चींटी के पर निकलना | माँ की तपस्या पर प्रेरक लघुकथा
परिचय क्या सफलता केवल व्यक्ति की मेहनत का परिणाम होती है, या उसके पीछे माता-पिता के त्याग, संघर्ष और वर्षों की तपस्या भी छिपी होती है? यह लघुकथा उसी सच को उजागर करती है, जिसे सफलता मिलने के बाद अक्सर लोग भूल जाते हैं। आइए पढ़ते हैं "चींटी के पर निकलना" , एक ऐसी मार्मिक प्रेरक लघुकथा जो सफलता के साथ विनम्रता और माँ के त्याग का वास्तविक महत्व समझाती है। सफलता किसकी? बेटे की या माँ की तपस्या की "ये क्या बात हुई, आंटी! सफलता मुझे मिली और बधाइयाँ मम्मी को?" रोहन ने मुस्कराते हुए कहा। शीला ने स्नेह से उसकी ओर देखा और बोली, "हाँ बेटा! तेरी मम्मी की वर्षों की तपस्या रंग लाई है। बधाई तो उन्हें भी बनती है। और तुझे भी ढेरों शुभकामनाएँ। भगवान करे तू खूब तरक्की करे और हमेशा खुश रहे।" यह कहते हुए उसने रोहन के सिर पर प्यार से हाथ फेर दिया। रोहन थोड़ा असहज होकर बोला, "तपस्या कैसी, आंटी? मम्मी ने बस कुछ मन्नतें ही तो माँगी थीं। मेहनत तो मैंने दिन-रात पढ़कर की है। अगर मैं मेहनत न करता, तो क्या सिर्फ मन्नतों से मेरा चयन हो जाता?" शीला हल्का-सा मु...