सोमवार, 23 मई 2022

आत्महत्या : माँ मेरी भी तो सुन लिया करो !

 

suicide story



"माँ !  मैं बहुत परेशान हूँ , आप आ जाओ ना यहाँ मुझे मिलने, मुझे आपसे बात करनी है" ।

"बेटा परेशानियां तो आती जाती रहती हैं जीवन में , इनसे क्या घबराना । और मैं तेरे ससुराल आकर क्या करूँगी ! तेरे ससुराली मुझे देखकर पता नहीं क्या सोचेंगे, कहीं और न चिढ़ जायें ।  वैसे मैंने पंडित जी से तेरी और दामाद जी की कुण्डली दिखाई ।  कुछ ग्रहदोष हैं तो कल ग्रहशांति के लिए जप करवा रही हूँ, तू चिंता न कर ग्रहशांति के बाद सब ठीक हो जायेगा । सब्र से काम ले" ।

"माँ !  मैं जब भी आपसे बात करती हूँ आप पंडित और ग्रहदोष की बातें करने लगते हो , कभी मेरी भी तो सुन लिया करो ना" !   (माँ की बात बीच में काट कर सुषमा ने नाराज होते हुए कहा और फोन रख दिया)


शीला को उसकी बहुत फिक्र थी परन्तु बेटी के घर का मामला है हमारे हस्तक्षेप से बात और ना बिगड़ जाय, यही सोचकर ना चाहते हुए भी टाल रही थी उसे।

अगले दिन शीला ने मंदिर में  ग्रहशांति की पूजा रखवायी और बेटी के घर की सुख-शांति के लिए उपवास रखकर पूजन में बैठी ही थी कि तभी सुषमा का फोन आया ।

"माँ ! मैं बड़ी मुश्किल से इधर-उधर के बहाने बनाकर घर आई तो आप तो घर पर हैं ही नहीं । माँ प्लीज ! थोड़ी देर के लिए जल्दी से आ जाओ फिर मुझे निकलना है"।

"अरे ! कैसे आऊँ ?  मैं तो पूजा में हूँ और पूजा से बीच में उठना अशुभ होता है बेटा ! और सुन, तू आई क्यों ? वहाँ सब इस बात से और भी नाराज हो जायेंगे तुझसे ।   सुषमा बेटा ! समझदारी से काम ले । इससे पहले कि उन्हें शक हो तू अभी का अभी वापस जा !  मैं पूजा के बाद कॉल करूँगी तुझे ।  ठीक है" । कहकर फोन रखकर शीला फिर पूजा में ध्यान लगाने की कोशिश करने लगी ।

पूजन समाप्ति के साथ ही बेटी की जीवन लीला भी समाप्त हो गयी । उसी साँझ सूचना मिली कि तुम्हारी बेटी ने आत्महत्या कर दी। पंखे से लटकी लाश को पुलिस शिनाख्त के लिए ले जा रही है । तुम लोग आना चाहते हो तो जल्दी आ जाओ ।


21 टिप्‍पणियां:

yashoda Agrawal ने कहा…

सुन लेने से दुविधा दूर हो जाती है
मार्मिक...
सादर...

Kamini Sinha ने कहा…

सादर नमस्कार ,

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (24-5-22) को "ज्ञान व्यापी शिव" (चर्चा अंक 4440) पर भी होगी।
आप भी सादर आमंत्रित है,आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ायेगी।
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कामिनी सिन्हा

कैलाश मण्डलोई ने कहा…

कभी कभी समझ के फेर में बड़ी बड़ी दुर्घटना हो जाती है

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

ओह, बहुत मार्मिक । बेटियों की बात सुननी चाहिए ।
वैसे कई बार बहुत छोटी छोटी बात पर भी बात बढा चढ़ा कर बता दी जाती है । ऐसे मामलों को बहुत धैर्य से ही सुलझाया जा सकता है ।।
विचारणीय लघु कथा ।

Sudha Devrani ने कहा…

जी, यशोदा जी ! सही कहा आपने ...
तहेदिल से धन्यवाद एवं आभार आपका ।

Sudha Devrani ने कहा…

तहेदिल से धन्यवाद एवं आभार कामिनी जी ! मेरी रचना को चर्चा मंच पर स्थान देने हेतु ।

Sudha Devrani ने कहा…

जी, सही कहा आपने समझ के फेर ....
अत्यंत आभार एव धन्यवाद आपका।

Sudha Devrani ने कहा…

जी, सही कहा आपने...बात सुनने समझने से शायद उसके मन की दुविधा दूर होती या फिर उसे मानसिक संबल ही मिल जाता ।
तहेदिल से धन्यवाद एवं आभार आपका ।

Dr.Rashmi Thakur ने कहा…

Come across this kind of news often in the newspapers. It's tragic that parents ,instead of addressing the issue take recourse to astrology and puja paath.
Nice story highlighting this shortcoming in our society.

Onkar Singh 'Vivek' ने कहा…

मार्मिक और सोचने को विवश करती अभिव्यक्ति!!!!

आलोक सिन्हा ने कहा…

बहुत बहुत मार्मिक |सत्य घटना जैसी प्रस्तुति | शुभ कामनाएं |

Alaknanda Singh ने कहा…

राम राम सुधा जी, समझ नहीं आ रहा कि इसे कहानी समझूं या उस बेटी की तरह ही और ना जाने कितनी बेटियों की दास्‍तां...या उन मांओं की लापरवाह सोच...बहरहाल आपकी ये रचना इतनी उत्‍कृष्‍ट है कि नि:शब्‍द कर दिया है...बहुत खूब हकीकत को दर्शाती कहानी..

दीपक कुमार भानरे ने कहा…

अत्यंत मार्मिक रचना , आदरणीय ।

Jyoti Dehliwal ने कहा…

काश, माँ नेबेटी की बात सूं ली होती। अक्सर ऐसा ही होता है। अंधश्रद्धा के चलते कई माँओ के हाथों ऐसी गलतियां हो रही है। दिल को छूती सुंदर रचना।

MANOJ KAYAL ने कहा…

बहुत ही मार्मिक सुंदर लघु कथा

कविता रावत ने कहा…

शादी के समय कहते हैं कि दो घर एक हो गए हैं, लेकिन आज भी यह केवल कहने वाली बात है, बहुत कम ही देखने को मिलता है आज के समय में कोई एक दूसरे को समझते होंगे। जब अपने ही अपनों के नहीं सुनेंगे और दूसरी ओर उसका उपाय ढूंढेंगे तो यही हस्र होना बाकी रह जाता है। समय पर जो न चेता तो फिर कभी वह समय नहीं आता है।
मर्मस्पर्शी प्रस्तुति

जयकृष्ण राय तुषार ने कहा…

बहुत ही मार्मिक कहानी.

Amrita Tanmay ने कहा…

जब माँ ही कमजोर होती है तो बेटियों को कौन सशक्त बनाएगा? उसपर ये क्रुर समाज तो फांसी का फंदा है ही।

रेणु ने कहा…

बहुत हृदयविदारक कथा है प्रिय सुधा जी |कुण्डली,गृहदोष का रोना लेकर बैठे लोग ये नहीं समझते समस्त ग्रह परिवार हमारे रिश्तों में निहित है |बेटियों के भावी जीवन को कुंडली के अनुसार जोड़ने वाले लोगों को विशेषकर माँओं को ये समझना होगा कि बेटियों का भविष्य सम्मान देने वाले लोगों से जोड़ें ना कि कागज़ी कुंडली के आधार पर | उस पर भी जब बेटी मानसिक या पारिवारिक संकट में हो उसकी बात सुनें |

संजय भास्‍कर ने कहा…

बहुत ही मर्मस्पर्शी भावनाओं में रची-बसी मार्मिक कहानी के लिए आपको हार्दिक बधाई।

डॉ 0 विभा नायक ने कहा…

मर्मस्पर्शी! आपकी नई सोच की शेफालिका उवाच को प्रतीक्षा है।

सादर,
डॉ विभा नायक

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