ज़िन्दगी ! समझा तुझे तो मुस्कुराना आ गया
परिचय जीवन को समझना शायद उम्र बढ़ने के साथ-साथ स्वयं को समझने की भी एक यात्रा है। जीवन में आने वाली परिस्थितियाँ हमें बहुत कुछ सिखाती हैं। कभी कोई अनुभव मन को दुख देता है तो कभी वही अनुभव आगे बढ़ने की राह दिखाता है। जब हम जीवन के सुख-दुख को स्वीकार करना सीख जाते हैं, तब छोटी-छोटी खुशियाँ भी मन को मुस्कुराने का कारण दे जाती हैं। इन्हीं भावों को शब्द देने का प्रयास है मेरा यह गीत ‘ज़िन्दगी! समझा तुझे तो मुस्कुराना आ गया’ । दुपहरी बेरंग बीती सांझ हर रंग भा गया । ज़िन्दगी ! समझा तुझे तो मुस्कुराना आ गया । अजब तेरे नियम देखे,गजब तेरे कायदे । रोते रोते समझ आए,अब हँसी के फ़ायदे । भीगी पलकों संग लब को खिलखिलाना आ गया । ज़िन्दगी ! समझा तुझे तो मुस्कुराना आ गया । क्यों कहें संघर्ष तुझको, ये तो तेरा सिलसिला । नियति निर्धारित सभी, फिर क्या करें तुझसे गिला । सत्य को स्वीकार कर जीना जिलाना आ गया । ज़िन्दगी ! समझा तुझे तो मुस्कुराना आ गया । हो पूनम की रात सुन्दर या तिमिर घनघोर हो । राहें हों कितनी अलक्षित, आँधियाँ चहुँ ओर हो । हर हाल में मेरे 'साँवरे' तेरे गुण गुनाना आ गया । ज़िन्...