आओ बच्चों ! अबकी बारी होली अलग मनाते हैं

आओ बच्चों ! अबकी बारी होली अलग मनाते हैं जिनके पास नहीं है कुछ भी मीठा उन्हें खिलाते हैं । ऊँच नीच का भेद भुला हम टोली संग उन्हें भी लें मित्र बनाकर उनसे खेलें रंग गुलाल उन्हें भी दें छुप-छुप कातर झाँक रहे जो साथ उन्हें भी मिलाते हैं जिनके पास नहीं है कुछ भी मीठा उन्हें खिलाते हैं । पिचकारी की बौछारों संग सब ओर उमंगें छायी हैं खुशियों के रंगों से रंगी यें प्रेम तरंगे भायी हैं। ढ़ोल मंजीरे की तानों संग सबको साथ नचाते हैं जिनके पास नहीं है कुछ भी मीठा उन्हें खिलाते हैं । आज रंगों में रंगकर बच्चों हो जायें सब एक समान भेदभाव को सहज मिटाता रंगो का यह मंगलगान मन की कड़वाहट को भूलें मिलकर खुशी मनाते हैं जिनके पास नहीं है कुछ भी मीठा उन्हें खिलाते हैं । गुझिया मठरी चिप्स पकौड़े पीयें साथ मे ठंडाई होली पर्व सिखाता हमको सदा जीतती अच्छाई राग-द्वेष, मद-मत्सर छोड़े नेकी अब अपनाते हैं जिनके पास नहीं है कुछ भी मीठा उन्हें खिलाते हैं । पढ़िए एक और रचना इसी ब्लॉग पर ● बच्चों के मन से
आपकी लिखी रचना सोमवार. 17 जनवरी 2022 को
जवाब देंहटाएंपांच लिंकों का आनंद पर... साझा की गई है
आप भी सादर आमंत्रित हैं।
सादर
धन्यवाद।
हृदयतल से धन्यवाद आ.संगीता जी! मेरी रचना के चयन हेतु।
हटाएंसादर आभार।
हुतात्माओं के परिवार की दशा पर सटीक और हृदय स्पर्शी सृजन किया है आपने सुधा जी।
जवाब देंहटाएंआंखे नम कर गया आपका दर्द में डूबा सार्थक सृजन।
जिस दर्द को आपने शब्द-भाव दिया है, कल्पना कर के रोम-रोम सिहर जाता है । आह!
जवाब देंहटाएंवीरों के वीर गाथाओं में
जवाब देंहटाएंगुम उनके अपनों का दर्द
आँसू,सिसकी,तड़प से परे
मातृभूमि के लिए उनके फर्ज़
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सुधा जी,
कुछ अनकहे दर्द को आपने शब्द दिया जिसे वीरों के शहादत
की ओजमयी गाथाओं के महिमामंडन में अनदेखा कर दिया जाता है।
...
सस्नेह।
बहुत सुंदर मन को छूती हुई अभिव्यक्ति
जवाब देंहटाएंप्रिय सुधा जी, शहीद की चिता में उसके साथ समस्त परिवार के सपने भी जलकर राख हो जाते हैं। उनके परिवारों की व्यथा शब्दों में कही या लिखी नहीं जा सकती। आपने इस व्यथा शब्दांकित कर आपने बहुत मार्मिक सृजन किया गया। सच में एक अपार संभावनाएं लिए युवा जब अकाल मृत्युपथ की ओर अग्रसर होते हैं तो वह समय उनके अबोध परिवार के लिए बहुत दुभर होता होगा। मार्मिक रचना के लिए हार्दिक आभार।
जवाब देंहटाएंतहेदिल से धन्यवाद प्रिय श्वेता आज के विशेषांक में मेरी रचना साझा करने हेतु ।
जवाब देंहटाएंसस्नेह आभार ।
वाह
जवाब देंहटाएंअमर बलिदानियों के अपनों की पीड़ा को अभिव्यक्त करती ये मार्मिक रचना वेदना का दस्तावेज है। आज फिर से पढकर मन भावुक हो गया।हमारे बलिदानियों को विनम्र श्रद्धांजलि और कोटि -कोटि नमन 🙏
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