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जुलाई, 2023 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

छटाँक भर का

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  "ओ गॉड ! ये तो मेरे साथ चीटिंग है " ! एयरपोर्ट से बाहर निकलते बेटे के मुँह से ऐसे शब्द सुनते ही शर्मा जी और उनकी पत्नी एक दूसरे का मुँह ताकने लगे । बेटे से मिलने का उत्साह जैसे कुछ ठंडा सा पड़ गया ।   सोचने लगे कहाँ तो हमें लगा कि इतने समय बाद हमें देखकर बेटा खुश होगा पर ये तो भगवान को ही कोसने लगा है" । तभी बेटा आकर दोनों के पैर छूकर गले मिला और फटाफट सामान को गाड़ी में रखवा कर तीनों जब बैठ गए तब पापा ने चुटकी लेते हुए कहा , " क्यों रे ! किसका इंतजार था तुझे ? कौन आयेगा तुझे लेने यहाँ..?.. हैं ?... अच्छा आज तो वेलेंटाइन डे हुआ न तुम लोगों का ! कहीं कोई दोस्त तो नहीं आयी है लेने ! हैं ?..  बता दे "? बेटा चिढ़ते हुए - "मम्मी ! देख लो पापा को ! कुछ भी बोल देते हैं" । "सही तो कह रहे तेरे पापा" - मम्मी भी मुस्कुराते हुए बोली,  "हमें देखकर भगवान को जो कोसने लगा तू !  क्या कह रहा था ये- " ओ गॉड ! ये तो मेरे साथ चीटिंग है " दोनों ने एकसाथ दोहराया और हँसने लगे । "शिट ! तो आप लोगों ने सुन लिया"  ? "बेवकूफ ! गॉड ने हमें भी...

दुखती रगों को दबाते बहुत हैं

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  दुखती रगों को दबाते बहुत हैं, कुछ अपने, दुखों को बढ़ाते बहुत हैं । सुनकर सफलता मुँह फेरते जो, खबर हार की वो फैलाते बहुत हैं । अंधेरों में तन्हा डरा छोड़़ जाते, उजालों में वे साथ आते बहुत हैं । भूखे से बासी भी भोजन छुपाते, मनभर को छक-छक खिलाते बहुत हैं । बनी बात सुनने की फुर्सत नहीं है, बिगड़ी को फिर-फिर दोहराते बहुत हैं । पूछो तो कुछ भी नहीं जानते हैं , भटको तो ताने सुनाते बहुत है । बड़े प्यार से अपनी नफरत निभाते, समझते नहीं पर समझाते बहुत हैं । दिखाना है इनको मंजिल जो पाके, इसी होड़ में कुछ, कमाते बहुत हैं । तानों से इनके आहत ना हों तो, अनजाने ही दृढ़ बनाते बहुत हैं । पढ़िए रिश्तों पर आधारित एक और रचना खून के हैं जो रिश्ते बदलते नहीं

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