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मोबाइल फोन: सुविधा या लत? | मोबाइल के फायदे और नुकसान | हिंदी लेख

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 परिचय आधुनिक युग में विज्ञान का एक अद्भुत और महत्त्वपूर्ण उपहार मोबाइल फोन है। सुबह आँख खुलने से लेकर रात को विश्राम करने तक यह हमारे जीवन का लगभग अभिन्न साथी बन चुका है। जहाँ एक ओर इसने हमारे अनेक कार्यों को सरल बनाया है, वहीं दूसरी ओर इसका अत्यधिक उपयोग कई नई समस्याओं का कारण भी बन रहा है। प्रस्तुत लेख में मोबाइल फोन की उपयोगिता के साथ-साथ इसकी लत से होने वाले दुष्प्रभावों पर चर्चा की गई है।                                आज मोबाइल फोन ने पूरी दुनिया को मानो हमारी मुट्ठी में समेट दिया है। कुछ दशक पहले जिन कार्यों के लिए घंटों या कई दिनों का समय लगता था, वे आज कुछ ही क्षणों में पूरे हो जाते हैं। यह एक ऐसी तकनीकी सुविधा है जिसने मनुष्य के जीवन को पहले की अपेक्षा कहीं अधिक सरल और सुविधाजनक बना दिया है। किसी से तुरंत संपर्क करना हो, पढ़ाई करनी हो, बैंकिंग का कार्य हो या मनोरंजन—अनेक कार्य अब एक ही मोबाइल फोन से सहजता से पूरे हो जाते हैं। यही कारण है कि आज यह बच्चों से लेकर बुज़ुर्गों तक, हर आयु वर...

बेरोजगारी : "एक अभिशाप"

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   नवयुवा अपने देश के,     पढे-लिखे ,डिग्रीधारी     सक्षम,समृद्ध, सुशिक्षित      झेल रहे बेरोजगारी।                                                            कर्ज ले,प्राप्त की उच्च शिक्षा,                                अब सेठजी के ताने सुनते।                                परेशान ये मानसिक तनाव से,                                 आत्महत्या के रास्ते ढूँढते।      माँ,बहनों के दु:ख जो सह न सके,  वे अभागे गरीबी मिटाने के वास्ते, परचून की दुकान पर मिर्ची तोलते। तो कुछ सैल्समैन बन गली-गली डोलते।     ...

नारी - अबला नहीं

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आभूषण रूपी बेड़ियाँ पहनकर... अपमान, प्रताड़ना का दण्ड, सहना नियति मान लिया... अबला बनकर निर्भर रहकर, जीना है यह जान लिया.... सदियों से हो रहा ये शोषण, अब विनाश तक पहुँच गया । "नर-पिशाच" का फैला तोरण, पूरे समाज तक पहुँच गया ।। अब वक्त आ गया वर्चस्व करने का, अन्धविश्वाश ,रूढिवादिता ,कुप्रथाओं, से हो रहे विनाश को हरने का । हाँ ! वक्त आ गया अब पुन:  शक्ति रूप धारण करने का । त्याग दो ये बेड़ियाँ तुम, लौहतन अपना बना दो ! थरथराये अब ये दानव... शक्तियां अपनी जगा दो ! लो हिसाब हर शोषण का उखाड़ फेंको अब ये तोरण ! याद आ जाए सभी को, रानी लक्ष्मीबाई का युद्ध-भीषण । उठो नारी ! आत्मजाग्रति लाकर, आत्मशक्तियाँ तुम बढ़ाओ ! आत्मरक्षक  स्वयं बनकर  निर्भय  निज जीवन बनाओ ! शक्ति अपनी तुम जगाओ !          .                   - सुधा देवरानी

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