‘समय साक्षी रहना तुम’ : रेणु बाला के काव्य-संग्रह की पुस्तक समीक्षा
परिचय ‘समय साक्षी रहना तुम’ रेणु बाला जी का काव्य-संग्रह है, जिसमें जीवन, रिश्तों, प्रकृति और प्रेम की अनेक संवेदनाएँ सहज और भावपूर्ण ढंग से अभिव्यक्त हुई हैं। इस पुस्तक में कवयित्री की संवेदनशील दृष्टि के साथ मानवीय मन के विविध भावों की सुंदर झलक मिलती है। प्रस्तुत समीक्षा में इसी भाव-संसार को समझने का एक विनम्र प्रयास है। ' ‘समय साक्षी रहना तुम’ : पुस्तक का परिचय समय साक्षी रहना तुम विधा – कविता-संग्रह रचनाकार – रेणु बाला जी अतल गहराइयों में आत्मा की जो भरेगा उजास नित-नित, गुजर जायेंगे दिन-महीने, ना होगा आँखों से ओझल किंचित। हो न जाऊँ तनिक मैं विचलित, प्राणों में धीरज भर देना तुम। अपने अनंत प्रवाह में बहना तुम, पर समय साक्षी रहना तुम!! ‘समय साक्षी रहना तुम’ रेणु बाला जी का प्रथम काव्य-संग्रह है, जिसमें उनकी संवेदनशील दृष्टि और जीवन के विविध अनुभवों की अभिव्यक्ति दिखाई देती है। ब्लॉग जगत से साहित्यिक लेखन की ओर बढ़ती उनकी रचनात्मक यात्रा का यह एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। पुस्तक का आवरण आकर्षक है। प्रथम पृष्ठ पर लेखिका ने इसे अपने बड़ों को समर्पित करते हुए उन्हें अपने जीवन का जीवट और ...