माँ का 'बी पॉजिटिव' मंत्र | प्रेरक कहानी
परिचय :- जीवन में नकारात्मक लोगों, आलोचनाओं और विपरीत परिस्थितियों से बच पाना हमेशा संभव नहीं होता। कई बार हम स्वयं को ऐसे माहौल में घिरा हुआ पाते हैं जहाँ हर ओर निराशा और नकारात्मकता ही दिखाई देती है। ऐसे में सकारात्मक बने रहने की बात मात्र एक खोखला उपदेश लगने लगती है। लेकिन क्या सकारात्मक सोच का अर्थ केवल परिस्थितियों को नज़रअंदाज़ करना है, या फिर उनमें भी अवसर और सीख खोज लेना? इसी प्रश्न का सरल, सुंदर और प्रेरणादायक उत्तर देती है यह लघुकथा "बी पॉजिटिव"। बी पॉजिटिव "ओह! कम ऑन मम्मा! अब आप फिर से मत कहना अपना वही 'बी पॉजिटिव'! कुछ भी पॉजिटिव नहीं होता हमारे पॉजिटिव सोचने से। ऐसे टॉक्सिक लोगों के साथ, इतने नेगेटिव माहौल में कैसे पॉजिटिव रहें? कैसे पॉजिटिव सोचें जब आस-पास इतनी नेगेटिविटी हो? और कब तक पॉजिटिव रह सकते हैं? कोशिश कर भी लें तो क्या बदल जाएगा? कुछ भी पॉजिटिव नहीं होने वाला। बस भ्रम में रहो और खुद को दिलासा देते रहो!" अंकुर झुंझलाहट और बेचैनी के साथ आँगन में इधर-उधर चक्कर काटते हुए बोले जा रहा था। पिछले कुछ समय से वह लगातार लोगों की आलोचनाओं,...