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शिव महिमा पर दोहे और दोहा-मुक्तक

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परिचय सावन मास में शिवभक्ति का विशेष महत्व माना जाता है। इसी भक्ति-भाव से प्रेरित होकर प्रस्तुत शिव महिमा पर दोहे और दोहा-मुक्तक  लिखे हैं। इन रचनाओं में भोलेनाथ के दिव्य स्वरूप, नीलकंठ रूप, भक्तवत्सलता और उनकी अपरंपार महिमा को शब्द देने का विनम्र प्रयास किया गया है।                           1.  महादेव शिव सत्य हैं, बाघम्बर बागीश ।     लिंगराज हरि हर स्वयं, उमानाथ जगदीश ।। 2. भाँग धतूरा बिल्वपत्र, अर्घ्य करें शिवभक्त ।     पूजन वंदन साधना, हो शिव में अनुरक्त ।। 3. देवों के भी देव शिव, करते बेड़ा पार ।     आशुतोष भगवान की, महिमा अपरंपार ।। 4 . मस्तक चंद्र विराजते, गल भुजंग की माल ।     कर त्रिशूल डमरू सजे, कटि बाघम्बर छाल ।। 5 .  भस्म विभूषित देह है, शिव सुंदर सोमेश ।      स्वयं हलाहल पान कर, हरते भव के क्लेश ।। दोहा मुक्तक - 1.  शिव शंकर भगवान को, पूजें सावन मास ।     शिवभक्तों के वास्ते, दिन सावन के खास ।।     बम-बम भोलेनाथ क...

करते रहो प्रयास | प्रेरणादायक दोहे और सकारात्मक सोच

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परिचय जीवन में सफलता का रास्ता हमेशा सरल नहीं होता। कई बार असफलता, ठोकर और बाधाएँ मन को निराश कर देती हैं, लेकिन निरंतर प्रयास और धैर्य ही आगे बढ़ने की राह बनाए रखते हैं। इन्हीं भावों को सरल शब्दों में व्यक्त करते हुए मैंने ये प्रेरणादायक दोहे लिखे हैं 1. करते करते ही सदा, होता है अभ्यास ।     नित नूतन संकल्प से, करते रहो प्रयास।। 2. मन से कभी न हारना, करते रहो प्रयास ।   सपने होंगे पूर्ण सब, रखना मन में आस ।। 3. ठोकर से डरना नहीं, गिरकर उठते वीर ।   करते रहो प्रयास नित, रखना मन मे धीर ।। 4. पथबाधा को देखकर, होना नहीं उदास ।    सच्ची निष्ठा से सदा, करते रहो प्रयास ।। 5. प्रभु सुमिरन करके सदा, करते रहो प्रयास ।    सच्चे मन कोशिश करो, मंजिल आती पास ।। निष्कर्ष इन दोहों के माध्यम से मन में यही कहने का प्रयास किया है कि परिस्थितियाँ चाहे जैसी हों, प्रयास की डोर हाथ से नहीं छूटनी चाहिए। धैर्य और निरंतर कर्म के साथ आगे बढ़ते रहने में ही जीवन की राह को बेहतर बनाने की उम्मीद छिपी रहती है। हार्दिक अभिनंदन🙏 पढ़िए एक और रचना निम्न लिंक पर उत्तराखंड में मधु...

शारदीय नवरात्र का ,आया पावन पर्व (दोहे)

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  1. शारदीय नवरात्र का, आया पावन पर्व ।        नवदुर्गा नौरूप की, गाते महिमा सर्व ।। 2. नौ दिन के नवरात्र का , करते जो उपवास ।        नवदुर्गा माता सदा , पूरण करती आस ।। 3. जगराते में हैं सजे, माता के दरबार ।      गूँज रही दरबार में, माँ की जय जयकार ।। 4. माता के नवरूप का, पूजन करते लोग ।      सप्तसती के पाठ से, बनें सुखद संयोग ।। 5. संकटहरणी माँ सदा, करती संकट दूर ।      घर घर खुशहाली रहे, धन दौलत भरपूर ।। 6. शारदीय नवरात्र की, महिमा अपरम्पार ।    विधिवत पूजन कर सदा, मिलती खुशी अपार ।। हार्दिक अभिनंदन आपका🙏 पढ़िए एक और रचना कुण्डलिया छंद में ●  व्रती रह पूजन करते

शिक्षक दिवस पर दोहे | गुरु महिमा और शिक्षक सम्मान पर भावपूर्ण दोहे

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परिचय शिक्षक हमारे जीवन को सही दिशा देने वाले मार्गदर्शक होते हैं। उनके ज्ञान, संस्कार और मार्गदर्शन से विद्यार्थी न केवल शिक्षा प्राप्त करता है, बल्कि जीवन के मूल्यों को भी समझता है। शिक्षक दिवस पर प्रस्तुत ये दोहे गुरु के प्रति सम्मान, ज्ञान की महिमा और बदलते डिजिटल युग में शिक्षा की भूमिका को रेखांकित करते हैं। शिक्षक दिवस पर गुरु महिमा के दोहे    💐शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 💐 शिक्षक शिक्षा दे रहे, गुरु देते हैं ज्ञान । शिक्षा के उत्थान से, ज्ञानी बने महान ।। शिक्षक पुंज प्रकाश के, गुरु दिखलाते राह । विश्वजीत बनते वही, अंतर मिलती थाह ।। सद्गुरु का ले आसरा , पायें अंतर ज्ञान । अनुशासित जीवन जिएं, मिले तभी सम्मान ।। शिक्षक भी संज्ञान लें, डिजिटल युग है आज । पोथी अब लिखते नहीं ,कम्प्यूटर पर काज ।। शिक्षक भी संज्ञान लें , बड़े चतुर हैं छात्र । अनुशासित जीवन करें, केवल शिक्षण मात्र ।। निष्कर्ष शिक्षक केवल पुस्तकीय ज्ञान देने वाले नहीं, बल्कि जीवन की राह दिखाने वाले मार्गदर्शक भी होते हैं। शिक्षक दिवस हमें उनके प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर देता है। आशा है...

सावन में शिव भक्ति के दोहे | भगवान शिव और कांवड़ पर भक्तिमय दोहे

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परिचय सावन का पावन महीना भगवान शिव की भक्ति और आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इस महीने मंदिरों में शिवलिंग पर जलाभिषेक, पूजा-अर्चना और हर-हर महादेव के जयघोष से वातावरण भक्तिमय हो उठता है। कांवड़ यात्रा भी सावन की शिवभक्ति का महत्वपूर्ण अंग है। प्रस्तुत सावन में शिव भक्ति के दोहों में भगवान शिव, शिवलिंग, कांवड़ और गंगाजल के प्रति भक्तों की श्रद्धा और समर्पण को शब्दों में पिरोने का प्रयास किया गया है।             ■ सावन में भगवान शिव की भक्ति आया सावन मास है , मंदिर लगी कतार । भक्त डूबते भक्ति में, गूँज रही जयकार ।। लिंग रूप भगवान का, पूजन करते भक्त । कर दर्शन शिवलिंग के,  हुआ हृदय अनुरक्त । ओघड़दानी देव शिव, बाबा भोलेनाथ । जपें नाम सब आपका, जोड़े दोनों हाथ ।। करो कृपा मुझ दीन पर, हे शिव गौरीनाथ । हर लो दुख संताप प्रभु, सर पर रख दो हाथ ।। बम बम भोले बोलकर, भक्त करें जयकार । विधिवत व्रत पूजन करें, मिलती खुशी अपार ।।                      ■   काँवड यात्रा और शिव भक्ति काँधे में काँवड स...

मिला कुण्डली ब्याहते ! विवाह और रिश्तों पर दोहे

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परिचय विवाह के बाद जब दो लोग एक-दूसरे के जीवन का हिस्सा बनते हैं, तो रिश्ते में प्रेम के साथ-साथ समझ और सामंजस्य की भी जरूरत होती है। इसी रिश्ते के अलग-अलग रंगों और मन के भावों को मैंने इन दोहों में शब्द देने का प्रयास किया है। मिला कुण्डली ब्याहते, ग्रह गुण मेल आधार । अजनबी दो एक बन, बसे नया घर - बार । निकले दिन हफ्ते गये,  गये मास फिर साल । कुछ के दिल मिल ही गये, कुछ का खस्ता हाल। दिल मिल महकी जिंदगी, घर आँगन गुलजार । जोड़ी जो बेमेल सी, जीवन उनका भार । कुछ इकतरफा प्रेम से, सींचे निज संसार । साथी से मिलता नहीं, इक कतरा भी प्यार । कुछ को बिछड़े प्रेम का, गहराया उन्माद । जीवन आगे बढ़ रहा, ठहरे यादों साथ। साथी में ढूँढ़े सदा, अपना वाला प्यार। गुण उसके दिखते नहीं, करते व्यर्थ प्रहार । अनदेखा कर आज को, बीती का कर ध्यान । सुख समृद्धि विहीन ये, जीवन नरक समान । निष्कर्ष रिश्तों में प्रेम और अपनापन बना रहे तो छोटी-छोटी बातें भी जीवन में मिठास घोल देती हैं। मेरी यही कामना है कि हर दांपत्य जीवन में आपसी समझ, विश्वास और प्रेम बना रहे। ✨धन्यवाद🙏 जीवन के विभिन्न अनुभवों और व्यवहार पर आधारित मेरे क...

उत्तराखंड में मधुमास - दोहे

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  नवपल्लव से तरु सजे, झड़़े पुराने पात । महकी मधुर बयार है, सुरभित हुआ प्रभात ।। पुष्पों की मुस्कान से, महक रही भिनसार । कली-कली पे डोलके, भ्रमर करे गुंजार ।। भौरे गुनगुन गा रहे , स्नेह भरे अब गीत । प्रकृति हमें समझा रही ,परिवर्तन की रीत ।। आम्र बौंर पिक झूमता , कोकिल कूके डाल ।  बहती बासंती हवा   टेसू झरते लाल ।।  गेहूँ बाली हिल रही, पुरवाई के संग । पीली सरसों खिल रही, चहुँदिशि बिखरे रंग ।। पिघली बर्फ़ पहाड़ की, खिलने लगे बुरांस । सिंदूरी सेमल खिले, फ्यूंली फूली खास ।। श्वेत पुष्प से लद रहे, हैं मेहल के पेड़ । पंछी घर लौटन लगे, शहर प्रवास नबेड़ ।। बन-बन हैं मन मोहते, महके जब ग्वीराल । थड़िया-चौंफला गीत सु, गूँज उठी चौपाल ।। बेडू तिमला फल पके, पके हिंसर किनगोड़ । काफल, मेलू भी पके,   लगती सबमें होड़ ।। हरियाली चौखट लगी, सजे फूल दहलीज । फूलदेइ त्यौहार में, हर मन हुआ बहीज ।। जीवन मधुमय हो गया , मन में है उल्लास । प्रकृति खुशी से झूमती,आया जब मधुमास ।। भिनसार=सुबह नबेड़=निपटाकर) बहीज=आनंदित) इसके अलावा उत्तराखंड के पर्व , लोकगीत-नृत्य और फल एवं फूलों के वृक्ष आदि...

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