हाँ मैं नादान हूँ मूर्ख भी निपट , माना मैंंने अपनी नादानियाँ कुछ और बढ़ा देती हूँ । तू जो परवाह कर रही है सदा से मेरी, खुद को संकट में कुछ और फंसा लेती हूँ । वक्त बेवक्त तेरा साथ ना मिला जो मुझे, अपने अश्कों से तेरी दुनिया बहा देती हूँ । सबकी परवाह में जब खुद को भूल जाती हूँ , अपनी परवाह मेंं तुझको करीब पाती हूँ, मेरी फिकर तुझे फिर और क्या चाहना है मुझे, तेरी ही ओट पा मैं मौत से टकराती हूँ । मैंंने माना मेरे खातिर खुद से लड़ते हो तुम , विधना की लिखी तकदीर बदलते हो तुम, मेरी औकात से बढ़कर ही पाया है मैंंने, सबको लगता है जो मेरा, सब देते हो तुम। कभी कर्मों के फलस्वरूप जो दुख पाती हूँ जानती हूँ फिर भी तुमसे ही लड़ जाती हूँ तेरे रहमोकरम सब भूल के इक पल भर में तेरे अस्तित्व पर ही प्रश्न मैं उठाती हूँ मेरी भूले क्षमा कर माँ ! सदा यूँ साथ देते हो मेरी कमजोर सी कश्ती हमेशा आप खेते हो कृपा करना सभी पे यूँ सदा ही मेरी अम्बे माँ ! जगत्जननी कष्टहरणी, सभी के कष्ट हरते हो ।। चित्र ; साभार गूगल से...