अहा ! कितने व्यूअर् होंगे !
अपनी चादर में पैर रुकते नहीं जमाने के ऐसे फैला कि हक उसी का है । चुप है दूजा कि छोड़ रहने दो, कलह न हो वो तो निपट कायर ही समझ बैठा है। शान्ति से शान्ति की वार्ता अगर चाहे कोई गीदड़ भभकी से भय बनाके ऐसे ऐंठा है। शेर कब तक सहे गीदड़ की ये ललकार आखिर एक गर्जन से ही लाचार छुपा दुबका है। करें तो क्या करें बिल में छुपे इन जयचन्दों का कहीं अर्जुन भी वही प्रण लिए ऐंठा हैं। तमाशा देखने को हैं कितने आतुर देखो ! मुँह में राम बगल में छुरी दबा के बैठा है। मदद की गुहारें भी हवा में दफन होती हैं यहाँ इयरफोन में सुनने लायक ही कौन रहता है । महाभारत हुआ तो अहा ! कितने 'व्यूअर' होंगे ! कलयुगी व्यास अब वीडियो बनाने बैठा है।