छटाँक भर का

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  "ओ गॉड ! ये तो मेरे साथ चीटिंग है " ! एयरपोर्ट से बाहर निकलते बेटे के मुँह से ऐसे शब्द सुनते ही शर्मा जी और उनकी पत्नी एक दूसरे का मुँह ताकने लगे । बेटे से मिलने का उत्साह जैसे कुछ ठंडा सा पड़ गया ।   सोचने लगे कहाँ तो हमें लगा कि इतने समय बाद हमें देखकर बेटा खुश होगा पर ये तो भगवान को ही कोसने लगा है" । तभी बेटा आकर दोनों के पैर छूकर गले मिला और फटाफट सामान को गाड़ी में रखवा कर तीनों जब बैठ गए तब पापा ने चुटकी लेते हुए कहा , " क्यों रे ! किसका इंतजार था तुझे ? कौन आयेगा तुझे लेने यहाँ..?.. हैं ?... अच्छा आज तो वेलेंटाइन डे हुआ न तुम लोगों का ! कहीं कोई दोस्त तो नहीं आयी है लेने ! हैं ?..  बता दे "? बेटा चिढ़ते हुए - "मम्मी ! देख लो पापा को ! कुछ भी बोल देते हैं" । "सही तो कह रहे तेरे पापा" - मम्मी भी मुस्कुराते हुए बोली,  "हमें देखकर भगवान को जो कोसने लगा तू !  क्या कह रहा था ये- " ओ गॉड ! ये तो मेरे साथ चीटिंग है " दोनों ने एकसाथ दोहराया और हँसने लगे । "शिट ! तो आप लोगों ने सुन लिया"  ? "बेवकूफ ! गॉड ने हमें भी...

हरते सबके कष्ट सदाशिव भोले शंकर

 

God Shiva



                      【1】

शंकर भोलेनाथ शिव , नंदीश्वर, भगवान ।

बाघम्बर भैरव शिवा, शम्भू कृपा निधान ।

शम्भू कृपा निधान, उमापति बम बम भोले ।

अवढर दानी नाथ, सभी की किस्मत खोले ।

जपते नमः शिवाय, भक्त सावन में घर घर  ।

हरते सबके कष्ट, सदाशिव भोले शंकर  ।।



                          【2】

शिवशंकर कैलाशपति , महिमा अपरम्पार ।

शशिशेखर विरुपाक्ष शिव,जग के पालनहार ।

जग के पालनहार,  दीन के हैं रखवारे ।

बम बम भोले घोष, भक्त करते जयकारे ।

भजे सुधा कर जोरि, नमामि जै गिरिजेश्वर ।

करो सृष्टि उद्धार, कृपानिधि जै शिवशंकर ।।



पढ़िए सावन और शिव भक्ति पर आधारित अन्य कुण्डलिया छंद निम्न लिंक पर ।

● मन में भरे उमंग, मनोहर पावन सावन



टिप्पणियाँ

  1. बहुत सुंदर भक्ति और भावों से पूर्ण कुंडलियाँ सुधा जी ।
    हार्दिक बधाई।

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  2. बहुत सुंदर भक्ति और भावों से पूर्ण कुंडलियाँ सुधा जी ।
    हार्दिक बधाई।
    कुसुम कोठारी 'प्रज्ञा'

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  3. बहुत सुंदर एवम धन्यवाद इस पवित्र श्रावण मास में भोले बाबा की भक्तिमय स्तुति की रचना के लिए पुनः धन्यवाद।

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  4. बहुत ही सुन्दर भक्ति मय रचना मन आह्लादित हो गया सखी

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  5. भक्ति भाव से पूरित भगवान शिव को समर्पित कुण्डलियाँ मनभावन लगी ।अति सुन्दर सृजन सुधा जी !

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