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आइना' समाज का | शराब की लत और पत्नी की बेबसी पर मार्मिक संस्मरण

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परिचय सुबह की सैर केवल शरीर को नहीं, मन को भी अनेक अनुभव दे जाती है। उस दिन भी मैं रोज़ की तरह मॉर्निंग वॉक पर निकली थी। रास्ते में जो दृश्य देखा, उसने कदम तो आगे बढ़ा दिए, लेकिन मन बहुत देर तक उसी जगह अटका रहा। यह केवल एक शराबी व्यक्ति की कहानी नहीं थी, बल्कि उस पत्नी की भी थी, जो पति के गुस्से, अपमान और नशे के बावजूद उसे सुरक्षित घर ले आने की कोशिश में लगी रही। शराब केवल व्यक्ति को नहीं, पूरे परिवार को तोड़ती आज मॉर्निंग वॉक करते-करते मैं सामान्य से कुछ अधिक दूर निकल गई। सड़क किनारे बने बस स्टॉप की बेंच पर बैठकर थोड़ा विश्राम कर ही रही थी कि पास से किसी सिक्योरिटी गार्ड की तेज़ आवाज़ सुनाई दी। वह किसी पर गुस्सा कर रहा था। कुछ लोग भी वहाँ इकट्ठा होने लगे।। जिज्ञासावश मैं भी वहाँ पहुँची। देखा, एक व्यक्ति सड़क के बीचों-बीच नशे की हालत में पड़ा हुआ था। सिक्योरिटी गार्ड उसे डाँटते हुए उठाने की कोशिश कर रहा था ताकि कोई दुर्घटना न हो जाए। तभी लगभग अधेड़ उम्र की एक महिला तेज़ी से वहाँ पहुँची। उसने गार्ड के साथ मिलकर उस व्यक्ति को सड़क के किनारे बैठाया और गार्ड का धन्यवाद किया। अब समझ आ...

प्रकृति का संदेश

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हरी - भरी धरती नीले अम्बर की छाँव प्रकृति की शोभा बढाते ये गाँव। सूर्य चमक कर देता खुशहाली का सन्देश, हवा महककर बोली; "मैं तो घूमी हर देश"।। चँदा ने सिखाया देना सबको नया उजाला, तारे कहते ; गीत सुनाओ सबको मस्ती वाला। देना सीखो ये ही तो  है प्रकृति का सन्देश ! हवा महक कर बोली;"मैं तो घूमी सब देश"।। जीवन की जरूरत पूरी करते ये वृक्ष हमारे, बिन इनके तो अधूरे हैं जीवन के सपने सारे। धरती की प्यास बुझाना नदियों का लक्ष्य -विशेष, हवा महक कर बोली; "मै तो घूमी सब देश" ।। देखो ! आसमान ने पूरी, धरती को ढक डाला है, धरती ने भी तो सबको ,माँ जैसा सम्भाला है। अपनेपन  से सब रहना, ये है इनका सन्देश, हवा महक कर बोली; "मैं त़ो घूमी सब देश"।। पढिये प्रकृति पर आधारित मेरी एक और कविता  " प्रकृति की रक्षा, जीवन की सुरक्षा "

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