हैलो शेरू ! बडे़ दिनों बाद दिखाई दिया,कहाँ व्यस्त था यार ! आजकल ? (डॉगी टाइगर ने डॉगी शेरू के पास जाकर बड़ी आत्मीयता से पूछा) तो शेरू खिसियाते हुए पीछे हटा और बुदबुदाते हुए बोला; ओह्हो!फँस गया... अरे यार ! परे हट ! मालकिन ने देख लिया तो मेरी खैर नहीं , यूँ गली के कुत्तों से मेरा बात करना मालकिन को बिल्कुल नहीं भाता , मेरी बैण्ड बजवायेगा क्या ?.. टाइगर - "अरे शेरू! मैं कोई गली का कुत्ता नहीं ! अबे यार ! तूने मुझे पहचाना नहीं ? मैं 'टाइगर' तेरे मालिक के दोस्त वर्मा जी का टाइगर ! शेरू (आश्चर्य चकित होकर) -- टाइगर ! अरे ! ये तेरी क्या दशा हो गयी है यार ! कितना कमजोर हो गया है तू ! मैं तो क्या तुझे तो कोई भी नहीं पहचान पायेगा ।क्या हुआ यार ! बीमार है क्या ? इलाज-विलाज नहीं करवाया क्या तेरे मालिक ने ? डींगें तो बड़ी-बड़ी हांकता है तेरा मालिक ! ओह ! माफ करना यार ! अपने मालिक के बारे में सुनकर गुस्सा आ रहा होगा, हैं न ! मुझे भी आता है , क्या करे ? वफादार प्राणी जो होते हैं हम कु...