटाएं
  6. खूबसूरती से पिरोया सुन्दर कहानी

    जवाब देंहटाएं

एक टिप्पणी भेजें

फ़ॉलोअर

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

दर्द होंठों में दबाकर....

करते रहो प्रयास (दोहे)

विश्वविदित हो भाषा

लेबल

कुण्डलिया छन्द3 गजल10 गढ़वाली कविता एवं उसका हिन्दी रूपांतरण1 गढ़वाली गीत1 गर्मी पर कविता1 गर्मी पर बाल कविता1 गीत18 गीतात्मक कविता1 चौपाई1 जलवायु परिवर्तन ग्लोबल वार्मिंग1 दोहा मुक्तक3 दोहे6 नवगीत15 नारी सशक्तिकरण1 पाँच लिंकों का आनंद स्थापना दिवस1 पारिवारिक कहानी1 पावस पर कविता1 पुस्तक समीक्षा1 प्रकृति1 प्रसंग1 प्रार्थना3 प्रेणादायक आलेख1 प्रेरक लघुकथा1 प्रेरणादायक कहानी1 प्रेरणादायक हिंदी कविता1 बाल कविता3 भावनात्मक1 भावनात्मक रचना1 मन1 मनहरण घनाक्षरी1 मनहरण घनाक्षरी छंद5 महिला सशक्तिकरण पर प्रेरणादायक कहानी।1 माता पिता1 मुक्तक3 मुहावरे पर आधारित लघुकथा1 रिश्ते1 रोला छंद2 लघु कथा2 लघु कहानी6 लघुकथा20 लेख4 वर्षा ऋतु1 व्यंग कविता1 व्यंग लेख1 शिक्षा -परीक्षा1 शुभकामना कविता1 संघर्ष1 संस्मरण1 संस्मरणात्मक लेख1 सकारात्मक सोच1 समीक्षा2 साहित्य1 हाइबन1 हायकु3 हास्यव्यंग कविता1 हास्यव्यंग लघुकथाएं1 हिंदी भावनात्मक कहानी1 हिंदी लघुकथा माँ का त्याग प्रेरक लघुकथा प्रेरणादायक कहानी1 हिंदी साहित्य1 हिन्दी कविता1
ज़्यादा दिखाएं