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शिव महिमा पर दोहे और दोहा-मुक्तक

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परिचय सावन मास में शिवभक्ति का विशेष महत्व माना जाता है। इसी भक्ति-भाव से प्रेरित होकर प्रस्तुत शिव महिमा पर दोहे और दोहा-मुक्तक  लिखे हैं। इन रचनाओं में भोलेनाथ के दिव्य स्वरूप, नीलकंठ रूप, भक्तवत्सलता और उनकी अपरंपार महिमा को शब्द देने का विनम्र प्रयास किया गया है।                           1.  महादेव शिव सत्य हैं, बाघम्बर बागीश ।     लिंगराज हरि हर स्वयं, उमानाथ जगदीश ।। 2. भाँग धतूरा बिल्वपत्र, अर्घ्य करें शिवभक्त ।     पूजन वंदन साधना, हो शिव में अनुरक्त ।। 3. देवों के भी देव शिव, करते बेड़ा पार ।     आशुतोष भगवान की, महिमा अपरंपार ।। 4 . मस्तक चंद्र विराजते, गल भुजंग की माल ।     कर त्रिशूल डमरू सजे, कटि बाघम्बर छाल ।। 5 .  भस्म विभूषित देह है, शिव सुंदर सोमेश ।      स्वयं हलाहल पान कर, हरते भव के क्लेश ।। दोहा मुक्तक - 1.  शिव शंकर भगवान को, पूजें सावन मास ।     शिवभक्तों के वास्ते, दिन सावन के खास ।।     बम-बम भोलेनाथ क...

सावन में शिव भक्ति के दोहे | भगवान शिव और कांवड़ पर भक्तिमय दोहे

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परिचय सावन का पावन महीना भगवान शिव की भक्ति और आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इस महीने मंदिरों में शिवलिंग पर जलाभिषेक, पूजा-अर्चना और हर-हर महादेव के जयघोष से वातावरण भक्तिमय हो उठता है। कांवड़ यात्रा भी सावन की शिवभक्ति का महत्वपूर्ण अंग है। प्रस्तुत सावन में शिव भक्ति के दोहों में भगवान शिव, शिवलिंग, कांवड़ और गंगाजल के प्रति भक्तों की श्रद्धा और समर्पण को शब्दों में पिरोने का प्रयास किया गया है।             ■ सावन में भगवान शिव की भक्ति आया सावन मास है , मंदिर लगी कतार । भक्त डूबते भक्ति में, गूँज रही जयकार ।। लिंग रूप भगवान का, पूजन करते भक्त । कर दर्शन शिवलिंग के,  हुआ हृदय अनुरक्त । ओघड़दानी देव शिव, बाबा भोलेनाथ । जपें नाम सब आपका, जोड़े दोनों हाथ ।। करो कृपा मुझ दीन पर, हे शिव गौरीनाथ । हर लो दुख संताप प्रभु, सर पर रख दो हाथ ।। बम बम भोले बोलकर, भक्त करें जयकार । विधिवत व्रत पूजन करें, मिलती खुशी अपार ।।                      ■   काँवड यात्रा और शिव भक्ति काँधे में काँवड स...

हरते सबके कष्ट सदाशिव भोले शंकर | शिव भक्ति कुण्डलिया छंद

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 परिचय भगवान शिव की महिमा और सावन की शिवभक्ति से भावित यह कुण्डलिया छंद सदाशिव भोले शंकर को समर्पित है। इसमें भोलेनाथ के करुणामय स्वरूप, भक्तों के प्रति उनकी कृपा और शिव नाम के प्रति आस्था को शब्द देने का प्रयास किया गया है।                        【1】 शंकर भोलेनाथ शिव , नंदीश्वर, भगवान । बाघम्बर भैरव शिवा, शम्भू कृपा निधान । शम्भू कृपा निधान, उमापति बम बम भोले । अवढर दानी नाथ, सभी की किस्मत खोले । जपते नमः शिवाय, भक्त सावन में घर घर  । हरते सबके कष्ट, सदाशिव भोले शंकर  ।।                            【2】 शिवशंकर कैलाशपति , महिमा अपरम्पार । शशिशेखर विरुपाक्ष शिव,जग के पालनहार । जग के पालनहार,  दीन के हैं रखवारे । बम बम भोले घोष, भक्त करते जयकारे । भजे सुधा कर जोरि, नमामि जै गिरिजेश्वर । करो सृष्टि उद्धार, कृपानिधि जै शिवशंकर ।। ✨धन्यवाद🙏 सावन और शिव भक्ति पर आधारित अन्य कुण्डलिया छंद  ●  मन में भरे उमंग, मनोहर पावन सावन

मन में भरे उमंग, मनोहर पावन सावन - सावन पर कुण्डलिया छंद

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परिचय सावन का मौसम आते ही प्रकृति हरियाली, वर्षा और उमंग से भर उठती है। रिमझिम फुहारों और मनोहारी पवन के बीच मन भी आनंद से सराबोर हो जाता है। सावन की इसी सुंदर अनुभूति और शिवभक्ति को कुण्डलिया छंद के माध्यम से शब्द देने का एक छोटा-सा प्रयास है।   सावन बरसा जोर से, नाच उठा मनमोर । कागज की कश्ती बही , बाल मचाये शोर ।। बाल मचाये शोर, पींग झूले की भरते । रिमझिम बरसे मेघ, भीग अठखेली करते ।। कहे सुधा सुन मीत, कि पावस है मनभावन । मन में भरें उमंग, मनोहर पावन सावन ।। आया सावन मास अब, मन शिव में अनुरक्त । पूजन अर्चन जग करे, शिव शिव जपते भक्त ।। शिव शिव जपते भक्त, चल रहे काँवर टाँगे । करते शिव अभिषेक,  मन्नतें प्रभु से माँगे ।। चकित सुधा करजोरि, देखती शिव की माया । भक्ति भाव उल्लास ,  लिये अब सावन आया ।। निष्कर्ष सावन केवल ऋतु परिवर्तन का संकेत नहीं, बल्कि प्रकृति और मन दोनों में उमंग जगाने वाला मौसम है। वर्षा की फुहारों और शिवभक्ति से जुड़ी यही सुंदर अनुभूति इस कुण्डलिया छंद में शब्दों के रूप में उतर आई है। ✨धन्यवाद🙏 सावन की इस मनोहारी अनुभूति के साथ शिवभक्ति का भाव भी मन को सहज ...

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