धन्य हुए योगिराज, बनाई पावन मूरत| राम भक्ति पर कुण्डलिया छंद
परिचय
अयोध्या में श्रीराम के विराजने की भावभूमि और रामभक्ति से उपजे भावों ने इस कुण्डलिया छंद को जन्म दिया। श्रीराम की मनोहारी छवि और भक्तिभाव को शब्दों में पिरोने का यह मेरा एक प्रयास है। रचना में राम की सुंदर मूरत के साथ निष्काम कर्म और हृदय में राम के वास की भावना को भी स्वर देने का प्रयास किया है।

मूरत अद्भुत राम की, श्यामल सुन्दर रुप ।
स्मित अधर सरसिज नयन,शोभा अतुल अनूप ।
शोभा अतुल अनूप , वसन पीतांबर सोहे ।
गल भूषण बनमाल, छवि आलोक मनमोहे ।
निरखि सुधा सुध भूलि, मनोहर श्यामल सूरत।
धन्य हुए योगिराज, बनाई पावन मूरत ।
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राम विराजे अवधपुरी, मची देश में धूम ।
राम राम जपते सभी, नाच रहे हैं झूम ।
नाच रहे हैं झूम, लगी गणतंत्र में झाँकी ।
राम हि बस देखें सुने, भक्ति राम की आँकी ।
कहे सुधा सुन मीत,भक्ति का डंका बाजे ।
कर्म करें निष्काम, हृदय में राम विराजे ।
निष्कर्ष
श्रीराम की भक्ति से जुड़े ये भाव मेरे लिए केवल काव्य-पंक्तियाँ नहीं, बल्कि मन में बसे विश्वास और आस्था की अनुभूति हैं। उनकी सुंदर मूरत और मर्यादित जीवन का स्मरण मन को सहज ही भक्ति और सकारात्मक भावों से भर देता है।
✨धन्यवाद🙏
रामभक्ति से जुड़े मेरे एक अन्य प्रयास को भी यहाँ पढ़ा जा सकता है—
● राम एक संविधान | मनहरण घनाक्षरी छंद
● आज प्राण प्रतिष्ठा का दिन है
आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में" शनिवार 27 जनवरी 2024 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद! !
जवाब देंहटाएंजय श्रीराम बहुत ही सुन्दर सार्थक और मनभावन रचना सखी
जवाब देंहटाएंजय श्री राम
जवाब देंहटाएंवाह
जवाब देंहटाएंनिरखि सुधा सुध भूलि, मनोहर श्यामल सूरत।
जवाब देंहटाएंधन्य हुए योगिराज, बनाई पावन मूरत ।
सचमुच अद्भभुत सृजन किया है मूर्तिकार ने
बहुत ही सुन्दर सृजन सुधा जी 🙏
जय श्री राम 🙏
वाह सुधा जी, एक अद्भुत रचना...वाह..क्या खूब कहा कि -
जवाब देंहटाएंगल भूषण बनमाल, छवि आलोक मनमोहे ।
निरखि सुधा सुध भूलि, मनोहर श्यामल सूरत।
#जयश्रीराम
कमाल के भाव … स्वतः मन में उपज रहे हैं भाव है राम जी की …
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