धन्य-धन्य कोदंड | श्रीराम पर कुण्डलिया छंद
💐 विजयादशमी पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं💐 परिचय विजयादशमी का पर्व भगवान श्रीराम की विजय और धर्म की स्थापना का स्मरण कराता है। श्रीराम के धनुष कोदंड का उल्लेख आते ही उनके शौर्य, पराक्रम और मर्यादा पुरुषोत्तम स्वरूप की छवि मन में उभरती है। इसी भावभूमि में कोदंड के माध्यम से श्रीराम के पराक्रम और कर्मभाव को शब्द देने का मेरा यह एक प्रयास है। पुरुषोत्तम श्रीराम का, धनुष हुआ कोदंड । शर निकले जब चाप से, करते रोर प्रचंड ।। करते रोर प्रचंड, शत्रुदल थर थर काँपे। सुनकर के टंकार, विकल हो बल को भाँपे ।। कहे सुधा कर जोरि, कर्म निष्काम नरोत्तम । सर्वशक्तिमय राम, मर्यादा पुरुषोत्तम ।। अति गर्वित कोदंड है, सज काँधे श्रीराम । हुआ अलौकिक बाँस भी, करता शत्रु तमाम ।। करता शत्रु तमाम, साथ प्रभुजी का पाया । कर भीषण टंकार, सिंधु का दर्प घटाया ।। धन्य धन्य कोदंड, धारते जिसे अवधपति । धन्य दण्डकारण्य, सदा से हो गर्वित अति । निष्कर्ष कोदंड केवल श्रीराम के शौर्य का प्रतीक नहीं, बल्कि उनके धर्म, मर्यादा और कर्तव्यनिष्ठा की स्मृति भी कराता है। इन कुण्डलियों में उसी भाव को अपने शब्दों में अभिव्यक्त करने क...