सफर ख्वाहिशों का थमा धीरे -धीरे
यह एक भावपूर्ण प्रेरणादायक हिंदी कविता है जो जीवन में आने वाले बदलाव, आशा, विश्वास और आत्मबोध की यात्रा को दर्शाती है। “धीरे-धीरे” की लय में रची गई यह कविता मन के भीतर चल रहे द्वंद्व, उम्मीद और सच्चाई के उजागर होने की प्रक्रिया को बेहद संवेदनशीलता से व्यक्त करती है। जीवन में धैर्य और विश्वास बनाए रखना जरूरी है... मौसम बदलने लगा धीरे-धीरे, जगा, आँख मलने लगा धीरे-धीरे । जमाना जो आगे बहुत दूर निकला, रुका , साथ चलने लगा धीरे - धीरे। हुआ चाँद रोशन खिली सी निशा है, कि बादल जो छँटने लगा धीरे-धीरे । खुशी मंजिलों की मनाएँ या मानें, सफर ख्वाहिशों का थमा धीरे -धीरे। अवचेतन में आशा का दीपक जला तो, मुकद्दर बदलने लगा धीरे-धीरे । हवा मन - मुआफिक सी बहने लगी है, मन में विश्वास ऐसा जगा धीरे -धीरे । अनावृत हुआ सच भले देर से ही, लगा टूटने अब भरम धीरे-धीरे । पढ़िए एक और रचना इसी ब्लॉग पर जिसमें अपना भला है, बस वो होना है #हिंदीकविता #प्रेरणादायककविता #जीवनयात्रा #नईकविता #स्त्रीमन