पा प्रियतम से प्रेम का वर्षण | वसंत ऋतु पर भावपूर्ण हिंदी कविता
परिचय वसंत ऋतु के आगमन के साथ प्रकृति में नवजीवन और उल्लास का संचार होने लगता है। सूनी डालियों पर नए पत्ते आने लगते हैं, फूल खिल उठते हैं और वातावरण में एक नई-सी ताजगी महसूस होती है। ‘पा प्रियतम से प्रेम का वर्षण’ कविता में वसंत के इसी आगमन के साथ प्रकृति और प्रेम से जुड़ी भावनाओं को शब्द देने का प्रयास किया गया है। शिशिर शरद से गुजर धरा का , व्यथित मलिन सा मुखड़ा । धूल धूसरित वृक्ष केश सब बयां कर रहे दुखड़ा । पीत पर्ण से जीर्ण वसन लख व्याकुल नभ घबराया । अंजुरि भर-भर स्नेह बिंदु फिर प्रेम से यूँ छलकाया । पा प्रियतम से प्रेम का वर्षण हुआ गुलाबी मुखड़ा । हर्षित मन नव अंकुर फूटे भूली पल में दुखड़ा । सीने से सट क्षितिज के पट धरा गगन से बोली । "नैना तेरे दीप दिवाली, वचन प्रेमरस होली । रंग दे मेरे मन का आँगन, अनगिन कष्ट भुलाऊँ । युग युग तेरे प्रेम के खातिर हद से गुजर मैं जाऊँ" । अधखुले नेत्र अति सुखातिरेक, नभ मंद-मंद मुस्काया । हर्षित दो मन तब हुए एक, बहुरंगी चाप बनाया । अद्भुत छवि लख मुदित सृष्टि, अभिनंदित ऋतुपति आये । करने श्रृंगारित वसुधा को फिर, स्वयं काम-रति धाये । निष्कर्ष वस...