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मंगलमय नववर्ष हो

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  नववर्ष की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं बीत गया पच्चीस अब, बिसरें बीती बात । मंगलमय नववर्ष हो, सुखमय हो दिन रात। शुभता का संदेश ले,  आएगा  छब्बीस । दुर्दिन होंगे दूर अब , सुख की हो बरसात ।। स्वागत आगत का करें , अभिनंदन कर जोर । सबको दे शुभकामना , आये स्वर्णिम भोर । घर आँगन खुशियाँ भरे, विपदा भागे दूर, सुख समृद्धि घर में बसे, खुशहाली चहुँओर ।। हार्दिक शुभकामनाओं के साथ एक और रचना निम्न लिंक पर ●  और एक साल बीत गया

सपने जो आधे-अधूरे

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कुछ सपने जो आधे -अधूरे यत्र-तत्र बिखरे मन में यूँ जाने कब होंगे पूरे .....? मेरे सपने जो आधे -अधूरे            दिन ढ़लने को आया देखो        सांझ सामने आयी.....        सुबह के सपने ने जाने क्यूँ        ली मन में अंगड़ाई...... बोला; भरोसा था तुम पे तुम मुझे करोगे पूरा..... देख हौसला लगा था ऐसा कि छोड़ न दोगे अधूरा....           डूबती आँखें हताशा लिए           फिर वही झूठी दिलाशा लिए           चंद साँसों की आशाओं संग           वह चुप फिर से सोया......           देख दुखी अपने सपने को           मन मेरा फिर-फिर रोया..... सहलाने को प्यार से उसको जो अपना हाथ बढ़ाया.... ढ़ेरों अधूरे सपनों की फिर गर्त में खुद को पाया......          हर पल नित नव मौसम में          सपने जो मन में सजाये....

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