मंगलवार, 8 दिसंबर 2020

अपनों को परखकर....



men walking on a lonely road ;blur memory


 अपनों को परखकर यूँ परायापन दिखाते हो 

पराए बन वो जाते हैं तो आंसू फिर बहाते हो

न झुकते हो न रुकते क्यों बातें तुम बनाते हो 

उन्हें नीचा दिखाने को खुद इतना गिर क्यों जाते हो

पराये बन वो जाते हैं तो आँसू फिर बहाते हो


अपनों को परखकर......


मिले रिश्ते जो किस्मत से निभाना है धरम अपना

जीत लो प्रेम से मन को यही सच्चा करम अपना

तुम्हारे साथ में वो हैं तो हक अपना जताते हो

पराये बन वो जाते हैं तो आँसू फिर बहाते हो।


अपनों को परखकर ......


कोई रिश्ता जुड़ा तुमसे निभालो आखिरी दम तक

सुन लो उसके भी मन की, सुना लो नाक में दम तक

बातें घर की बाहर कर, तमाशा क्यों बनाते हो

पराये बन वो जाते हैं तो आँसू फिर बहाते हो


अपनों को परखकर......


ये घर की है तुम्हारी जो, उसे घर में ही रहने दो

कमी दूजे की ढूँढ़े हो, कमी अपनी भी देखो तो

बही थी प्रेम गंगा जो, उसे अब क्यों सुखाते हो

पराये बन वो जाते हैं तो आँसू फिर बहाते हो


अपनों को परखकर....


चले घर त्याग करके जो, तो जाने दो न रोको तुम

जहाँ खुश हैं रहें जाकर, न जाके उनको टोको तुम

क्यों जाने वालों को घर की राह फिर फिर दिखाते हो

पराये बन वो जाते हैं तो आँसू फिर बहाते हो


 अपनों को परखकर....


            चित्र साभार गूगल से...

48 टिप्‍पणियां:

Virendra Singh ने कहा…

बहुत बढ़िया सुधाजी। आइना दिखाती सार्थक रचना के लिए आपको बधाई।

गोपेश मोहन जैसवाल ने कहा…

जनाज़ा रोक कर मेरा वो इस अंदाज़ से बोले
गली हमने कहा था तुम तो दुनिया छोड़ जाते हो (अज्ञात)

Jyoti Dehliwal ने कहा…

ये घर की है तुम्हारी जो, उसे घर में ही रहने दो

कमी दूजे की ढूँढ़े हो, कमी अपनी भी देखो तो

बही थी प्रेम गंगा जो, उसे अब क्यों सुखाते हो

पराये बन वो जाते हैं तो आँसू फिर बहाते हो

बहुत सुंदर अभिव्यक्ति, सुधा दी।

विश्वमोहन ने कहा…

वाह! 'अपनों को परखकर यूँ परायापन दिखाते हो'।बहुत सुंदर।

Sudha Devrani ने कहा…

हृदयतल से धन्यवाद आ.विरेन्द्र जी!
सादर आभार।

Sudha Devrani ने कहा…

सादर आभार एवं धन्यवाद सर!

Sudha Devrani ने कहा…

अत्यंत आभार ज्योति जी!

Sudha Devrani ने कहा…

हार्दिक धन्यवाद आ.विश्वमोहन जी!

शुभा ने कहा…

वाह!सुधा जी ,बहुत सुंदर भावाभिव्यक्ति ।

आलोक सिन्हा ने कहा…

बहुत बहुत सुन्दर सराहनीय प्रस्तुति

दिव्या अग्रवाल ने कहा…

आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" गुरुवार 10 दिसम्बर 2020 को साझा की गयी है.............. पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

Sudha Devrani ने कहा…

सादर धन्यवाद शुभा जी!

Sudha Devrani ने कहा…

अत्यंत आभार आलोक जी!

Sudha Devrani ने कहा…

पाँच लिंको के प्रतिष्ठित मंच पर मेरी रचना साझा करने हेतु तहेदिल से धन्यवाद दिव्या जी!
सादर आभार।

Sudha Devrani ने कहा…

सहृदय धन्यवाद कामिनी जी!सारगर्भित प्रतिक्रिया से उत्साहवर्धन हेतु...
सस्नेह आभार।

Meena Bhardwaj ने कहा…

सादर नमस्कार,
आपकी प्रविष्टि् की चर्चा शुक्रवार ( 11-12-2020) को "दहलीज़ से काई नहीं जाने वाली" (चर्चा अंक- 3912) पर होगी। आप भी सादर आमंत्रित है।
धन्यवाद.

"मीना भारद्वाज"

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

सुन्दर सृजन

Sweta sinha ने कहा…

सारगर्भित अति यथार्थ परक रचना प्रिय सुधा जी।
बेहतरीन अभिव्यक्ति के लिए साधुवाद।
सादर।

Sudha Devrani ने कहा…

तहेदिल से धन्यवाद एवं आभार मीना जी मेरी रचना को प्रतिष्ठित चर्चा मंच पर साझा करने हेतु....
सस्नेह आभार।

Sudha Devrani ने कहा…

हार्दिक धन्यवाद एवं आभार आ.जोशी जी!

Sudha Devrani ने कहा…

अत्यंत आभार एवं धन्यवाद प्रिय श्वेता जी!उत्साहवर्धन हेतु....।

Shantanu Sanyal शांतनु सान्याल ने कहा…

चले घर त्याग करके जो, तो जाने दो न रोको तुम

जहाँ खुश हैं रहें जाकर, न जाके उनको टोको तुम - - सुन्दर सृजन।

Dr (Miss) Sharad Singh ने कहा…

मिले रिश्ते जो किस्मत से निभाना है धरम अपना
जीत लो प्रेम से मन को यही सच्चा करम अपना

बहुत सुंदर भाव...
बहुत सुंदर रचना ...

Jigyasa Singh ने कहा…

चले घर त्याग करके जो, तो जाने दो न रोको तुम

जहाँ खुश हैं रहें जाकर, न जाके उनको टोको तुम

क्यों जाने वालों को घर की राह फिर फिर दिखाते हो

पराये बन वो जाते हैं तो आँसू फिर बहाते हो
..सारगर्भित पंक्तियाँ..।भावपूर्ण सुंदर रचना..।


Dr Varsha Singh ने कहा…

चले घर त्याग करके जो, तो जाने दो न रोको तुम
जहाँ खुश हैं रहें जाकर, न जाके उनको टोको तुम
क्यों जाने वालों को घर की राह फिर फिर दिखाते हो
पराये बन वो जाते हैं तो आँसू फिर बहाते हो।।

बढ़िया कविता
साधुवाद,
डॉ. वर्षा सिह

Anuradha chauhan ने कहा…

वाह बहुत सुंदर रचना।

Sudha Devrani ने कहा…

अत्यंत आभार एवं धन्यवाद आदरणीय सर!

Sudha Devrani ने कहा…

सहृदय धन्यवाद एवं आभार आ.शरद सिंह जी!

Sudha Devrani ने कहा…

हार्दिक धन्यवाद आ. जिज्ञासा जी!
ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

Sudha Devrani ने कहा…

हृदयतल से धन्यवाद आ.वर्षा जी!
सादर आभार।

Sudha Devrani ने कहा…

सहृदय धन्यवाद सखी!

Onkar ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक ने हटा दिया है.
Onkar ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति

Sudha Devrani ने कहा…

अत्यंत आभार एवं धन्यवाद आ.ओंकार जी!

Anita ने कहा…

भावपूर्ण रचना

मन की वीणा ने कहा…

बहुत सुंदर और गहन बातें कही हैं आपने कविता के माध्यम से, बिल्कुल सदुपदेशों सी ।
यथार्थ पर सार्थक भाव चिंतन।
अभिनव सृजन।

Sudha Devrani ने कहा…

सहृदय धन्यवाद कुसुम जी!
सस्नेह आभार आपका।

यशवन्त माथुर (Yashwant Raj Bali Mathur) ने कहा…

लाजवाब

hindiguru ने कहा…

बहुत सुंदर

Sudha Devrani ने कहा…

अत्यंत आभार एवं धन्यवाद आ.माथुर जी!

MANOJ KAYAL ने कहा…

बहुत सुंदर

Sudha Devrani ने कहा…

अत्यंत आभार एवं धन्यवाद मनोज जी!

जितेन्द्र माथुर ने कहा…

इतना उत्कृष्ट काव्य-सृजन सुधा जी ! प्रशंसा के लिए उपयुक्त शब्द ही नहीं मिल रहे ।

Sudha Devrani ने कहा…

अत्यंत आभार एवं धन्यवाद आ.माथुर जी

दिगम्बर नासवा ने कहा…

इसलिए शायद अपनों को कभी नहीं परखना चाहिए ... लगे भी तो भूल जाना चाहिए पर परखने से रिश्ते टूट जाते हैं ...
घर की बात चार दिवारी से क्यों निकले ... निकली तो अनेक रूप ले लेती है ...
हर छंद नयी सीख, एक आधार लिए है जो बहुत ज़रूरी है जीवन में ... सुन्दर भावपूर्ण रचना ...

Sudha Devrani ने कहा…

हार्दिक धन्यवाद आ.नासवा जी!आपकी अनमोल प्रतिक्रिया हमेशा उत्साह द्विगुणित कर देती है...
सादर आभार।

Amrita Tanmay ने कहा…

इतनी बात जो समझ में आ जाए तो जीवन अर्थपूर्ण हो जाए ।

Sudha Devrani ने कहा…

जी,सही कहा आपने....अत्यंत आभार आपका।

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