सोमवार, 10 अक्तूबर 2022

अक्टूबर के अनाहूत अभ्र

 

Cloudy sky

हे अक्टूबर के अनाहूत अभ्र !

 ये अल्हड़ आवारगी क्यों ?

प्रौढ़ पावस की छोड़ वयस्कता 

चिंघाड़ों सी गरजन क्यों ?


गरिमा भूल रहे क्यों अपनी,

डाले आसमान में डेरा ।

राह शरद की रोके बैठे,

जैसे सिंहासन बस तेरा ।


शरद प्रतीक्षारत देहलीज पे

धरणी लज्जित हो बोली,

झटपट बरसों बचा-खुचा सब

अब खाली कर दो झोली !


शरदचन्द्र पे लगे खोट से

चन्द्रप्रभा का कर विलोप

अति करते क्यों ऐसे जलधर !

झेल सकोगे शरद प्रकोप ?


जाओ अब आसमां छोड़ो !

निरभ्र शरद आने दो!

शरदचंद्र की धवल ज्योत्सना

 धरती को अब पाने दो !



26 टिप्‍पणियां:

yashoda Agrawal ने कहा…

आपकी लिखी रचना  ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" मंगलवार 11 अक्तूबर 2022 को साझा की गयी है....
पाँच लिंकों का आनन्द पर
आप भी आइएगा....धन्यवाद!

Meena Bhardwaj ने कहा…

शरद पूर्णिमा का धवल चन्द्रमा घटाओं की ओट में रहा कल …ऐसे मे अभ्र से शिकायत तो बनती है । बहुत सुन्दर सृजन ।

Kamini Sinha ने कहा…

सादर नमस्कार ,

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (11-10-22} को "डाकिया डाक लाया"(चर्चा अंक-4578) पर भी होगी। आप भी सादर आमंत्रित है,आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ायेगी।
------------
कामिनी सिन्हा

Sudha Devrani ने कहा…

हार्दिक धन्यवाद एवं आभार आ.यशोदा जी मेरी रचना पाँच लिंको के आनंद मंच चयन करने हेतु।

Sudha Devrani ने कहा…

जी मीनाजी दिल से धन्यवाद एवं आभार आपका ।

Sudha Devrani ने कहा…

तहेदिल से धन्यवाद एवं आभार कामिनी जी ! मेरी रचना को चर्चा मंच पर साझा करने हेतु।

Abhilasha ने कहा…

बहुत ही सुन्दर रचना सखी

MANOJ KAYAL ने कहा…

बड़ी ही उम्दा अभिव्यक्ति

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

आपकी फटकार से बादल तो छँट गए लेकिन अब शरद पूर्णिमा का चाँद कहाँ देखें 😄😄
बहुत सुंदर सृजन ।

Sudha Devrani ने कहा…

तहेदिल से धन्यवाद एवं आभार सखी!

Sudha Devrani ने कहा…

अत्यंत आभार एवं धन्यवाद मनोज जी !

Sudha Devrani ने कहा…

शरद पूर्णिमा का चाँद तो लुकाछिपी में गया । पर अब करवाचौथ का भी ना दिखा तो कहीं सब भूख प्यास हड़ताल ना बैठ जायें इसलिए एक फटकार आप भी लगा ही दीजिए, मेरी नहीं तो क्या पता की ही सुन ले ये..हैं न 😁😃
सादर आभार एवं धन्यवाद आपका🙏🙏

कैलाश मण्डलोई ने कहा…

वर्तमान मौसम पर सार्थक रचना

Jyoti Dehliwal ने कहा…

बहुत ही सुंदर रचना, सुधा दी।

Sudha Devrani ने कहा…

दिल से धन्यवाद एवं आभार ज्योति जी !

विश्वमोहन ने कहा…

अद्भुत और नि:शब्द!!!!

विभा रानी श्रीवास्तव ने कहा…

सरकते सरकते ऋतु जून में शीतल हो जाए

सुन्दर रचना

मन की वीणा ने कहा…

निर्मेघ नभ पर शरद पूर्णिमा के चाँद की आलोकिक आभा जो वैभव लिए विचरती है उस को मेघों ने अपने आगोश में लेकर धूसरित कर दिया।
वाह! सुधा जी बहुत ही सुंदर अभिनव प्रस्तुति उलाहना और फटकार दोनों काव्यात्मक लय में , बहुत सुंदर सृजन, काव्यागत सौंदर्य के साथ।
करवा चौथ की हार्दिक शुभकामनाएं 🌷🌷🌷

गोपेश मोहन जैसवाल ने कहा…

सुधा जी, धरती में व्याप्त अनाचार और अव्यवस्था का प्रभाव अब आकाश पर भी पड़ने लगा है.
सब ओर गड़बड़ झाला है.
बेमौसम बरसात हो रही है फिर शरद ऋतु में प्रचंड गर्मी पड़ेगी और वैशाख-जेठ में रजाइयां ओढ़नी पड़ेंगी.

शैलेन्द्र थपलियाल ने कहा…

बहुत सुंदर रचना,
शरद प्रतीक्षारत देहलीज पे
धरणी लज्जित हो बोली,
अब लाज कहां है इसीलिए तो प्रकृति को भी ठीक व्यवहार न रहा। हमें भी वैसा ही वापस मिल रहा है।

Sudha Devrani ने कहा…

हार्दिक धन्यवाद एवं आभार आ.कैलाश जी!

Sudha Devrani ने कहा…

सादर आभार एवं धन्यवाद आ.विश्वमोहन जी !

Sudha Devrani ने कहा…

जी, हालात देखकर सच में ऐसा लग रहा है।
हृदयतल से धन्यवाद एवं आभार आपका ।

Sudha Devrani ने कहा…

हृदयतल से धन्यवाद एवं आभार आ.कुसुम जी !

Sudha Devrani ने कहा…

जी, आ. सर ! सही कहा आपने.. मौसम का ये परिवर्तित रूप ऐसा सोचने को विवश कर रहा है...सादर आभार एवं धन्यवाद आपका ।

Sudha Devrani ने कहा…

सही कहा भाई !
सस्नेह आभार ।

गई शरद आया हेमंत

गई शरद आया हेमंत , हुआ गुलाबी दिग दिगंत । अलसाई सी लोहित भोर, नीरवता पसरी चहुँ ओर । व्योम उतरता कोहरा बन, धरा संग जैसे आलिंगन । तुहिन कण मोत...