सैनिक, संत, किसान | देश और समाज को समर्पित दोहा मुक्तक
परिचय
देश और समाज के निर्माण में सैनिक, संत और किसान तीनों की अपनी महत्वपूर्ण भूमिका है। सैनिक देश की सीमाओं की रक्षा करता है, संत अपने ज्ञान और विचारों से जीवन को दिशा देते हैं और किसान अपने परिश्रम से अन्न उपजाकर सबका पोषण करता है। इन तीनों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता के भाव को शब्द देने का मेरा यह प्रयास है।
सैनिक
रक्षा करते देश की, सैनिक वीर जवान ।
लड़ते लड़ते देश हित, करते निज बलिदान ।
ओढ़ तिरंगा ले विदा, जाते अमर शहीद,
नमन शहीदों को करे, सारा हिंदुस्तान ।।
संत
संत समागम कीजिए, मिटे तमस अज्ञान ।
राह सुगम होंगी सभी, मिले सत्य का ज्ञान ।
अमल करे उपदेश जो, होगा जीवन धन्य,
मिले परम आनंद तब, खिले मनस उद्यान ।
किसान
खून पसीना एक कर , खेती करे किसान ।
अन्न प्रदाता है वही, देना उसको मान ।
सहता मौसम मार वह, झेले कष्ट तमाम,
उसके श्रम से पल रहा सारा हिंदुस्तान ।
सैनिक, संत, किसान
1) सीमा पर सैनिक खड़े, खेती करे किसान ।
संत शिरोमणि से सदा, मिलता सबको ज्ञान।
गर्वित इन पर देश है , परहित जिनका ध्येय,
वंदनीय हैं सर्वदा, सैनिक संत किसान ।।
2) सैनिक संत किसान से, गर्वित हिंदुस्तान ।
फर्ज निभाते है सदा, लिये हाथ में जान ।
रक्षण पोषण धर्म की, सेवा पर तैनात,
करते उन्नति देश की, सदा बढ़ाते मान ।।
निष्कर्ष
सैनिक, संत और किसान अपने-अपने कर्मक्षेत्र में समाज और देश के लिए योगदान देते हैं। इनके प्रति सम्मान का भाव मन में कृतज्ञता जगाता है। इन्हीं भावों को दोहा-मुक्तक के माध्यम से अभिव्यक्त करने का यह मेरा एक छोटा-सा प्रयास है।
✨धन्यवाद 🙏
जीवन के विभिन्न भावों से जुड़े मेरे एक और मुक्तक को भी यहाँ पढ़ा जा सकता है—

वाह !! अति सुन्दर सृजन । विविधता से परिपूर्ण अनूठी अभिव्यक्ति सुधा जी !
जवाब देंहटाएंतहेदिल से धन्यवाद मीना जी !
हटाएंआपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" पर मंगलवार 26 अगस्त 2025 को लिंक की जाएगी ....
जवाब देंहटाएंhttp://halchalwith5links.blogspot.in पर आप सादर आमंत्रित हैं, ज़रूर आइएगा... धन्यवाद!
!
हार्दिक धन्यवाद आ.रविंद्र जी !मेरी रचना चयन करने हेतु ।
हटाएंसादर आभार ।
बहुत सुंदर प्रस्तुति
जवाब देंहटाएंसादर आभार हरीश जी !
हटाएंसुंदर
जवाब देंहटाएंहार्दिक धन्यवाद आ.जोशी जी !
हटाएंसैनिक, संत और किसान देश और समाज के हित में दिन-रात लगे रहते हैं, सुंदर दोहे!
जवाब देंहटाएंहार्दिक आभार अनीता जी !
हटाएंबहुत हि सुंदर मुक्तक, सुधा दी।
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