संदेश

फ़रवरी, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

तीन कुण्डलिया :- भारत महान, हार और विचलित

चित्र
अनुभूति पत्रिका में प्रकाशित  तीन कुण्डलिया कुण्डलिया हिन्दी साहित्य का एक लोकप्रिय छंद है जो अपनी लय, भाव और संदेश के कारण पाठकों को आकर्षित करता है। प्रस्तुत हैं तीन कुण्डलिया— 'भारत महान', 'हार' और 'विचलित'। इन रचनाओं में देशप्रेम, संघर्ष में सकारात्मक सोच तथा मानसिक संतुलन बनाए रखने का संदेश दिया गया है।  भारत महान सारे जग मे हो रहा ,भारत का गुणगान । शुभ संस्कारी भावना, है इसकी पहचान ।  है इसकी पहचान, सभ्यता बड़ी निराली । सर्व धर्म सत्कार, बनाता गौरवशाली । कहे सुधा सुन मीत, लगा लो तुम भी नारे । भारत देश महान, कह रहे जग में सारे।। हार हार करें स्वीकार जो, होते नहीं निराश । सतत परिश्रम कर सदा,मन में रखते आस ।। मन में रखते आस, नहीं बाधा से डरते । गिरकर उठते रोज, कभी ना मन से थकते ।। कहे सुधा निज बात, है यही जीत का सार । करते रहें प्रयास, सौपान बनेगी हार ।। बिचलित विचलित गर मन हो रहा, कर लें प्राणायाम । साधें श्वास - प्रश्वास निज, मिले सुखद आराम ।। मिले सुखद आराम, धैर्य मन में है आता । मिटे बिचार विकार, भाव निर्मल हो जाता ।। कहे सुधा सुन मीत,श्वास साधें जो नियमित...

बसंत तेरे आगमन पर

चित्र
बसंत तेरे आगमन पर खिलखिलाई ये धरा भी इक नजर देखा गगन ने तो लजाई ये धरा भी कुहासे की कैद से अब मुक्त रवि हर्षित हुआ रश्मियों से जब मिला तो मुस्कराई ये धरा भी बसंत तेरे आगमन पर खिलखिलाई ये धरा भी नभ निरभ्र  आज ज्यों उत्सव कोई मना रहा शशि सितारों संग निशा की बारात लेके आ रहा शशि निशा की टकटकी पर फुसफुसाई ये धरा भी बसंत तेरे आगमन पर खिलखिलाई ये धरा भी अधखिली सी कुमुदिनी पे भ्रमर जब मंडरा रहा पास आकर बड़ी अदा से मधुर गुनगुना रहा दूर जाये जब भ्रमर तो तिलमिलाई ये धरा भी बसंत तेरे आगमन पर खिलखिलाई ये धरा भी इक नजर देखा गगन ने तो लजाई ये धरा भी                               चित्र साभार गूगल से पढ़िए बसंत ऋतु पर एक गीत बसंत की पदचाप

कहमुकरी

चित्र
बल विद्या बुद्धि को बढ़ाता बस धनवानों से है नाता है छोटा पर बड़े हैं काम क्या सखि साजन ?... ...........न सखि बादाम । बिन उसके मैं जी न पाऊँ हर पल मैं उसको ही चाहूँ अब तक उसका न कोई सानी क्यों सखि साजन ?......... .................... ना सखी पानी। है छोटा पर काम बड़े हैं कण कोशों में भरे पड़े हैं कीट-पतंगों से अनुराग क्या सखि साजन ?.... .................. नहिं री पराग । प्रेम प्रतीक है माना जाता मन को मेरे अति हर्षाता काँटों में भी रहे शादाब हैं सखी साजन ?...... ..................नहिं री गुलाब ।   चित्र साभार गूगल से.....

बसंत की पदचाप

चित्र
                                                                                        चित्र साभार प्रिंट्स से बसंत की पदचाप सुन शिशिर अब सकुचा रही कुहासे की चादर समेटे  ्पतली गली से जा रही । हवाएं उधारी ले धरा पात पीले झड़ा रही       नवांकुर से होगा नवसृजन       मन्द-मन्द मुस्करा रही । फूली सरसों लहलहाके सबके मन को भा रही अमराइयों में झूम-झूमे    कोकिला भी गा रही । शिशिर देखे पीछे मुड़ के जीते कैसे मुझसे लड़ के !       रवि-रश्मियां भी खिलखिला के वसंत-राग गा रही  । पंखुड़ियाँ फूलों लदी सुगन्ध हैंं फैला रही गुनगुना रहे भ्रमर   तितलियां मंडरा रही । नवेली सी सजी धरा घूँघट में यूँ शरमा रही रति स्वयं ज्यों काम संग  अब धरा में आ रही । बसंत ऋतु पर एक और रचना पढ़िए निम्न लिंक पर ●  ऐ बसंत ...

कह मुकरी.....प्रथम प्रयास

चित्र
               चित्र सभार गूगल से.... ◆ चाह देखकर भाव बढ़ाता      हाथ लगाओ खूब रुलाता      है सखी उसको खुद पर नाज      क्या सखी साजन ?.....                 ..........ना सखी प्याज । ◆   बढ़ती भीड़ घटे बेचारा       वही तो हम सबका सहारा       उसके बिन न जीवन मंगल      क्या सखी साजन ?.......        .................  ना सखी जंगल । ◆   जित मैं जाऊँँ उत वो आये        शीतल काया मन हर्षाये        रात्रि समा वह देता बाँध        क्या सखी साजन ?......          ..................ना सखी चाँद । ◆     भोर-साँझ वह मन को  भाये         सर्दियों  में तन-मन गर्माये         उसके लिए सबकी ये राय        ...

फ़ॉलोअर

लेबल

कुण्डलिया छन्द3 गजल11 गढ़वाली कविता एवं उसका हिन्दी रूपांतरण1 गढ़वाली गीत1 गर्मी पर कविता1 गर्मी पर बाल कविता1 गीत18 चौपाई1 जलवायु परिवर्तन ग्लोबल वार्मिंग1 दोहा मुक्तक3 दोहे6 नवगीत15 नारी सशक्तिकरण1 पारिवारिक कहानी1 पुस्तक समीक्षा1 प्रसंग1 प्रार्थना3 प्रेणादायक आलेख1 प्रेरक लघुकथा1 प्रेरणादायक कहानी1 प्रेरणादायक हिंदी कविता1 बाल कविता3 भावनात्मक1 भावनात्मक रचना1 मन1 मनहरण घनाक्षरी छंद6 महिला सशक्तिकरण पर प्रेरणादायक कहानी।1 मुक्तक4 मुहावरे पर आधारित लघुकथा2 रिश्ते1 रोला छंद2 लघु कथा2 लघु कहानी6 लघुकथा20 लेख4 व्यंग कविता1 व्यंग लेख1 शिक्षा -परीक्षा1 संघर्ष1 संस्मरण1 संस्मरणात्मक लेख1 सकारात्मक सोच1 समीक्षा2 साहित्य1 हाइबन1 हायकु3 हास्यव्यंग कविता1 हास्यव्यंग लघुकथाएं1 हिंदी भावनात्मक कहानी1 हिंदी साहित्य1 हिन्दी कविता1
ज़्यादा दिखाएं