संदेश

जनवरी, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

लोहड़ी मनाएं

चित्र
चलो आओ दोस्तों मिलकर लोहड़ी मनाएं हम सोसायटी वाले हैं चलो सर्वधर्म लोहड़ी मनाकर भाईचारा बढ़ाएं ! पड़ौसी कौन है ये तो हम नहीं जानते, अगल-बगल सोसायटी में किसी को नहीं पहचानते, पर इसमें क्या ?   चलो थोड़ा हाय हैलो ही कर आयें ! हम सोसायटी वाले हैं सर्वधर्म लोहड़ी मनाएं ! हाँ आज पूरा दिन तेज बारिश और हाड़कंपाती ठंड है दिन भर ब्रांडेड महंगे ऊनी कपड़ों से अपना तो जिस्म बंद है सोसायटी मेंबर्स से अच्छी रकम वसूली है डीजे नाईट है.....हम आधुनिक हैं सो वन पीस जरूरी है..... कहाँ पता चलता है कि अपने पैर वन पीस में ठंड से कंपकंपाएं या डीजे की थाप पर थिरकाएं आओ दोस्तों हम तो सर्वधर्म लोहड़ी मनाएं ! डीजे के कानफोड़ू संगीत से अपनी सोसायटी में रौनक बढ़ी है क्या फर्क पड़ता है,अगर छात्रों की पढ़ाई में कुछ अड़चन पड़ी है हमें क्या....किसी का बीमार बुजुर्ग कानफोड़ू संगीत से परेशान है.... ये डीजे नाईट तो अपनी सोसायटी की शान है पुरातनता को गाँँव में छोड़ हम कुछ आधुनिक हो जाएं चलो आओ दोस्तों मिलकर लोहड़ी मनाएं।                     ...

घर से निकलते ही......

चित्र
घर से निकलते ही ठण्ड  से ठिठुरते ही दिखता है अपना शहर कुछ भीगे भागे से कुछ हैं अभागे से सहते हैं ठंड का कहर आसमां को तकते हैं  दुआ फिर ये करते हैं कुछ धूप आये नजर घर से निकलते ही ठंड से ठिठुरते ही दिखता है अपना शहर     'एक माँ' पतली सी धोती में शिशु को छुपाती वो बेबस सी आयी नजर बुझता अलाव उसका फूंकनी से फूंके वो रो - रो के करती बसर "ये सर्द निकले तो कुछ कर ही लूँगी मैं सह ले लला ! इस पहर" पतली सी धोती में शिशु को छुपाती वो बेबस सी आयी नजर.... ' नन्हा छोटू ' खेलने की उमर में ही डिलीवरी करता वह सुबह-शाम यूँ घर-घर सबके ही सामने यूँ डपट दिया जाता वो दिखता तो है बेफिकर आँखें सब कहती हैंं झुकी -झुकी रहती हैं कितना बने वो वजर खेलने की उमर में ही डिलीवरी करता वो सुबह-शाम यूँ घर-घर 'एक गरीब' टूटे से सपने है बदहाल अपने हैं पर मन में आशा की लहर कंपकंपाती शीत में वो तार-तार वसन पहने शीत-बाण से है बेफिकर दिनभर कमरकस के दिहाड़ी कमाता वो करता गुजर 'औ' बसर है मन में आशा की लहर।                    चित...

फ़ॉलोअर

लेबल

कविता -हास्यव्यंग1 कहानी18 कह़ानी1 कहानीकविता1 कांवड़1 काव्य रचना1 किसान1 कुण्डलिया छंद5 कुण्डलिया छन्द3 कृत्रिम बुद्धिमत्ता1 गजल10 गढ़वाली कविता एवं उसका हिन्दी रूपांतरण1 गढ़वाली गीत1 गणपति वंदना1 गणेश भक्ति1 गर्मी पर कविता1 गर्मी पर बाल कविता1 गीत16 गीतात्मक कविता1 गुरु महिमा कविता1 गुरु महिमा पर दोहा मुक्तक1 गृहस्थ जीवन1 घरेलू हिंसा1 चिड़िया1 चौपाई | पावस पर कविता | बरसात पर कविता | सावन | शिव भक्ति1 छंद कविता1 जल संरक्षण पर कविता1 जलवायु परिवर्तन ग्लोबल वार्मिंग1 जीवन की समझ सकारात्मक सोच1 जीवन की सीख1 जीवन दर्शन3 जैसे को तैसा1 डिजिटल जुड़ाव1 तकनीक1 त्याग1 देशभक्ति1 दोहा मुक्तक2 दोहा-मुक्तक1 दोहे7 ध्यान1 नवगीत15 नारी सम्मान1 नारी सशक्तिकरण1 पकौड़े1 परिवार1 पाँच लिंकों का आनंद स्थापना दिवस1 पारिवारिक कहानी2 पारिवारिक रिश्ते1 पारिवारिक लघुकथा1 पारिवारिक संवेदना1 पावस पर कविता1 पुस्तक समीक्षा1 प्रकृति3 प्रकृति कविता3 प्राणायाम1 प्रार्थना5 प्रेणादायक आलेख1 प्रेम कविता1 प्रेरक लघुकथा1 प्रेरणादायक कहानी1 प्रेरणादायक हिंदी कविता2 बरसात पर कविता2 बारिश पर गीत1 बाल कविता3 बाल मन1 बुज़ुर्ग1 भक्ति कविता5 भक्ति रचना1 भगवान गणेश1 भगवान शिव3 भावनात्मक1 भावनात्मक रचना1 मन1 मनहरण घनाक्षरी2 मनहरण घनाक्षरी छंद5 महादेव1 महिला सशक्तिकरण1 महिला सशक्तिकरण पर प्रेरणादायक कहानी।1 माँ का त्याग1 माँ का प्रेम1 माँ की ममता1 माँ-बेटी1 माता पिता1 माता-पिता1 मानवीय संवेदना1 मुक्तक4 मुहावरे पर आधारित लघुकथा1 मोबाइल की लत तकनीक डिजिटल जीवन1 योग1 रक्षाबंधन1 राम भक्ति4 रिश्ते3 रोला छंद2 लघु कथा3 लघु कहानी6 लघुकथा20 लेख5 वर्षा ऋतु3 वसंत पर कविता1 विवाह1 व्यंग कविता1 व्यंग लेख1 शरद ऋतु2 शराब की लत1 शिक्षक दिवस1 शिक्षा -परीक्षा1 शिक्षा-परीक्षा1 शिव भक्ति4 शिव महिमा1 शुभकामना कविता1 श्रीराम2 संघर्ष1 संत1 संवेदनाएँ1 संस्मरण2 संस्मरणात्मक लेख1 सकारात्मक सोच2 सच्ची घटना1 सद्गुरु1 समय1 समीक्षा2 सामाजिक कहानी1 सामाजिक लेख1 सावन3 सावन पर कविता1 साहित्य1 सैनिक1 स्वास्थ्य1 हाइबन1 हायकु3 हास्यव्यंग कविता1 हास्यव्यंग लघुकथाएं1 हिंदी कविता10 हिंदी कहानी1 हिंदी दोहे1 हिंदी भावनात्मक कहानी1 हिंदी लघुकथा प्रेरक लघुकथा रिश्ते मनमुटाव संवाद जीवन दर्शन1 हिंदी लघुकथा माँ का त्याग प्रेरक लघुकथा प्रेरणादायक कहानी1 हिंदी लेख1 हिंदी साहित्य1
ज़्यादा दिखाएं